
सक्ती / बिलासपुर (chaturpost.com desk):
छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की ताबड़तोड़ कार्रवाई जारी है, लेकिन इसके बावजूद रिश्वतखोर अधिकारियों के हौसले पस्त होने का नाम नहीं ले रहे हैं। सुबह की सबसे बड़ी खबर राज्य के सक्ती जिले से सामने आ रही है। यहां एसीबी बिलासपुर की टीम ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए जिला अस्पताल सक्ती के प्रभारी सिविल सर्जन को 1 लाख रुपये की रिश्वत (Bribe Amount) लेते हुए रंगे हाथ दबोच लिया है।
यह पूरी कार्रवाई Corruption Case में तब हुई जब डॉक्टर साहब अपने ही विभाग के एक पीड़ित कर्मचारी से वेतन का पे-डेटा भेजने के नाम पर मोटी रकम वसूल रहे थे। एसीबी की इस अचानक रेड के बाद पूरे स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है।
जानिए क्या है पूरा मामला (Case Background)
मिली जानकारी के अनुसार, सक्ती जिला स्वास्थ्य विभाग में पदस्थ फार्मासिस्ट ग्रेड-2 गंगा प्रसाद रत्नाकर फरवरी 2026 से जिला अस्पताल में अटैचमेंट पर कार्यरत हैं। आरोप है कि आरोपी प्रभारी सिविल सर्जन ने पीड़ित कर्मचारी का मई और जून महीने का Pay Data मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कार्यालय भेजने के बदले रिश्वत की मांग की थी।
सिविल सर्जन ने फरवरी से जून तक के कुल 5 महीनों के लिए 20-20 हजार रुपये प्रतिमाह (Monthly Cut) के हिसाब से 1 लाख रुपये की मांग रखी थी। रिश्वत न देने की सूरत में पीड़ित कर्मचारी का पिछले 2 महीने से वेतन रुका हुआ था, जिससे वह काफी परेशान चल रहा था।
ACB ने बिछाया जाल और स्कॉर्पियो में बिछा दी बिसात
रिश्वतखोरी और अधिकारी की तानाशाही से तंग आकर फार्मासिस्ट ने इसकी लिखित शिकायत बिलासपुर ACB Office में दर्ज कराई। शिकायत मिलते ही एसीबी की टीम ने गोपनीय तरीके से मामले का Verification कराया, जिसमें रिश्वत मांगने की पुष्टि हो गई।
सत्यापन के बाद एसीबी ने आरोपी को दबोचने के लिए एक सुनियोजित प्लान तैयार किया:
- स्थान का चुनाव: आरोपी सिविल सर्जन ने फरियादी को पैसे लेकर अपने गृह ग्राम डभरा बुलाया।
- ट्रैप लोकेशन: गुरुवार रात डभरा कॉलेज मोड़ के पास फरियादी रिश्वत के पैसे लेकर पहुंचा।
- रंगे हाथ गिरफ्तारी: जैसे ही प्रभारी सिविल सर्जन ने अपनी स्कॉर्पियो कार में बैठकर 1 लाख रुपये की नगदी ली, आसपास पहले से तैनात एसीबी की टीम ने उन्हें चारों तरफ से घेरकर Red Handed पकड़ लिया।
टीम ने मौके से केमिकल लगे हुए नोटों की पूरी राशि बरामद कर ली है। आरोपी के खिलाफ Prevention of Corruption Act (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988) की धारा-7 के तहत मामला दर्ज कर कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
बड़ा सवाल: क्यों नहीं थम रही सरकारी विभागों में रिश्वतखोरी?
छत्तीसगढ़ में लगातार हो रही ACB Action यह साफ संकेत देती है कि सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार की जड़ें बहुत गहरी हो चुकी हैं। कभी पटवारी, कभी पुलिस अफसर तो कभी डॉक्टर—आए दिन नए मामले सामने आ रहे हैं।
ऐसे में अब जनता और प्रशासनिक हलकों में यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि आखिर लगातार हो रही गिरफ्तारियों के बावजूद रिश्वतखोरों में कानून का डर क्यों नहीं दिख रहा है? क्या सख्त से सख्त सजा का अभाव इन अधिकारियों के हौसले बुलंद कर रहा है?







