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छत्तीसगढ़ में ‘नोट’ का अनोखा खेल: छोटे नोटों की किल्लत के पीछे निकला ‘कमीशन’ का काला धंधा, MP कनेक्शन का खुलासा

छत्तीसगढ़ नोट तस्करी बिलासपुर पुलिस

बिलासपुर: छत्तीसगढ़ के बाजारों में अगर आपको 10, 20 या 50 रुपये के नए नोट मिलने में दिक्कत हो रही है, तो इसकी वजह जान लीजिए। आपके हक के ये छोटे नोट राज्य की सीमा पार कर मध्य प्रदेश के बाजारों में ‘कमीशन’ पर बेचे जा रहे हैं। बिलासपुर पुलिस ने इस बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़ करते हुए एक कारोबारी को लाखों की नकदी के साथ रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।

सूटकेस और पिट्ठू बैग में मिला खजाना

बिलासपुर की बेलगहना पुलिस और एसीसीयू (ACCU) टीम को बुधवार रात टेगनमाड़ा रेलवे स्टेशन के पास एक संदिग्ध युवक की सूचना मिली थी। जब टीम ने दबिश दी, तो युवक दो सूटकेस और एक पिट्ठू बैग के साथ मिला। तलाशी लेने पर पुलिस की आंखें फटी रह गई—बैग के भीतर 10, 20 और 50 रुपये के कड़कड़ाते नए नोटों की कुल 81 गड्डियां भरी हुई थीं। कुल रकम 17.90 लाख रुपये आंकी गई है।

तांबा-पीतल के कारोबार की आड़ में नोटों की तस्करी

पुलिस की गिरफ्त में आए आरोपी की पहचान कश्यप कॉलोनी, बिलासपुर निवासी पवन बजाज (35) के रूप में हुई है। आरोपी पेशे से तांबा-पीतल के स्क्रैप का काम करता है। इसी कारोबार के बहाने उसका बैंकों में आना-जाना लगा रहता था, जहां उसने बैंक अफसरों और कर्मचारियों से साठगांठ कर ली। पूछताछ में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि वह हर बंडल पर 200 से 1000 रुपये तक का मोटा कमीशन कमाता था।

“बैंकों की मिलीभगत और आम जनता की परेशानी”

हैरानी की बात यह है कि एक तरफ छत्तीसगढ़ का आम नागरिक बैंक की लाइनों में लगकर छोटे नोटों के लिए जद्दोजहद कर रहा है, वहीं दूसरी ओर पवन बजाज जैसे कारोबारी बैंकों से सीधे सांठगांठ कर लाखों की नई करेंसी बैगों में भरकर घूम रहे हैं। पुलिस अब उन बैंक कर्मियों की लिस्ट तैयार कर रही है जो ‘कमीशन’ के इस खेल में बराबर के हिस्सेदार हैं। बिलासपुर पुलिस की इस कार्रवाई ने उस बड़े नेटवर्क की कमर तोड़ दी है, जो छत्तीसगढ़ की संपत्ति को दूसरे राज्यों में अवैध तरीके से खपा रहा था।

मध्य प्रदेश के व्यापारियों को सप्लाई

पवन ने स्वीकार किया कि वह रायपुर और बिलासपुर के बैंकों से ये छोटे नोट इकट्ठा करता था और उन्हें खपाने के लिए मध्य प्रदेश के कटनी और शहडोल ले जाता था। एमपी के व्यापारियों के बीच इन छोटे नोटों की भारी मांग है, जिसका फायदा यह गिरोह उठा रहा था। पुलिस अब उन बैंक अधिकारियों की भी कुंडली खंगाल रही है, जो इस अवैध धंधे में पवन की मदद कर रहे थे।

पुलिस की मुस्तैदी से खुला राज

बिलासपुर एसपी रजनेश सिंह के निर्देश पर एडिशनल एसपी मधुलिका सिंह और निमितेश सिंह की निगरानी में यह कार्रवाई की गई। फिलहाल पुलिस ने धारा 102 के तहत रकम जब्त कर ली है और आगे की जांच जारी है। इस खुलासे के बाद अब प्रदेश के कई अन्य जिलों में भी नोटों की इस तरह की तस्करी की आशंका गहरा गई है।

आम जनता पर असर (The Local Impact)

“बिलासपुर और रायपुर के छोटे व्यापारियों, ऑटो चालकों और सब्जी विक्रेताओं के लिए यह खबर किसी झटके से कम नहीं है। पिछले कुछ महीनों से बाजार में 10 और 20 रुपये के नए नोटों की भारी किल्लत देखी जा रही थी। अब इस खुलासे से साफ हो गया है कि जनता की जेब तक पहुंचने से पहले ही ये नोट ‘कमीशन के गलियारों’ से होते हुए दूसरे राज्यों में अपनी चमक बिखेर रहे हैं।”

बैंक सिस्टम पर सवाल (Questioning the Banks)

“पुलिस की जांच अब उन ‘सफेदपोश’ बैंक अधिकारियों की ओर मुड़ गई है, जिनकी मिलीभगत के बिना इतनी बड़ी मात्रा में नई करेंसी बाहर निकलना नामुमकिन है। सवाल यह है कि क्या बैंक के भीतर कोई बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा है जो आम आदमी को ‘चिल्लर नहीं है’ का बहाना बनाकर टरका देता है, लेकिन रसूखदारों के सूटकेस भर देता है?”

एमपी में मांग की वजह (The Logic Behind MP Demand)

“सूत्रों की मानें तो मध्य प्रदेश के कटनी और शहडोल जैसे व्यापारिक केंद्रों में फुटकर व्यापार और मंडियों में छोटे नोटों की भारी मांग रहती है। वहां के व्यापारी इन नोटों के बंडलों पर प्रीमियम देने को तैयार रहते हैं, जिसका फायदा पवन बजाज जैसे बिचौलिए उठा रहे थे।”

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