
Chhattisgarh Government Loan नवा रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के आधोसंरचना विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं (Development Schemes) को नई गति देने के लिए बाजार से 1000 करोड़ रुपये का कर्ज (Loan) जुटाने की प्रक्रिया पूरी कर ली है। वित्त विभाग की तरफ से जारी हालिया अधिसूचना (Specific Notification) के अनुसार, यह राशि दो अलग-अलग अवधियों के लिए ‘स्टेट गवर्नमेंट सिक्योरिटीज’ (SGS) के पुन: निर्गमन (Re-issuance) के जरिए प्राप्त की जाएगी।
क्यों लिया जा रहा है यह बड़ा कर्ज? (Why the Loan?)
सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस ऋण की आवश्यकता प्रदेश में चल रही विकास योजनाओं (Financing Development Schemes) के वित्तीय पोषण के लिए है। संविधान के अनुच्छेद 293(3) के तहत केंद्र सरकार से विधिवत अनुमति (Consent) लेने के बाद ही यह कदम उठाया गया है। इसका सीधा अर्थ है कि आने वाले समय में राज्य में बड़ी परियोजनाओं को बजट की कमी नहीं होगी।
लोन की गणित: दो हिस्सों में बंटा फंड (Detailed Breakdown)
वित्त सचिव मुकेश कुमार बंसल के हस्ताक्षरित आदेश के मुताबिक, इस ऋण को दो श्रेणियों में विभाजित किया गया है:
नीलामी और भुगतान की प्रक्रिया (Auction Process)
यह पूरी प्रक्रिया भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के मुंबई कार्यालय द्वारा ई-कुबेर (E-Kuber) सिस्टम के माध्यम से 12 मई 2026 को संपन्न की गई। सफल बोलीदाताओं (Successful Bidders) को 13 मई 2026 तक भुगतान करना अनिवार्य किया गया है।
आम निवेशकों के लिए क्या है खास? (Investment Opportunity)
दिलचस्प बात यह है कि इस सरकारी स्टॉक (Government Stock) का 10% हिस्सा गैर-प्रतिस्पर्धी बोलीदाताओं (Non-competitive Bidders) जैसे व्यक्तिगत निवेशकों और संस्थाओं के लिए सुरक्षित रखा गया है। कोई भी पात्र व्यक्ति कुल राशि का अधिकतम 1% तक के लिए बोली लगा सकता था। इसके अलावा, बैंकों के लिए इसमें निवेश करना फायदेमंद है क्योंकि इसे SLR (Statutory Liquidity Ratio) के उद्देश्य के लिए पात्र निवेश माना गया है।
छत्तीसगढ़ में सरकारी कर्ज बड़ मुद्दा
हालांकि, सरकारी कर्ज का मुद्दा छत्तीसगढ़ की राजनीति में हमेशा से ही सुर्खियों में रहा है। एक तरफ जहां सरकार इसे इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट (Infrastructure Development) के लिए जरूरी बता रही है, वहीं दूसरी ओर कर्ज के पुराने आंकड़े फिर से चर्चा में आ गए हैं।
पिछली सरकार और कर्ज का इतिहास (Political Context)
बता दें कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में राज्य सरकार का कर्ज एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना था। भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली तत्कालीन सरकार ने अपने पांच साल के कार्यकाल में करीब 50 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज लिया था। अब वर्तमान भाजपा सरकार द्वारा लिए जा रहे ऋणों को लेकर भी राजनीतिक विश्लेषक इसकी तुलना पिछले आंकड़ों से कर रहे हैं।
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