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चतुर्थ वर्ग कर्मचारियों के संग्राम की ऐतिहासिक विजय: झुका प्रशासन, सहायक आयुक्त तत्काल हटाए गए, 5 मांगों पर बनी सहमति

नारायणपुर (चतुरपोस्ट ब्यूरो)। छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले से सरकारी कर्मचारियों के हक और स्वाभिमान से जुड़ी एक बेहद बड़ी और ऐतिहासिक खबर सामने आ रही है। छत्तीसगढ़ लघु वेतन शासकीय चतुर्थ वर्ग कर्मचारी संघ के जिला आह्वान पर आज जिला मुख्यालय में एक अभूतपूर्व और प्रचंड कलेक्ट्रेट महाघेराव आंदोलन संपन्न हुआ। मूसलाधार बारिश और प्रशासनिक रुकावटों की परवाह न करते हुए, जिले के समस्त शासकीय विभागों के हजारों चतुर्थ श्रेणी एवं दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों ने अपनी जायज मांगों को लेकर 2 किलोमीटर लंबा विशाल मार्च निकाला।

कर्मचारियों की इस चट्टानी एकजुटता और जनसैलाब के आगे आखिरकार जिला प्रशासन को झुकना पड़ा। रैली के बैरीकेड स्थल पर पहुँचने से पहले ही स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम स्वयं दो पुलिस गाड़ियों के साथ धरना स्थल पर पहुँचे और संघ के शीर्ष नेतृत्व को पूरे सम्मान के साथ कलेक्टर चैंबर में उच्च स्तरीय वार्ता के लिए लेकर गए।

कलेक्टर चैंबर में 40 मिनट तक चली बंद कमरे में मैराथन बैठक (The High-Level Meeting)

कलेक्टर नम्रता जैन (IAS) एवं अपर कलेक्टर वीरेंद्र बहादुर पंचभावे (IAS) की उपस्थिति में संघ के उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ लगभग 40 मिनट तक बिंदुवार गंभीर चर्चा हुई। कर्मचारियों के भारी आक्रोश और जायज दलीलों को संज्ञान में लेते हुए कलेक्टर नम्रता जैन ने संवेदनशीलता दिखाई और संघ की 7 में से 5 प्रमुख मांगों को तत्काल पूरा करने की प्रशासनिक स्वीकृति दे दी।

इसके परिणामस्वरूप (Consequently), आंदोलनकारियों के बीच भारी उत्साह देखा जा रहा है। हालांकि, कर्मचारियों ने स्पष्ट किया है कि यह आंशिक जीत है और बाकी बची दो मांगों के लिए संघर्ष जारी रहेगा।

Narayanpur Employees

कर्मचारियों की जिन 5 प्रमुख मांगों पर लगी मुहर (Key Consensuses)

कलेक्टर और कर्मचारी संघ के बीच हुई मैराथन बैठक में जिन 5 मांगों पर तत्काल सहमति बनी है, उनका विवरण इस प्रकार है:

✊ कर्मचारियों की स्वीकृत की गई प्रमुख मांगें:

  • 1 समयमान वेतनमान की स्वीकृति (मांग 2): सेवा के 10, 20 एवं 30 वर्ष पूर्ण कर चुके नियमित कर्मचारियों को तत्काल समयमान वेतनमान स्वीकृत किया जावेगा।
  • 2 स्थाई पदों पर समायोजन व पदोन्नति (मांग 3): वर्ष 2008 में नियमित किए गए 28 कर्मचारियों के 10 वर्ष पूर्ण होने पर उन्हें स्थाई पदों पर समायोजित कर पदोन्नति दी जावेगी।
  • 3 लंबित बकाये का एकमुश्त भुगतान (मांग 4): सेवानिवृत्त और दिवंगत कर्मचारियों के जी.पी.एफ़., डी.पी.एफ़., एवं जी.आई.एस. की लंबित बकाया राशि का शीघ्र एकमुश्त भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा।
  • 4 पारदर्शी युक्तियुक्तकरण (मांग 5): आश्रम एवं छात्रावासों में पदस्थ कर्मचारियों के संबंध में निर्देशानुसार सेल समाप्त कर पूरी तरह से पारदर्शी युक्तियुक्तकरण किया जावेगा।
  • 5 वरिष्ठता सूची और नियमित स्थापना (मांग 6): वरिष्ठता सूची तत्काल जारी कर आकस्मिक निधि में कार्यरत नियमित कर्मचारियों का रिक्त पदों पर नियमित स्थापना में समायोजन किया जावेगा।

प्रशासन का सबसे बड़ा एक्शन: सहायक आयुक्त तत्काल हटाए गए (The Biggest Action)

इस आंदोलन की सबसे बड़ी, त्वरित और चौंकाने वाली कामयाबी यह रही कि कर्मचारियों के साथ हो रहे कथित दुर्व्यवहार और प्रताड़ना के मामलों को जिला प्रशासन ने बेहद गंभीरता से लिया। कलेक्टर के साथ बैठक में तय आश्वासन के तुरंत बाद सहायक आयुक्त को उनके पद से हटा दिया गया है। सहायक आयुक्त पर हुई इस बड़ी दंडात्मक कार्रवाई को कर्मचारी संघ ने अपने आत्मसम्मान और स्वाभिमान की एक ऐतिहासिक जीत बताया है।

राष्ट्रीय उप-महामंत्री योगेश चौरे ने किया प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व (The Leadership)

इस बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण वार्ता की टेबल पर कर्मचारियों का पक्ष रखने के लिए संघ की ओर से राष्ट्रीय उप-महामंत्री योगेश चौरे स्वयं प्रतिनिधिमंडल को लीड कर रहे थे। उनके साथ जिला अध्यक्ष मंगलू उसेंडी के नेतृत्व में संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी मजबूती से डटे रहे।

प्रतिनिधिमंडल में मुख्य रूप से संचनालय अध्यक्ष सुरेश ढीढी, संयुक्त सचिव लोकेश वर्मा, सी.एस. प्रधान, अश्वनी सोनी, कुंजन सिंह बघेल, संध्या साहू, शिरोमणि यादव, समल वर्मा, नोहरू राम उसेंडी, कामदेव पांडे और कुशल नाग आदि वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद थे, जिन्होंने प्रत्येक कर्मचारी का पक्ष पूरी दृढ़ता के साथ कलेक्टर के समक्ष रखा।

शेष 2 मांगों पर संघर्ष जारी रहेगा: योगेश चौरे (Future Strategy)

इसके अतिरिक्त (In addition to this), कलेक्टर चैंबर से बाहर आकर धरना स्थल पर मौजूद हजारों कर्मचारियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय उप-महामंत्री योगेश चौरे और जिला अध्यक्ष मंगलू उसेंडी ने इसे संघ के इतिहास की बहुत बड़ी और गौरवशाली जीत बताया।

हालांकि, उन्होंने कर्मचारियों को आगाह करते हुए कहा कि मांग क्रमांक 1 (रिक्त पदों के विरुद्ध नियमित वेतनमान) और मांग क्रमांक 7 (दैनिक वेतन भोगी भाइयों के 2 माह का बकाया एरियर व संरक्षण) पर अभी पेंच फंसा हुआ है। इसे लेकर संघ का चरणबद्ध संघर्ष आगे भी पूरी ताकत से जारी रहेगा। जब तक हमारे अंतिम साथी को उसका पूरा हक नहीं मिल जाता, तब तक आंदोलन को पूर्ण विराम नहीं दिया जाएगा।

चतुरपोस्ट एनालिसिस: नारायणपुर प्रशासन की तत्परता सराहनीय

एक न्यूज़ एडिटर के नजरिए से देखा जाए तो नारायणपुर जिला प्रशासन और विशेषकर कलेक्टर नम्रता जैन द्वारा दिखाया गया यह रुख बेहद सराहनीय है। आमतौर पर कर्मचारियों के आंदोलनों को लंबा खींचा जाता है, जिससे आम जनता के काम प्रभावित होते हैं। लेकिन मूसलाधार बारिश के बीच स्थिति की संवेदनशीलता को भांपते हुए बंद कमरे में 40 मिनट की मैराथन बैठक करना और तत्काल प्रताड़ना के आरोपी सहायक आयुक्त को पद से हटाना यह दर्शाता है कि प्रशासन संवाद और त्वरित न्याय पर भरोसा रखता है।

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S. J. Kumar

पत्रकारिता के क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव । सुदीर्घ करियर में राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। जटिल मुद्दों के सरल विश्लेषण और खोजी रिपोर्टिंग के साथ राजनीति, प्रशासन और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है। पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में Chaturpost.com में सेवाएं दे रहे हैं।
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