कर्मचारी हलचल

छत्तीसगढ़ में सरकारी कर्मचारियों के ‘अवैध’ संलग्नीकरण पर भारी बवाल, फेडरेशन ने खोला मोर्चा; मांगी पूरी कुंडली!

रायपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी विभागों में पिछले लंबे समय से चल रहा ‘संलग्नीकरण’ (Attachment) का खेल अब तूल पकड़ता जा रहा है। छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन (Chhattisgarh Karmachari-Adhikari Federation) ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए प्रदेश भर के जिलों से जानकारी तलब की है। फेडरेशन के प्रांतीय संयोजक कमल वर्मा ने सभी जिला संयोजकों को पत्र जारी कर ऐसे कर्मचारियों की सूची (List) मांगी है, जो मूल विभाग को छोड़कर दूसरे कार्यालयों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

अधिकारियों का ‘दबाव’ और वायरल ऑडियो का सच

दरअसल, यह पूरा मामला तब गरमाया जब जांजगीर-चांपा (Janjgir-Champa) जिले का एक ऑडियो सोशल मीडिया (Social Media) पर तेजी से वायरल (Viral) हुआ। इस वायरल क्लिप में एक उच्च पदस्थ अधिकारी और वाहन चालक के बीच हुई तीखी चर्चा ने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।

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शिकायतें मिल रही हैं कि कई रसूखदार अधिकारी अपने प्रभाव का इस्तेमाल (Using Influence) कर दूसरे विभागों के वाहन चालकों (Drivers) और भृत्यों (Peons) को अपने पास अटैच करवा लेते हैं। यह न केवल प्रशासनिक नियमों का उल्लंघन है, बल्कि इससे कर्मचारियों के बीच आपसी समन्वय (Coordination) भी बिगड़ रहा है।

Daily Wage Employees Data: फेडरेशन ने मांगी विस्तृत सूची

छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने इस समस्या के स्थायी समाधान (Permanent Solution) के लिए कमर कस ली है। फेडरेशन ने स्पष्ट किया है कि प्रदेशभर में इस तरह के मामलों में निरंतर वृद्धि (Continuous Increase) देखी जा रही है। कई उच्चाधिकारियों के पास क्षमता से अधिक स्टाफ कार्यरत है, जबकि फील्ड के विभागों में कर्मचारियों की कमी है।

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कमल वर्मा (Kamal Verma), जो छत्तीसगढ़ राजपत्रित अधिकारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं, उन्होंने सभी जिला संयोजकों को निर्देशित किया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों से दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों (Daily Wage Workers), वाहन चालकों और भृत्यों की जानकारी जुटाएं।

राज्य स्तरीय बैठक में उठेगा मुद्दा

यह डेटा (Data) एकत्र करने का मुख्य उद्देश्य आगामी राज्य स्तरीय परामर्शदात्री बैठक (State Level Consultative Meeting) में इस विषय को प्रमुखता से उठाना है। फेडरेशन चाहता है कि सरकार इस ‘अटैचमेंट कल्चर’ पर लगाम लगाए ताकि पारदर्शिता (Transparency) बनी रहे और मूल विभागों का काम प्रभावित न हो।

कर्मचारियों की मुश्किलें और वेतन का संकट

संलग्नीकरण का सबसे बुरा प्रभाव कर्मचारियों के वेतन आहरण (Salary Process) पर पड़ता है। जब एक कर्मचारी दूसरे विभाग में कार्यरत होता है, तो उसकी उपस्थिति (Attendance) और सर्विस रिकॉर्ड के मिलान में देरी होती है, जिससे समय पर वेतन मिलने में बाधा आती है। इसके अलावा, प्रशासनिक कार्यों (Administrative Tasks) में भी अनुशासन की कमी देखी जा रही है।

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चतुर विचार (Conclusion)

छत्तीसगढ़ में कर्मचारियों का एक विभाग से दूसरे विभाग में संलग्नीकरण अब एक गंभीर प्रशासनिक मुद्दा (Administrative Issue) बन चुका है। फेडरेशन द्वारा मांगी गई यह जानकारी सरकार के लिए भी एक आईना साबित हो सकती है। अब देखना यह होगा कि इस रिपोर्ट के बाद प्रशासन क्या सुधारात्मक कदम (Corrective Measures) उठाता है।

Daily Wage Employees Data
छत्‍तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन का लेटर

S. J. Kumar

पत्रकारिता के क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव । सुदीर्घ करियर में राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। जटिल मुद्दों के सरल विश्लेषण और खोजी रिपोर्टिंग के साथ राजनीति, प्रशासन और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है। पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में Chaturpost.com में सेवाएं दे रहे हैं।
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