
Bhupesh Baghel रायपुर। छत्तीसगढ़ में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखा है। इसमें बघेल ने लिखा है कि
प्रिय श्री विष्णुदेव साय जी,
मैं, इस पत्र के माध्यम से प्रदेश के अन्नदाताओं से जुड़े एक अत्यंत संवेदनशील और सामयिक विषय धान खरीदी की ओर आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं। प्रदेश में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के लिए धान खरीदी की निर्धारित समय-सीमा समाप्त हो चुकी है। सरकार की तरफ से लक्ष्य प्राप्ति के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन प्रदेश के विभिन्न अंचलों से आ रही सूचनाएं एक चिंताजनक तस्वीर पेश कर रही है। खरीदी प्रक्रिया बंद होने के बाद किसान विशेषकर ऋणी किसान, अत्यंत अनिश्चितता और आर्थिक दबाव के दौर से गुजर रहे हैं। अत: पारदर्शिता के हित में, मैं शासन से निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर बिंदुवार जानकारी और स्पष्टीकरण की अपेक्षा करता हूं-
01 इस वर्ष के लिए कुल धान खरीदी का लक्ष्य कितना निर्धारित किया गया था? उक्त लक्ष्य के विरूद्ध कुल कितने टन धान की खरीदी हुई है और लक्ष्य का कितना प्रतिशत है?
02 इस सत्र में कुल कितने किसानों ने धान विक्रय के लिए पंजीयन कराया था? इनमें से कितने किसानों के टोकन काटे गए और कितने किसानों का संपूर्ण धान क्रय किया जा चुका है ?
03 कितने किसानों के टोकन तकनीकी कारणों या समय सीमा समाप्त होने के कारण निरस्त हुए ? क्या विभाग के पास उन किसानों की संख्या है जो पंजीयन के बावजूद भी धान नहीं बेच पाए ?
04 प्रदेश के लाखों किसान सहकारी बैंकों के ऋण के अधीन हैं। कुल पंजीकृत ऋणी किसानों में से कितने किसानों का धान शत-प्रतिशत खरीदा गया है ? वे किसान जिनका धान नहीं खरीदा जा सका वे अपने अल्पकालिक कृषि ऋण की अदायगी कैसे करेंगे।
05 अब तक खरीदी गई धान के विरूद्ध कितने किसानों को भुगतान प्राप्त हो चुका है और कितनी राशि अभी भी लंबित है ?
06 एग्रीस्टेक पोर्टल की तकनीकी खामियों के कारण जिन हजारों किसानों का रकबा शून्य या कम कर दिया गया या त्रुटिपूर्ण प्रदर्शित हुआ और वे धान नहीं बेच पाए, उनकी आर्थिक क्षति का आकलन और भरपाई कैसे की जाएगी।
07 किसानों से रकबा खसरा समर्पण कराने के लिए विभाग द्वारा किन परिस्थितियों या कारणों से तथा शासन के किस विशेष नीति के तहत क्या आदेश / निर्देश जारी किये गये थे ? कितने किसानों से विभागीय निर्देशानुसार अपना रकबा / खसरा समर्पित किया है ?
08 धान खरीदी की निर्धारित समय-सीमा समाप्त हो गया है। क्या शासन उन किसानों के हित में खरीदी की अवधित बढ़ाने का विचार रखता है जो टोकन होने के बावजूद धान नहीं बेच पाए हैं ?
09 धान नहीं खरीदने के बावजूद, क्या बैंकों का ऋण वसूली के लिए दबाव बनाने की छूट दी गई है? कितने किसानों का ऋण अदायगी के लिए शेष है? यदि किसान का धान नहीं बिका, तो ऋण की किस्त कहां से चुकाएगा ? इस पर शासन की नीति क्या है ?
मेरा आपसे अनुरोध है कि अन्नदाता के पसीने की कीमत और उसके स्वाभिमान की रक्षा करना सरकार का प्राथमिक कर्तव्य है। शासन की प्रशासनिक सीमाओं के कारण यदि प्रदेश का एक भी किसान अपनी उपज बेचने से वंचित रह गया है, तो यह गंभीर चिंता का विषय है। आशा है कि आप उक्त बिन्दुओं पर वस्तुस्थिति स्पष्ट करवाते हुए किसानों के व्यापक हित में सकारात्मक निर्णय लेंगे, ताकि कोई भी किसान आर्थिक क्षति या ऋण के बोझ से परेशान न हो ।




