
रायपुर (chaturpost.com)। छत्तीसगढ़ में आज शाम को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में एक बेहद महत्वपूर्ण मंत्रिपरिषद (Cabinet Meeting) की बैठक होने जा रही है। इस बैठक से ठीक पहले राज्य के लाखों पेंशनभोगियों की उम्मीदें सातवें आसमान पर पहुंच गई हैं। भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ (Chhattisgarh Pensioners Federation) ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि वे इस बैठक में पेंशनरों के हक को मारने वाली 25 साल पुरानी कानूनी बाधा को हमेशा के लिए खत्म करने की प्रक्रिया शुरू करें।
पेंशनर्स महासंघ के प्रांताध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को सोशल मीडिया के जरिए एक विशेष संदेश भेजा है। इस संदेश में उन्होंने आगामी मानसून सत्र (Monsoon Session) में ‘मध्यप्रदेश राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 2000’ की विवादित धारा 49 (Section 49) को विलोपित (हटाने) करने के लिए एक शासकीय संकल्प (Official Resolution) पारित करने की जोरदार वकालत की है।
क्या है धारा 49 और क्यों बनी है पेंशनर्स के लिए जी का जंजाल?
पिछले 25 वर्षों से मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के साढ़े पांच लाख से अधिक पेंशनर और परिवार पेंशनर आर्थिक नुकसान और भारी असमानता का सामना कर रहे हैं।
वीरेन्द्र नामदेव के अनुसार, धारा 49 के तहत छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के बीच पेंशनर्स की महंगाई राहत (Dearness Relief – DR) के भुगतान के लिए दोनों राज्यों की आपसी सहमति अनिवार्य की गई है। दुर्भाग्य से (Unfortunately), इसी सहमति की बाध्यता के कारण जब भी राज्य सरकार कर्मचारियों का महंगाई भत्ता बढ़ाती है, तब पेंशनर्स की फाइल दोनों राज्यों के वित्त विभागों के बीच महीनों तक धूल खाती रहती है। इस कानूनी पेंच की वजह से बुजुर्ग पेंशनरों को समय पर उनके हक का पैसा नहीं मिल पाता है।
10 हजार करोड़ की देनदारी से प्रशासनिक गलियारों में खलबली
वास्तव में (In fact), भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ की सतत सक्रियता और छानबीन के बाद एक बहुत बड़ा वित्तीय खुलासा हुआ है। इस खुलासे के बाद दोनों राज्यों के प्रशासनिक अमले (Administrative Machinery) में हड़कंप मच गया है।
धारा 49 को हटाने की क्या है पूरी संवैधानिक प्रक्रिया?
निश्चित रूप से (Certainly), धारा 49 को हटाना कोई एक दिन का काम नहीं है, बल्कि यह एक बेहद जटिल और लंबी संवैधानिक प्रक्रिया (Constitutional Process) है। वीरेन्द्र नामदेव ने स्पष्ट किया है कि इसके लिए निम्नलिखित चरणों से गुजरना होगा:
- कैबिनेट की मंजूरी: सबसे पहले छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश दोनों राज्यों के वित्त विभागों (Finance Departments) को संशोधन का मसौदा तैयार कर अपनी-अपनी कैबिनेट से स्वीकृत कराना होगा।
- विधानसभा में संकल्प: कैबिनेट की हरी झंडी मिलने के बाद आगामी मानसून सत्र में दोनों राज्यों की विधानसभाओं से शासकीय संकल्प पारित कर केंद्र सरकार को भेजना होगा।
- संसद में विधेयक: केंद्र सरकार इस प्रस्ताव के आधार पर संसद (Parliament) के दोनों सदनों—लोकसभा और राज्यसभा में संशोधन विधेयक प्रस्तुत कर इसे पारित कराएगी।
- राष्ट्रपति के हस्ताक्षर: संसद से पास होने के बाद जब इस पर महामहिम राष्ट्रपति (President of India) की स्वीकृति मिलेगी और इसे भारत के राजपत्र (Gazette of India) में प्रकाशित किया जाएगा, तब जाकर यह कानून बदलेगा।
यही कारण है कि (That’s why), पेंशनर्स महासंघ का कहना है कि दोनों राज्य सरकारों को बिना किसी देरी के 8 जुलाई की कैबिनेट बैठक में ही इस पर ठोस निर्णय ले लेना चाहिए।
2 प्रतिशत अतिरिक्त डीए और डीआर (DA-DR) पर भी टिकी नजरें
इसके अतिरिक्त (In addition), महासंघ ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का ध्यान केंद्रीय कर्मचारियों की तर्ज पर मिलने वाले लाभ की ओर भी आकर्षित किया है। केंद्र सरकार द्वारा जनवरी 2026 से स्वीकृत 2 प्रतिशत महंगाई भत्ता (Dearness Allowance – DA) और महंगाई राहत (DR) का लाभ छत्तीसगढ़ के लाखों कर्मचारियों, पेंशनरों और परिवार पेंशनरों को अभी तक नहीं मिल पाया है।
पेंशनर्स फेडरेशन ने पुरजोर मांग की है कि 8 जुलाई 2026 की मंत्रिपरिषद की बैठक में इस 2% डीए-डीआर (Pensioners DA DR news) को भी मंजूरी दी जाए, ताकि महंगाई के इस दौर में कर्मचारियों और बुजुर्ग पेंशनभोगियों के परिवारों को तत्काल आर्थिक राहत मिल सके।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से बड़ी उम्मीदें
अंततः (Ultimately), वीरेन्द्र नामदेव ने छत्तीसगढ़ के संवेदनशील मुख्यमंत्री विष्णु देव साय पर पूरा भरोसा जताते हुए कहा है कि साय सरकार हमेशा से ही कर्मचारी और पेंशनर हितैषी रही है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि मुख्यमंत्री इस ऐतिहासिक कैबिनेट बैठक में धारा 49 को विलोपित करने की प्रक्रिया शुरू करने का साहसिक निर्णय लेंगे और साथ ही 2 प्रतिशत डीए-डीआर की घोषणा कर प्रदेश के लाखों परिवारों को एक बड़ा तोहफा देंगे।







