
Pensioners demand रायपुर। छत्तीसगढ़ के लाखों पेंशनभोगियों के लिए एक बेहद राहतभरी और सकारात्मक खबर सामने आ रही है। भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ छत्तीसगढ़ द्वारा लगातार उठाई जा रही मांग—कि प्रदेश के सभी संभागों और जिलों में पृथक pension office स्थापित किए जाएं—पर अब शासन स्तर पर त्वरित कार्यवाही शुरू हो गई है। ट्रेजरी व्यवस्था की जटिलताओं से बुजुर्गों को मुक्ति दिलाने के लिए यह कदम मील का पत्थर साबित हो सकता है।
क्या है पूरा मामला? (The Delegation Meeting)
हाल ही में, महासंघ के प्रांताध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने मंत्रालय में मुख्य सचिव विकासशील से मुलाकात की थी। इस दौरान पेंशनर्स हितों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करते हुए एक ज्ञापन सौंपा गया था।

ज्ञापन में मुख्य रूप से यह रेखांकित किया गया था कि वर्तमान ट्रेजरी व्यवस्था के अंतर्गत पेंशनरों को अपनी छोटी-छोटी समस्याओं और कार्यों के लिए भारी प्रशासनिक एवं प्रक्रियागत कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इससे उनके मामलों के निराकरण में अनावश्यक विलंब होता है।
वित्त विभाग का कड़ा एक्शन (Finance Department Action)
मुख्य सचिव को सौंपे गए ज्ञापन पर तुरंत संज्ञान लिया गया है। परिणामस्वरूप, छत्तीसगढ़ शासन के वित्त विभाग ने 17 जुलाई 2026 को संचालक, पेंशन एवं भविष्य निधि, रायपुर को आधिकारिक पत्र जारी कर दिया है।
- त्वरित प्रतिवेदन: पत्र के माध्यम से प्रदेश के सभी संभागों और जिलों में अलग पेंशन कार्यालय स्थापित किए जाने के संबंध में तत्काल रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
- अवर सचिव का निर्देश: वित्त विभाग की अवर सचिव श्रीमती शांता खरे द्वारा जारी इस आदेश में विषय की गंभीरता को देखते हुए शीघ्र प्रतिवेदन उपलब्ध कराने को कहा गया है।
विशेष टिप्पणी: महासंघ ने इस कदम को पेंशनरों की समस्याओं के समाधान की दिशा में एक ऐतिहासिक और सकारात्मक पहल करार दिया है, साथ ही मुख्य सचिव एवं वित्त विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया है।
अलग पेंशन कार्यालय से क्या होंगे लाभ? (Key Benefits)
महासंघ का मानना है कि यदि प्रत्येक संभाग और जिले में स्वतंत्र पेंशन कार्यालय अस्तित्व में आते हैं, तो बुजुर्ग नागरिकों को निम्नलिखित मोर्चों पर बड़ी राहत मिलेगी:
- Quick Processing: पेंशन स्वीकृति और उसमें संशोधन के मामलों का तेजी से निपटारा।
- Family Pension: पारिवारिक पेंशन और जीवन प्रमाण-पत्र से जुड़ी बाधाओं का अंत।
- No Harassment: वरिष्ठ नागरिकों को कार्यालयों के अनगिनत चक्कर काटने से मुक्ति।
- Transparency: प्रशासनिक कार्यप्रणाली में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही।
पदाधिकारियों ने जताया आभार (Gratitude from Members)
इस त्वरित प्रशासनिक कार्यवाही पर महासंघ से जुड़े जे.पी. मिश्रा, एन.आर. साहू, बी.के. वर्मा, अनिल गोल्हानी, प्रवीण कुमार त्रिवेदी, टी.पी. सिंह, पी.आर. साहू, बी.एल. गजपाल, द्रौपदी यादव, आर.एन. ताटी, जे.पी. शुक्ला, लोचन पांडेय, प्रदीप सोनी, माणिकचंद, डॉ. शेषा सक्सेना, ओ.पी. भट्ट, सुरेश चंद्र श्रीवास्तव, एस.एस. भदौरिया, एस.के. धातोडे, एस.एन. देहारी, रूपकुमार झाड़ी, कासिमुद्दीन, आर.डी. झाड़ी, अरुण तिवारी, परमेश्वर स्वर्णकार, राकेश जैन, राजेंद्र कश्यप, कुंती राणा, उर्मिला शुक्ला, शैलेन्द्र सिन्हा, आर.जी. बोहरे, ओ.डी. शर्मा, सुहास लाम्बट, अभय शंकर गौराहा, बी.एस. दशमेर, गुरुचरण सिंह, अनिल पाठक, आर.ए. शर्मा, ठाकुर सुरेन्द्र सिंह, लता चावड़ा, आर.के. दीक्षित, एम.एन. पाठक, टी.एल. चंद्राकर, मालिक राम वर्मा, एम.आर. चंद्राकर, रमेश नंदे और प्रेमचंद गुप्ता सहित तमाम सदस्यों ने प्रसन्नता व्यक्त की है। सभी ने आशा जताई है कि शासन जल्द ही इस दिशा में ठोस निर्णय लेगा।






