
विकास शर्मा, प्रबंधक (जनसंपर्क एवं औद्योगिक संबंध) छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड
Smart Meter इन दिनों छ्त्तीसगढ़ में बिजली बिल को लेकर चर्चा जोरों पर है। कुछ लोग सोशल मीडिया पर तो कुछ राजनीतिक रूप से स्मार्ट मीटर को बढ़े हुए बिजली बिल का दोषी ठहरा रहे हैं। चर्चा के केन्द्र में आए स्मार्ट मीटर को लेकर जिज्ञासा भी बढ़ी है। एक उपभोक्ता के नजरिए से स्मार्ट मीटर को देखना भी चाहिए। असल में स्मार्ट मीटर स्थापना का निर्णय देश की ऊर्जा जरूरतों, गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति तथा सबके लिए ऊर्जा के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए व्यापक कार्ययोजना का हिस्सा रहा है। ऊर्जा क्षेत्र में सुधारवादी कदम के रूप में यह अपनी कितनी उपयोगिता साबित कर पाया है यह जानना जरूरी।
क्या है सुधारवादी कदम
देश में विद्युत ऊर्जा की मांग बीते एक – डेढ़ दशक में तेजी से बढ़ी है। वर्ष 2013-14 में जहाँ 136 गीगावॉट की अधिकतम मांग थी वह इस वर्ष 270 गीगावॉट को पार कर गई। ऊर्जा उत्पादन क्षमता में वृद्धि , पारेषण तंत्र की मजबूती और वितरण प्रणाली का सुदृणीकरण आवश्यक हो गया था। सबसे महत्वपूर्ण था तकनीकी एवं वाणिज्यिक हानि (एटीएंडसी लॉस) को न्यूनतम स्तर पर लाना। हानि को कम करने तथा पारदर्शी वितरण एवं बिलिंग व्यवस्था की मजबूती के लिए 2021 में देशभर में पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना ((आरडीएसएस) की शुरूआत की गई। योजना के तहत पुराने विदयुत कंडक्टर को बदलना, उपकेन्द्रों की क्षमता वृद्धि, फीडर पृथक्करण (सेपरेशन) , एनर्जी ऑडिट, ट्रांसफार्मर स्तर से लेकर उपभोक्ताओं तक उन्नत प्रौद्योगिकी वाले स्मार्ट मीटर की स्थापना शामिल है।
कितना हुआ बदलाव
आरडीएसएस योजना के विभिन्न उपायों जिसमें स्मार्ट मीटर की स्थापना भी शामिल है के लागू होने के बाद परिणाम चौंकाने वाले हैं। विद्युत मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार देश में वर्ष 2020-21 में विद्युत हानि 21.91 प्रतिशत थी जो 2024-25 में गिरकर 15.04 प्रतिशत पहुंच गई है। देश में 6 करोड़ से अधिक स्मार्ट मीटर लग चुके हैं। बिहार,असम ,आंध्रप्रदेश समेत कुछ अन्य राज्यों में सबसे अधिक सकारात्मक बदलाव देखे गए हैं। बिहार में विद्युत हानि 39.39 प्रतिशत से 15.51 प्रतिशत ,असम में 23.39 प्रतिशत से 15.44 प्रतिशत , आँध्रप्रदेश में 20.4 प्रतिशत से घटकर 7.9 प्रतिशत तक आ चुकी है। छत्तीसगढ़ के परिप्रेक्ष्य में देखें तो यहाँ और अहम हो जाता है क्योंकि सरकार हर वर्ग के उपभोक्ताओं को प्रत्यक्ष तौर पर रियायती बिजली उपलब्ध कराती है। योजना के क्रियान्वयन से यहाँ यह घाटा बीते दो वर्ष में ही 03 प्रतिशत घटकर 13 प्रतिशत से नीचे आ गया है। जबकि राज्य निर्माण के समय 34 प्रतिशत हानि का भार झेल रहे थे। यह विद्युत वितरण क्षेत्र में व्यापक सुधार के परिणाम को दर्शाता है।
RDSS योजना और स्मार्ट मीटर से कितना हुआ बदलाव?
केंद्रीय विद्युत मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, RDSS योजना और स्मार्ट मीटर के क्रियान्वयन के बाद चौंकाने वाले सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं:
| क्षेत्र / राज्य | पहले नुकसान (AT&C Loss) | वर्तमान नुकसान (AT&C Loss) |
| राष्ट्रीय स्तर (2020-21 से 2024-25) | 21.91% | 15.04% |
| बिहार | 39.39% | 15.51% |
| असम | 23.39% | 15.44% |
| आंध्र प्रदेश | 20.40% | 7.90% |
| छत्तीसगढ़ | 13.00% (2 साल पहले) | 13.00% से कम (राज्य गठन पर 34% था) |
बिजली की बढ़ती खपत
देश में बिजली की खपत बढ़ने में औद्योगिक, परिवहन , कृषि , व्यवसायिक से लेकर घरेलू उपभोक्ताओं की भूमिका अहम है। छत्तीसगढ़ में ही घरेलू उपभोक्ताओं की विद्युत खपत में तेजी से बढ़ोत्तरी हुई है। प्रति व्यक्ति बिजली खपत के मामले में छत्तीसगढ़ देश में पांचवे स्थान पर है। बीते एक वर्ष में ही प्रदेश में अधिकतम मांग 300 मेगावॉट बढ़कर 7300 मेगावॉट को पार कर गई है। राज्य में प्रतिव्यक्ति आय में वृद्धि , वैश्विक ऊर्जा चुनौतियों और गर्मी के लंबे कालखण्ड ने बिजली की खपत को और बढ़ा दिया है। परिवहन विभाग के आँकड़ों के मुताबिक प्रदेश में ई व्हीकल जिसमें दो पहिया, तीन पहिया, चार पहिया वाहन शामिल हैं की पंजीकृत संख्या 203934 है। इसमें अकेले ई रिक्शा ही 30 हजार से अधिक हैं तथा 1 लाख 30 हजार से अधिक दो पहिया वाहन जो बिजली से ही चार्ज होते हैं। इसके अलावा घरेलू ईंधन के तौर पर इलेक्ट्रिक स्टोव एवं इंडक्शन का उपयोग एक वर्ष के अंदर ही तेजी से बढ़ा है। वातानुकूलन के लिए एसी का उपयोग अब विलासिता की बात नहीं रही। आईईए के रिपोर्ट के मुताबित देश में 10-12 प्रतिशत की दर से एसी का उपयोग बढ़ता जा रहा है। यह आँकड़ा देश के स्तर पर ही नहीं प्रदेश के लिए भी बढ़ती जरूरतों को इंगित करता है।
स्मार्ट मीटर का विरोध कितना सही
बढ़े विद्युत बिल को आधार बनाकर स्मार्ट मीटर का विरोध किया जा रहा है। यह विरोध राजनीतिक भी होता जा रहा है। जनता की भावनाओं का राजनीतिक उपयोग होता रहा है संभव है इस मसले में भी हो पर इस विरोध में बड़ा विरोधाभास भी दिखता है। छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटर की स्थापना का निर्णय से लेकर निविदा तक एक दल की सरकार रही वहीं दूसरे दल की सरकार ने आकर उसे आगे बढ़ाया। इसी प्रकार देश के कई राज्यों में विरोध कर रहे दलों की सरकार है जो अपने यहाँ स्मार्ट मीटर को बढ़ावा दे रहे हैं या प्रारंभ करने में शामिल थे। इसमें हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडू, केरल, झारखण्ड, पश्चिम बंगाल भी शामिल हैं। इसलिए ऐसे में यह संदेह के दायरे में है कि विरोध स्मार्ट मीटर का है या राजनीतिक। कुछ सोशल मीडिया में अपूर्ण तथ्यों के आधार पर स्मार्ट मीटर का विरोध भी जोरों से हो रहा है। इससे वे परोक्ष रूप से बिजली क्षेत्र के सुधारक कदमों को रोकने का ही प्रयास कर रहे हैं।
क्या है उपाए
एक उपभोक्ता का अधिक बिल आना निश्चित ही उसके बजट को सीधे प्रभावित करता है। ऐसे में यदि उपभोक्ता को बिल पर संदेह है तो निराकरण के कई मंच हैं। अच्छी बात तो स्मार्ट मीटर के मामले में यही है कि वो उपभोक्ता को अधिक सशक्त बनाता है। खपत पर निगरानी से लेकर नियंत्रण की सुविधा मोबाइल पर उपलब्ध है। संदेह का समाधान मीटर की जाँच कर भी कर सकते हैं। केन्द्र सरकार के निर्देशों के तहत प्रदेश में मीटर की जाँच की सुविधा उपलब्ध है। शिकायत हो तो चेक मीटर से जाँच , असंतुष्ट होने पर एनएबीएल प्रमाणित प्रदेश की मीटर जाँच प्रयोगशाला में भी जाँच की सकती है। भिलाई स्थित केन्द्रीय जाँच प्रयोगशाला के आँकड़े बहुत महत्वपूर्ण हैं कि बीते वर्ष में 355 स्मार्ट मीटरों की जांच में किसी में रीडिंग संबंधी त्रुटि नहीं पाई गई।
उपभोक्ता जागरूकता है जरूरी
बढ़े बिल को नजरअंदाज तो नहीं किया जा सकता पर कुछ बातों पर ध्यान देकर उपभोक्ता अपने बिल पर नियंत्रण कर सकता है। एसी के उपयोग में तापमान से बड़ा खेल होता है। 24 डिग्री से कम तापमान यानि प्रत्येक डिग्री में कमी 6 प्रतिशत तक अधिक बिल का कारण। उपभोक्ता सजग रहें कि विदयुत कनेक्शन लेते वक्त उन्होंने कितने लोड की अनुमति ली थी क्योंकि स्मार्ट मीटर इसपर निगाह बनाए हुए हैं कि लगातार तीन माह तक स्वीकृत भार के बढ़ने पर अपने आप उपभोक्ता को बढ़े स्वीकृत भार की श्रेणी में लाता है और अतिरिक्त भार के लिए शुल्क जोड़कर बिल में भेज रहा है। प्रदेश में यह बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं के साथ हुआ है जिससे वे स्मार्ट मीटर में अधिक बिलिंग के तौर पर देख रहे हैं।
उपभोक्ता और राष्ट्रहित
विद्युत क्षेत्र के सुधारवादी कदमों का देश के सभी राज्यों में लाभ दिख रहा है। बिजली की निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण आपूर्ति बिना बेहतर प्रौद्योगिकी के संभव नहीं है। आज यदि हर क्षेत्र में उन्नत प्रौद्योगिकी का लाभ लिया जा रहा है। ऐसे में देशहित और उपभोक्ता हित को केन्द्र में रखकर किए जा रहे बदलावों को यदि भ्रामकता का शिकार बनाया जाएगा तो भविष्य में ऊर्जा क्षेत्र का सशक्तिकरण प्रभावित होगा। एक सजग और जिम्मेदार विदयुत उपभोक्ता अपने हितों को राष्ट्रहित के साथ जोड़कर देखेगा तभी आने वाली पीढ़ी को ऊर्जा सशक्त राष्ट्र सौंपने में सफल होगा।







