
छत्तीसगढ़ में जल प्रदूषण और पर्यावरण संरक्षण की स्थिति पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के समक्ष पेश रिपोर्ट ने राज्य प्रशासन की पोल खोल दी है।
रायपुर। नदियों की स्वच्छता और स्वच्छता अभियानों के लंबे-चौड़े दावों के बीच छत्तीसगढ़ के शहरी इलाकों में Chhattisgarh River Pollution का एक भयानक चेहरा सामने आया है। राज्य के शहरी निकायों से रोजाना निकलने वाले करोड़ों लीटर जहरीले और गंदे सीवेज पानी को सीधे जीवनदायिनी नदियों में बहाया जा रहा है।
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग (UADD) की ओर से NGT को सौंपी गई ताज़ा प्रगति रिपोर्ट (June 2026 Progress Report) के मुताबिक, राज्य के 194 नगरीय निकायों (Urban Local Bodies) से हर दिन भारी मात्रा में सीवेज जनरेट हो रहा है। इसके बावजूद, पर्याप्त वाटर ट्रीटमेंट प्लांट न होने से गंदा पानी नदियों में समा रहा है।
आखिर क्यों पैदा हुआ इतना बड़ा सीवेज गैप?
रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में वर्तमान में कुल 25 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (Sewage Treatment Plant – STP) संचालित हैं। हालांकि, इनकी स्थापित क्षमता 458.3 MLD है, लेकिन वास्तविक रूप से केवल 311.94 MLD सीवेज का ही शोधन (Sewage Treatment) हो पा रहा है।
परिणाम स्वरूप, रोजाना 431.57 MLD गंदा पानी बिना किसी प्राइमरी या सेकेंडरी ट्रीटमेंट के सीधे नदी-नालों में उड़ेला जा रहा है। हालांकि, AMRUT 2.0 मिशन के तहत 9 नए STP प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू किया गया है और 3 प्लांट निर्माणाधीन हैं, फिर भी वर्तमान स्थिति पर्यावरण और जनस्वास्थ्य दोनों के लिए बेहद चिंताजनक बनी हुई है।
6 प्रमुख नदियां ‘रेड ज़ोन’ में, जीवनदायिनी पर बढ़ा खतरा
राज्य की आधा दर्जनों प्रमुख नदियां प्रदूषित स्ट्रेच (Polluted River Stretches) के रूप में चिह्नित की गई हैं। इन नदियों के कैचमेंट क्षेत्र में आने वाले शहरों से सीवेज और ठोस कचरा लगातार बहकर आ रहा है।
- खारून नदी (Kharun River): रायपुर और धमतरी के सीवेज डिस्चार्ज से प्रभावित।
- अरपा नदी (Arpa River): बिलासपुर शहर का सीवेज अरपा के चेकडैम और बहाव में शामिल हो रहा है।
- हसदेव नदी (Hasdeo River): कोरबा और चांपा क्षेत्र से औद्योगिक व घरेलू कचरे का दबाव। (इसे Model River के रूप में विकसित किया जा रहा है)।
- केलो नदी (Kelo River): रायगढ़ नगर निगम क्षेत्र से प्रदूषित जल का प्रवाह।
- महानदी (Mahanadi River): नवापारा, राजिम और कांकेर क्षेत्रों का सीवेज प्रभाव।
- शिवनाथ नदी (Seonath River): दुर्ग, भिलाई, राजनंदगांव और सिमगा क्षेत्र का भारी औद्योगिक व शहरी डिस्चार्ज।
बड़े उद्योगों का अड़ंगा: साफ किए गए पानी (Treated Water) के इस्तेमाल से इनकार
सरकार की योजना थी कि STPs से ट्रीट किए गए पानी को थर्मल पावर प्लांट्स और भारी उद्योगों (Industrial Water Reuse) को बेचा जाए ताकि ताजे पानी की खपत बचे। हालांकि, राज्य के बड़े उद्योगों ने इस योजना पर पानी फेर दिया है।
- अडाणी पावर (Adani Power Ltd): निमोरा STP (रायपुर) से 68 MLD पानी लेने के समझौते के बावजूद, कंपनी ने भारी पूंजीगत और परिचालन लागत (High Capital & Operational Cost) का हवाला देते हुए इसे अनवीकरणीय बताया है और जल शक्ति मंत्रालय से छूट मांगी है।
- एनटीपीसी सीपत (NTPC Sipat): बिलासपुर के डोमुहानी और चिलहाटी STP से पानी लेने पर एनटीपीसी ने अनिच्छा जताई है। उनका तर्क है कि वित्तीय और तकनीकी रूप से यह परियोजना व्यावहारिक (Project Viability Issues) नहीं है।
- सकारात्मक पहल: हालांकि, मेसर्स आलोक फेरो एलाइज (Alok Ferro Alloys) और API इस्पात जैसी कंपनियां नियमित रूप से STP के शोधित पानी का इस्तेमाल कर रही हैं।
Editorial Conclusion
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के सख्त रुख के बाद राज्य सरकार और नगरीय प्रशासन तंत्र में हलचल जरूर देखने को मिल रही है। हालांकि, जुर्माना वसूलने और कागजी योजनाओं से आगे बढ़कर जब तक निर्माणाधीन Sewage Treatment Plants को समयसीमा के भीतर चालू नहीं किया जाएगा और उद्योगों को Treated Water लेने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा, तब तक Chhattisgarh River Pollution की गंभीर समस्या का स्थाई समाधान निकलना मुश्किल है।
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