
रायपुर । छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन (Chhattisgarh Karmachari Adhikari Federation) की दमदार पैरवी और निरंतर प्रयासों के बाद आखिरकार प्रदेश सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। राष्ट्रीय जनगणना 2027 (National Census 2027) के शुरुआती चरणों के महत्वपूर्ण कार्य में दिन-रात जुटे रहे हजारों अधिकारियों और कर्मचारियों को उनका लंबे समय से रुका हुआ मानदेय अब बहुत जल्द मिलने जा रहा है।
छत्तीसगढ़ शासन ने फेडरेशन की इस जायज मांग पर बेहद त्वरित संज्ञान (Quick Action) लेते हुए बजट और मानदेय भुगतान के लिए आवश्यक राशि का आबंटन (Fund Allocation) राज्य के सभी जिला कलेक्टरों को आधिकारिक रूप से जारी कर दिया है। सरकार के इस त्वरित फैसले से प्रदेश के लाखों शासकीय सेवकों में खुशी की लहर दौड़ गई है और लंबे समय से व्याप्त असंतोष की स्थिति अब पूरी तरह समाप्त होती नजर आ रही है।
क्या थी फेडरेशन की मुख्य मांग? (Core Demands & Backstory)
दरअसल, छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के प्रांतीय संयोजक कमल वर्मा के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने पिछले दिनों जनगणना संचालन निदेशक (Director of Census Operations), छत्तीसगढ़ को एक विस्तृत मांग पत्र और ज्ञापन प्रेषित किया था। इस ज्ञापन के माध्यम से फेडरेशन ने राष्ट्रीय महत्व के इस बड़े अभियान में अपनी सेवाएं देने वाले कर्मचारियों के लिए मुख्य रूप से दो बड़ी और न्यायोचित मांगें शासन के समक्ष मजबूती से उठाई थीं:
- पहली मांग: जनगणना कार्य की विषम और कठिन परिस्थितियों को देखते हुए संलग्न कर्मचारियों को एक विशेष अर्जित अवकाश (Special Earned Leave) प्रदान किया जाए।
- दूसरी मांग: शासन द्वारा बजट की व्यवस्था सुनिश्चित किए जाने के बावजूद मैदानी स्तर पर अटके हुए लंबित मानदेय राशि (Pending Honorarium Amount) का बिना किसी तकनीकी देरी के शीघ्र भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
45 डिग्री के जानलेवा तापमान में निभाया था राष्ट्रीय दायित्व (Extreme Working Conditions)
फेडरेशन ने अपने आधिकारिक ज्ञापन में बेहद भावुक और तार्किक रूप से इस बात का पुरजोर उल्लेख किया था कि जनगणना 2027 के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न विभागों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने 1 मई से 30 मई 2026 तक छत्तीसगढ़ में पड़ने वाली भीषण और जानलेवा गर्मी के बीच काम किया था। लगभग 45 डिग्री तापमान (45-Degree Temperature) जैसी अत्यंत विपरीत और विषम परिस्थितियों (Adverse Conditions) में भी इन कर्मचारियों ने फील्ड में उतरकर पूर्ण निष्ठा, समर्पण और जिम्मेदारी के साथ इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय दायित्व (National Duty) का सफल निर्वहन किया।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि भीषण लू और तपती धूप के बावजूद अनेक कर्मचारियों ने अपने नियमित अवकाशों (Official Holidays) का परित्याग किया और अपने महत्वपूर्ण पारिवारिक समय (Family Time) की आहुति देकर जनगणना कार्य को समय पर सफल बनाने में अपना उल्लेखनीय और ऐतिहासिक योगदान दिया। ऐसे में उनके इस अभूतपूर्व समर्पण और अतिरिक्त दायित्व को देखते हुए उन्हें विशेष अवकाश और समय पर भुगतान मिलना उनका मौलिक अधिकार बन जाता है।
कलेक्टरों को राशि का आवंटन, अब सीधे बैंक खातों में आएगा पैसा (Fund Disbursement Process)
फेडरेशन की ओर से उठाई गई इस जायज आवाज का असर यह हुआ कि शासन स्तर पर बैठे वरिष्ठ अधिकारियों और नीति निर्माताओं को तुरंत झुकना पड़ा। इस मांग पर पूरी संवेदनशीलता के साथ त्वरित कार्यवाही (Immediate Action) करते हुए शासन द्वारा Census Duty Honorarium के पूर्ण भुगतान हेतु आवश्यक वित्तीय बजट का आबंटन छत्तीसगढ़ के सभी जिला कलेक्टरों (District Collectors) को सीधे हस्तांतरित कर दिया गया है।
इस नए आदेश के बाद अब सभी जिलों के प्रशासनिक तंत्र ने स्थानीय स्तर पर आबंटन की फाइलों को तेजी से आगे बढ़ाना शुरू कर दिया है। इसके तहत आगामी कुछ ही दिनों के भीतर जनगणना कार्य में संलग्न सभी श्रेणी के अधिकारियों और कर्मचारियों के बैंक खातों में उनके हक की लंबित मानदेय राशि सीधे जमा (Direct Bank Transfer) कर दी जाएगी।
विशेष अर्जित अवकाश पर भी प्रक्रिया शुरू (Special Earned Leave Update)
मानदेय भुगतान के साथ-साथ कर्मचारियों की दूसरी सबसे बड़ी मांग, यानी विशेष अर्जित अवकाश (Special Earned Leave) को लेकर भी एक बेहद सकारात्मक और बड़ा अपडेट (Positive Update) सामने आया है। चतुरपोस्ट को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के अनुसार, जनगणना संचालन निदेशक द्वारा इस मांग को पूरी तरह से न्यायोचित मानते हुए शासन स्तर पर एक औपचारिक और विस्तृत नीतिगत प्रस्ताव (Policy Proposal) भेजे जाने की विभागीय प्रक्रिया (Official Procedure) को सफलतापूर्वक प्रारंभ कर दिया गया है।
इस पूरे प्रशासनिक सुधार और निर्णय के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:
- ■ त्वरित बजट ट्रांसफर: सभी कलेक्टरों को वित्तीय आबंटन जारी हो चुका है, जिससे भुगतान प्रक्रिया (Payment Process) बेहद पारदर्शी और तीव्र हो जाएगी।
- ■ लीव प्रस्ताव पर सहमति: विशेष अर्जित अवकाश की मांग को लेकर जनगणना संचालन निदेशक का सकारात्मक रुख है और फाइल शासन को भेजने की तैयारी चल रही है।
- ■ असंतोष का खात्मा: इस फैसले से प्रदेश के लाखों शासकीय सेवकों के बीच पिछले कई हफ्तों से चल रही भ्रम और असंतोष की स्थिति अब पूरी तरह दूर हो गई है।
विशेषज्ञों का विश्लेषण (Expert Analysis)
वरिष्ठ प्रशासनिक विश्लेषकों (Administrative Experts) का मानना है कि राष्ट्रीय महत्व के कार्यों जैसे कि जनगणना या निर्वाचन में जब कर्मचारियों को लगाया जाता है, तो उनके मनोबल (Staff Morale) को ऊंचा बनाए रखना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है। छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने समय पर इस मुद्दे को उठाकर एक बेहतरीन और जिम्मेदार ट्रेड यूनियन (Responsible Trade Union) की भूमिका निभाई है।
अमूमन देखा जाता है कि बजट होने के बावजूद नौकरशाही की कछुआ चाल के कारण वित्तीय आबंटन जिलों तक पहुंचने में महीनों लग जाते हैं, जिससे कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ती है। लेकिन इस मामले में मुख्यमंत्री कार्यालय और जनगणना संचालन निदेशक के बीच जो बेहतर समन्वय (Coordination) दिखा है, वह प्रशासनिक दक्षता (Administrative Efficiency) का एक बेहतरीन उदाहरण है। उम्मीद है कि विशेष अवकाश की फाइल को भी सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) से जल्द ही मंजूरी मिल जाएगी।







