कर्मचारी हलचल

CSPC मोदी तक पहुंचा बिजली कंपनी की कैशलेस योजना का मामला: EPWA के अध्यक्ष ने लिखा Letter…

CSPC  रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य पॉवर कंपनियों के कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए लागू कैशलेस स्वास्थ्य योजना का मामला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंच गया है। इसमें पीएम को बताया गया है कि इस योजना में आंखों के अस्पतालों की तरफ से मोतियाबिंद के उपचार में लगने वाले लेंस में क्वालिटी के नाम से जारी लूट को आंशिक रूप से रोकने के लिए एमआरपी पर 40% डिस्काउंट देने का प्रावधान किया गया है।

इसके तहत पूरे राज्य में 01 अप्रैल 2025 से 30 अगस्त 2025 तक करीब 150 से अधिक मोतियाबिंद के आपरेशन हो चुके हैं। यह योजना डॉक्टरों के बीच लोकप्रिय है क्योंकि बिल जमा करने के दिनांक से 10 दिनों में भीतर पूर्ण भुगतान प्राप्त हो जाता है। कुछ आंखों के डॉक्टर्स एसोसियेशन के नाम पर अन्य आंखों के अस्पतालों के डॉक्टरों को डिस्काउंट देने से रोकने का अनुचित प्रयास कर राजनीतिक हस्तक्षेप किया जा रहा है।

इंजीनियर्स पब्लिक वेलफेयर एसोसिएशन ने लिखा पत्र

इसको लेकर इंजीनियर्स पब्लिक वेलफेयर एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजा है। एसोसिएशन के अध्यक्ष पीके खरे अपने इस पत्र में कहा है कि छत्तीसगढ़ के ऐसे आंखों के अस्पतालों के विरुद्ध जो बिना किसी उचित कारण के कैशलेस सुविधा देने से इंकार कर रहे हैं. उनके विरुद्ध उचित कार्यवाही के लिए संबंधितों को निर्देशित किया जाए।

इंट्राऑक्युलर लेंस जो कि पूर्व से ही ड्रग के रूप में अधिसूचित है को लोकहित में ड्रग प्राईज कंट्रोल के तहत लाते हुए इसके लिए Selling Price निर्धारित की जाए ताकि देश के गरीब वृद्धजन, पेंशनर्स मोतियाबिंद का उपचार, बिना किसी लूटपाट की आशंका के अपनी मेहनत की कमाई से निर्भय होकर करा सकें।

CSPC लैंस की भी तय हो कीमत

एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री खरे ने लिखा है कि नेशनल फार्मासुटिकल प्राईजिंग ऑर्धारिटी (NPPA) द्वारा जारी ड्रग (प्राईस कंट्रोल) आदेश 2013 की कंडिका-चार के अनुसार अधिसूचित अति आवश्यक दवाईयां (जिसमें स्टेंट, लेस आदि भी शामिल हैं) की अधिकतम Selling Price का निर्धारण रिटेलरों के औसत क्रय कीमत में 16% का मुनाफा देकर तय किया जाता है।

इसी आधार पर दिनांक 21 मार्च 2017 को हृदय में लगने वाले स्टेंट की अधिकतम Selling Price को 29,600 निर्धारित किया गया था तब से 1 से 1.5 लाख तक बिकने वाले हृदय में लगने वाले स्टेंट की कीमत में लगाम लगी है।

इससे आम आदमी को राहत मिल सकी। उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने दिनांक 06.10.2005 को अधिसूचना क्र. 1468 (६) के माध्यम से इंट्राऑक्युलर लेंस को ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक एक्ट 1940 की धारा 3(b) (ii) के अनुसार ड्रग की श्रेणी में सम्मिलित किया है।

750 का लैंस 15000 में

श्री खरे ने लिखा है कि जिस प्रकार हृदय रोग में लगने वाले स्टेंट के ओवर प्राईजिंग के नाम पर चल रही लूट से आम आदमी को बचाया गया है उसी प्रकार आंखों के अस्पतालों द्वारा मोतियाबिंद आपरेशन के उपरांत उपयोग में लाए जाने वाले इंट्राआक्युलर लेंस को डीपीसी के शेड्यूल में शामिल कर इसी की सीलिंग प्राईज निर्धारित किए जाने की तत्काल आवश्यकता है, जिससे आम वृद्धजनों, पेंशनरों को राहत मिल सके। इंट्राऑक्युलर लेंस बनाने वाले और आंखों के अस्पतालों द्वारा संगठित होकर मरीजों को लूटा जा रहा है।

750 की खरीदी कीमत के लेंस में 15,000 तक एमआरपी होती है और मरीज से 15,000 ही वसूले जा रहे है। मोतियाबिंद के आपरेशन में अधिकांश मामलों में हाईड्रोफोबिक फोल्डेबल मोनोक्रोमेटिक इंट्राऑक्युलर लेंस लगाए जाते हैं, जिनके 5 प्रमुख निर्माताओं के लेंस के खरीदी व विक्रय कीमत का संक्षिपा विवरण सुलभ संदर्भ के लिए निम्नानुसार है-

लेंस का मेकखरीदी कीमतMRPवसूली
फोल्ड हाईड्रोफोबलिक क्लियर फोब75015,00020 गुना
भाव्यामी सुपराफौब1,50010,0006 गुना
ग्रुप का अल्टीमा प्लस नेचुरल1,5009,5006 गुना
एलकान एक्रीसाफ6,00018,0003 गुना
कार्ल जाइस (सीटी लुसिया)6,61919,5003 गुना

CSPC  महाराष्ट्रा में पहल

माह जून 2017 में समाचार पत्र मेडिकल डायलॉग, इंडियन एक्सप्रेस एवं हिन्दू में छपी खबरो के अनुसार महाराष्ट्र राज्य सरकार के फूड एण्ड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) द्वारा इंट्राऑक्युलर लेंस की प्राईजिंग के संबंध में रिपोर्ट नेशनल फार्मासुटिकल प्राईजिंग आर्थोरिटी (NPPA) को भेज कर इंट्राऑक्युलर लेंस को डीपीसी के तहत लाते हुए इसकी अधिकतम विक्रय मूल्य की सीमा निर्धारित करने के लिये अनुरोध किया था।

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