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MP से आए ₹2000 करोड़: छत्तीसगढ़ के पेंशनरों की ‘डिजिटल जंग’, 88 माह के बकाया एरियर के लिए शुरू हुआ महा-अभियान!

Chhattisgarh Pensioners DR Arrear रायपुर (Chaturpost.com): छत्तीसगढ़ के लाखों पेंशनरों के लिए एक बहुत बड़ी और उत्साहजनक खबर (Encouraging News) सामने आ रही है। लंबे समय से अपने हक की लड़ाई लड़ रहे बुजुर्गों के लिए अब न्याय की उम्मीद जग गई है। मध्यप्रदेश सरकार से छत्तीसगढ़ को पेंशन देनदारियों के रूप में 2000 करोड़ रुपये की पहली किस्त प्राप्त हो गई है।

इस भारी-भरकम राशि के मिलते ही प्रदेश के पेंशनरों ने अपनी पुरानी मांग यानी 88 माह के महंगाई राहत (Dearness Relief – DR) एरियर के भुगतान के लिए निर्णायक दबाव (Decisive Pressure) बनाना शुरू कर दिया है। भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ के आह्वान पर पूरे प्रदेश में एक विशाल ईमेल अभियान (Email Campaign) छेड़ा गया है।

क्या है 2000 करोड़ का पूरा गणित? (The Financial Breakdown)

दरअसल, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के बीच पेंशन के बंटवारे का मामला मध्यप्रदेश राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 2000 की धारा 49 के तहत वर्षों से उलझा हुआ था। नियम के मुताबिक, पेंशन के कुल बोझ का 74% हिस्सा मध्यप्रदेश और 26% हिस्सा छत्तीसगढ़ को उठाना है।

महासंघ के प्रांताध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव के अनुसार, मध्यप्रदेश शासन वर्षों से अपना हिस्सा नहीं दे रहा था, जिससे छत्तीसगढ़ को भारी आर्थिक नुकसान (Financial Loss) हो रहा था। वित्त विभाग के सचिव मुकेश बंसल की सक्रियता से जब इसका परीक्षण हुआ, तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि मध्यप्रदेश पर छत्तीसगढ़ के पेंशनरों की करोड़ों की राशि बकाया है। दबाव बढ़ने पर मध्यप्रदेश ने किस्तों में भुगतान की सहमति दी और अब 2000 करोड़ रुपये छत्तीसगढ़ के खाते में आ चुके हैं।

ईमेल से सरकार की घेराबंदी (Digital Protest Strategy)

अब जबकि पैसा खजाने में आ चुका है, पेंशनरों ने इसे अपना वैध अधिकार (Legal Right) बताते हुए ‘डिजिटल वॉर’ शुरू कर दी है। महासंघ के प्रदेश महामंत्री प्रवीण कुमार त्रिवेदी इस पूरे अभियान की मॉनिटरिंग कर रहे हैं।

प्रदेश भर के पेंशनर सीधे संचालक बजट और संचालक पेंशन को ईमेल भेजकर पूछ रहे हैं कि जब फंड मिल चुका है, तो भुगतान में देरी क्यों? यह पारदर्शिता (Transparency) की मांग अब एक जन-आंदोलन का रूप ले रही है।

वरिष्ठ नागरिकों की एकजुटता (Unity of Senior Citizens)

इस अभियान को धार देने के लिए छत्तीसगढ़ के सभी बड़े जिलों से पदाधिकारी जुट गए हैं। रायपुर से जे पी मिश्रा, बिलासपुर से राकेश जैन, और दुर्ग से बी के वर्मा जैसे दिग्गज नेताओं ने मोर्चा संभाल लिया है।

सिर्फ पुरुष ही नहीं, बल्कि महिला पेंशनर (Women Pensioners) भी इस लड़ाई में पीछे नहीं हैं। डॉ. शेषा सक्सेना, लता चावड़ा और अन्य महिला प्रतिनिधियों ने अपील की है कि यह लड़ाई सिर्फ पैसों की नहीं, बल्कि सम्मान और बुढ़ापे की आर्थिक सुरक्षा (Financial Security) की है।

अब सरकार की बारी (Conclusion)

छत्तीसगढ़ सरकार के पास अब वह ठोस संसाधन (Resources) उपलब्ध हैं, जिनके अभाव में एरियर रुका हुआ था। पेंशनरों का तर्क सीधा है— “हमारा हक, हमारा पैसा।” अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री और वित्त विभाग इस 2000 करोड़ रुपये का उपयोग किस प्रकार करते हैं। Chaturpost.com आपको इस खबर की हर बारीक अपडेट देता रहेगा।

संपादकीय नोट: यह खबर पेंशनर्स महासंघ द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति और मौजूदा घटनाक्रमों पर आधारित है। एरियर भुगतान की तिथि का अंतिम निर्णय छत्तीसगढ़ शासन के वित्त विभाग द्वारा लिया जाएगा।

S. J. Kumar

पत्रकारिता के क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव । सुदीर्घ करियर में राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। जटिल मुद्दों के सरल विश्लेषण और खोजी रिपोर्टिंग के साथ राजनीति, प्रशासन और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है। पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में Chaturpost.com में सेवाएं दे रहे हैं।
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