रायपुर। छत्तीसगढ़ में अवैध धर्मांतरण को रोकने के लिए राज्य सरकार ने अपना इरादा साफ कर दिया है। ‘छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026’ (Chhattisgarh Freedom of Religion Act 2026) को राज्यपाल की औपचारिक मंजूरी (Gubernatorial Approval) मिलने के साथ ही शासन ने इसका राजपत्र (Gazette) में प्रकाशन कर दिया है । 19 मार्च को विधानसभा में पारित होने के बाद अब यह कानून पूरे प्रदेश में प्रभावी हो गया है ।
इस नए कानून के तहत अब किसी भी प्रकार का प्रलोभन (Allurement), बल प्रयोग (Force) या कपटपूर्ण तरीके से किया गया धर्मांतरण पूरी तरह से अवैध (Illegal) माना जाएगा ।
धर्मांतरण के लिए अब DM की अनुमति अनिवार्य
नए नियमों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति अपनी स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन (Conversion) करना चाहता है, तो उसे कम से कम 60 दिन पहले जिला मजिस्ट्रेट (District Magistrate) के समक्ष घोषणा पत्र जमा करना होगा । प्रक्रिया (Process) को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने कड़े प्रावधान किए हैं:
- ✔️ घोषणा पत्र (Declaration): धर्मांतरण के इच्छुक व्यक्ति और धार्मिक अनुष्ठान कराने वाले व्यक्ति दोनों को निर्धारित प्रारूप में सूचना देनी होगी ।
- ✔️ आपत्ति दर्ज करना (Objection): सूचना प्रकाशित होने के 30 दिनों के भीतर कोई भी व्यक्ति इस पर लिखित आपत्ति दर्ज करा सकता है ।
- ✔️ सक्षम प्राधिकारी का निर्णय (Decision): जिला मजिस्ट्रेट या अधिकृत अधिकारी जांच के बाद 30 दिनों के भीतर अपना अंतिम आदेश (Final Order) जारी करेंगे ।
सजा के कड़े प्रावधान (Penal Provisions)
कानून का उल्लंघन करने वालों के लिए जेल और भारी जुर्माने (Penalty) की व्यवस्था की गई है। यदि कोई व्यक्ति अवैध धर्मांतरण का दोषी पाया जाता है, तो उसे 10 साल तक की कैद हो सकती है:
- नाबालिग और महिलाओं का मामला: यदि पीड़ित नाबालिग या महिला है, तो सजा और भी कठोर होगी ।
- सामूहिक धर्मांतरण (Mass Conversion): एक साथ दो या अधिक व्यक्तियों के धर्मांतरण को ‘सामूहिक धर्मांतरण’ की श्रेणी में रखा गया है, जिसमें कड़ी सजा का प्रावधान है ।
- गैर-जमानती अपराध (Non-bailable Offence): इस अधिनियम के तहत होने वाले अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती होंगे ।
घर वापसी पर छूट (Exemption for Reconversion)
विधेयक के स्पष्टीकरण (Explanation) में यह साफ किया गया है कि यदि कोई व्यक्ति अपने ‘पैतृक धर्म’ (Ancestral Religion) में वापस लौटता है, तो उसे इस कानून के तहत धर्मांतरण नहीं माना जाएगा और उस पर यह नियम लागू नहीं होंगे ।
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