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छत्तीसगढ़ में बिना लाइट आए मिल रहा ‘Problem Solved’ का मैसेज, तो क्‍यों नहीं होगा बवाल

रायपुर । छत्तीसगढ़ में गर्मी का पारा चढ़ते ही बिजली विभाग की पोल खुलने लगी है। राजधानी रायपुर समेत प्रदेश के कई हिस्सों में Electricity Crisis (बिजली संकट) गहरा गया है। हैरानी की बात यह है कि उपभोक्ताओं की शिकायत पर बिना बिजली चालू हुए ही उनके मोबाइल पर ‘समस्या का समाधान’ होने का मैसेज भेज दिया जा रहा है। इस लापरवाही ने विभाग के मेंटेनेंस के दावों की हवा निकाल दी है।

बिरगांव में रात भर अंधेरा, विभाग का अजीब खेल

राजधानी के बिरगांव नगर निगम क्षेत्र में मंगलवार को पूरे दिन Power Interruption (बिजली की बाधा) बनी रही। लोगों ने मेंटेनेंस डे समझकर सब्र किया, लेकिन शाम होने के बाद भी जब लाइट नहीं आई, तो शिकायतों का दौर शुरू हुआ। भनपुर जोन ऑफिस से आश्वासन तो मिला, लेकिन काम नहीं।

उपभोक्ताओं ने बताया कि रात 12:20 बजे उन्हें मैसेज मिला कि बिजली चालू कर दी गई है, जबकि हकीकत में पूरा इलाका अंधेरे में डूबा था। दोबारा शिकायत करने पर सुबह 5:50 बजे फिर ‘सॉल्यूशन’ का मैसेज आया, लेकिन लाइट तब भी नदारद थी।

आंकड़ों में समझें क्यों चरमरा रही है व्यवस्था

बिजली कंपनी में मैदानी अमले की भारी कमी है, जिसका सीधा असर Customer Service (उपभोक्ता सेवा) पर पड़ रहा है। विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार:

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गुढ़ियारी में प्रदर्शन: “एसी कमरे से बाहर आएं अफसर”

बिजली कटौती के खिलाफ कांग्रेस ने गुढ़ियारी स्थित बिजली कार्यालय का Gherao (घेराव) किया। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे सुबोध हरितवाल ने अधिकारियों को दफ्तर से बाहर धूप में बुलाया ताकि वे जनता की तपिश महसूस कर सकें।

“जब तक अधिकारी गर्मी से परेशान जनता के बीच नहीं आएंगे, उन्हें एसी कमरों में बैठकर आम आदमी की तकलीफ समझ नहीं आएगी।” – सुबोध हरितवाल, कांग्रेस नेता

मुख्य कारण: अनुभवी स्टाफ की कमी और ठेका प्रथा

बिजली विभाग के भीतर से ही यह आवाज उठ रही है कि Placement Agencies (प्लेसमेंट एजेंसियों) के भरोसे पूरी व्यवस्था छोड़ दी गई है। अनुभवी स्टाफ न होने के कारण तकनीकी सुधार (Technical Repair) में देरी हो रही है। अधीक्षण अभियंता महेश ठाकुर और कार्यपालन अभियंता रामकुमार साहू ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही कटौती थमेगी और लापरवाह ठेकेदारों पर कार्रवाई होगी।

छत्तीसगढ़ में बिजली व्यवस्था का यह हाल तब है जब गर्मी अभी अपने शुरुआती दौर में है। यदि विभाग ने Field Staff (मैदानी स्टाफ) और सेवा की गुणवत्ता में सुधार नहीं किया, तो आने वाले दिनों में यह “बवाल” और बढ़ सकता है।

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