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AIPEF पॉवर सेक्‍टर में हड़ताल: 10 मार्च को हड़ताल पर रहेंगे देशभर के बिजली इंजीनियर, यह है कारण

AIPEF पॉवर सेक्‍टर में हड़ताल: 10 मार्च को हड़ताल पर रहेंगे देशभर के बिजली इंजीनियर, यह है कारण

AIPEF रायपुर।  देश के पॉवर सेक्‍टर के इंजीनियर 10 मार्च को हड़ताल पर रहेंगे। इसका आह्वान All India Power Engineers Federation (AIPEF) ने किया है। इससे पहले 9 मार्च को नई दिल्‍ली में होने वाले प्रदर्शन में भी बिजली इंजीनियर शामिल होंगे।

इंजीनियरों की हड़ताल की वजह

बिजली इंजीनियर हड़ताल के जरिये केंद्र सरकार के Electricity (Amendment) Bill 2025 का विरोध करेगें। आरोप है कि इस बिल के जरिये सरकार पावर सेक्‍टर का निजीकरण करने की तैयारी में है।

इस वजह से किया जा रहा है विरोध

इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 के ड्राफ़्ट में शेयर्ड इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल करके एक ही एरिया में कई बिजली डिस्ट्रीब्यूटर को काम करने की इजाज़त देने का प्रोविज़न है।

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बिल में सब्सिडी वाले कंज्यूमर को बचाते हुए कॉस्ट-रिफ्लेक्टिव टैरिफ़ का भी प्रोविज़न है और पाँच साल के अंदर इंडस्ट्रियल कंज्यूमर के लिए क्रॉस-सब्सिडी खत्म कर दी गई है।

देशभर के 27 लाख कर्मचारी होगें शामिल

AIPEF के मुताबिक, देश भर के करीब 27 लाख बिजली कर्मचारी और इंजीनियर 10 मार्च को काम का बायकॉट करेंगे और सड़कों पर उतरेंगे। यह फैसला नेशनल कोऑर्डिनेशन कमिटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी एम्प्लॉइज एंड इंजीनियर्स (NCCOEEE) की एक ऑनलाइन मीटिंग में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता AIPEF के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे ने की।

संसद में पेश किए जाने का विरोध

AIPEF ने कहा कि NCCOEEE ने ऊर्जा मंत्रालय को भी लिखा है, जिसमें मांग की गई है कि “किसान विरोधी, उपभोक्‍ता विरोधी और कर्मचारी विरोधी इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 को पार्लियामेंट में पेश न किया जाए।”

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दुबे ने बयान में कहा कि ऊर्जा मंत्रालय ने पहले बिल पर स्टेकहोल्डर्स से राय मांगी थी, और देश भर के पावर सेक्टर से जुड़े सभी फेडरेशन, ट्रेड यूनियन और ऑर्गनाइजेशन ने इसका विरोध किया था।

सुझाव सार्वजनिक करने की मांग

अध्‍यक्ष दुबे ने कहा कि स्टेकहोल्डर्स के कमेंट्स न तो पब्लिक किए गए हैं और न ही कंसल्टेशन के मिनट्स जारी किए गए हैं। इस बीच ऊर्जा मंत्रालय ने 30 जनवरी को एक वर्किंग ग्रुप बनाया और उसमें ऑल इंडिया डिस्कॉम्स एसोसिएशन को शामिल

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किया, जो पावर सेक्टर के प्राइवेटाइजेशन का खुलकर सपोर्ट करने वाला संगठन है। उन्होंने यह भी कहा कि कानून को फाइनल करने के लिए ऐसे संगठन को शामिल करने से पूरा प्रोसेस एकतरफ़ा और गैर-संवैधानिक हो जाता है।

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