
रायपुर। छत्तीसगढ़ में सुशासन और प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक नया और स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने प्रदेश के लाखों शासकीय कर्मचारियों के जीवन में वित्तीय सुरक्षा और मानसिक शांति का संचार करने के लिए ‘वेतन के विरुद्ध अल्पावधि ऋण योजना’ (Salary Advance Loan Scheme) की ऐतिहासिक शुरुआत की है।
कर्मचारी कल्याण (Employee Welfare) को केंद्र में रखकर तैयार की गई यह योजना वित्तीय सहायता, संवेदनशील प्रशासन, आधुनिक तकनीक और मानवीय दृष्टिकोण का एक अनुपम संगम बनकर उभरी है। इस योजना के माध्यम से राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि शासकीय सेवक प्रदेश के विकास की वास्तविक रीढ़ हैं।
विकास की रीढ़ हैं शासकीय कर्मचारी: मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का स्पष्ट मानना है कि जब राज्य का प्रशासनिक कार्यबल (Workforce) मानसिक और आर्थिक रूप से सशक्त होगा, तभी शासकीय योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक त्वरित और पारदर्शी तरीके से पहुंचेगा।
सामान्यतः स्वास्थ्यगत आपात स्थिति, बच्चों की शिक्षा, पारिवारिक जिम्मेदारियां या अन्य आकस्मिक जरूरतों के समय कर्मचारियों को निजी साहूकारों या अत्यधिक ब्याज दर (High Interest Rate) वाले वित्तीय संस्थानों का रुख करना पड़ता था। इससे न केवल उनके ऊपर आर्थिक दबाव बनता था, बल्कि मानसिक तनाव के कारण उनके कार्य प्रदर्शन पर भी असर पड़ता था। साय सरकार की इस पहल ने कर्मचारियों को साहूकारों के चंगुल और मानसिक दबाव से पूरी तरह मुक्त कर दिया है।
डिजिटल इंडिया और ई-कोष प्रणाली का बेहतरीन संगम
इस योजना की सबसे बड़ी ताकत इसका डिजिटल गवर्नेंस (Digital Governance) पर आधारित होना है। राज्य के वित्त विभाग ने इसे ई-कोष (e-Kosh) प्रणाली के माध्यम से पूरी तरह पारदर्शी और सुगम बनाया है।
कर्मचारियों को ऋण प्राप्त करने के लिए किसी भी शासकीय कार्यालय के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं है। घर बैठे या अपने मोबाइल से ही ई-केवाईसी (e-KYC Verification) आधारित सत्यापन के जरिए आवेदन किया जा सकता है। कागजी फाइलों के झंझट से मुक्ति मिलने के कारण यह प्रक्रिया अत्यधिक तेज, भ्रष्टाचार मुक्त और पारदर्शी बन चुकी है।






