
बिलासपुर (छत्तीसगढ़)। न्यायधानी बिलासपुर में समय पर बिजली समस्याओं का समाधान न होना और बार-बार फ्यूज उड़ने की शिकायतों के पीछे एक बहुत बड़ा Electricity Scam और भ्रष्टाचार का खेल सामने आया है। बिजली उपभोक्ताओं (Power Consumers) की सहूलियत के नाम पर प्रतिवर्ष लाखों-करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाए जा रहे हैं, लेकिन धरातल पर इसका लाभ आम जनता को नहीं मिल रहा।
हाल ही में बिलासपुर सिटी सर्किल में CSPDCL Scam का एक बड़ा मामला उजागर हुआ है, जिसमें ठेकेदारों और विभागीय अधिकारियों की साठगांठ से फर्जी अटेंडेंस शीट (Fake Attendance Sheet) तैयार कर विद्युत कंपनी को 93 लाख रुपये से अधिक की चपत लगाई गई है। इस पूरे फर्जीवाड़े की जांच रिपोर्ट पिछले 8 महीनों से विभागीय दफ्तरों में धूल फांक रही है, लेकिन अब तक किसी भी जिम्मेदार अधिकारी या ठेकेदार पर कोई कठोर दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई है।
6 वर्षों से दो ही ठेकेदारों का एकाधिकार
बिलासपुर शहर में पिछले लगभग 6 सालों से फ्यूज कॉल अटेंड करने और मेंटेनेंस (Fuse Call and Maintenance) का पूरा जिम्मा ठेकेदारों के हाथों में सौंपा गया है। विशेष बात यह है कि सिटी सर्किल के दोनों डिवीजनों (पूर्व और पश्चिम संभाग) में सिर्फ दो ही ठेकेदार लगातार इस काम को संभाल रहे हैं।
ठेकेदारों ने फर्जीवाड़े का ऐसा ताना-बाना बुना कि कागज पर दर्जनों श्रमिकों (Contractual Workers) की फर्जी उपस्थिति दर्ज करा दी गई। इसी फर्जी हाजिरी के आधार पर विद्युत वितरण कंपनी से बिना किसी ठोस भौतिक सत्यापन (Physical Verification) के 93 लाख रुपये का भुगतान करा लिया गया। जब मामले की शिकायत उच्च स्तर पर पहुंची, तब कहीं जाकर मामले की परतें खुलना शुरू हुईं।
जांच में उजागर हुआ 93 लाख रुपये का बड़ा घोटाला
शिकायत मिलने के बाद सिटी सर्किल के तत्कालीन अधिकारियों ने मामले की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया। जांच अधिकारी जे.एस. नेताम और बी.आर. मौर्य की दो सदस्यीय जांच कमेटी ने सिटी सर्किल के पूर्व और पश्चिम दोनों संभागों के दस्तावेजों का बारीकी से परीक्षण किया।
कमेटी ने अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि बिलासपुर सिटी सर्किल में 93 लाख रुपये की भारी अनियमितता (Financial Irregularity) हुई है। जांच अधिकारियों ने अपनी सील-बंद रिपोर्ट कंपनी के आला अधिकारियों को सौंप दी, लेकिन आठ महीने बीत जाने के बाद भी यह फाइल मानव संसाधन विभाग (HR Department) और कार्यपालन निदेशक के कार्यालय के चक्कर काट रही है।
एक ही श्रमिक से 3 जोन में काम: श्रम कानूनों की उड़ीं धज्जियां
इस पूरे CSPDCL Scam की जांच रिपोर्ट में जो बातें सामने आई हैं, वे बेहद चौंकाने वाली हैं। ठेकेदारों ने बिल पास कराने के लिए नियमों और श्रम कानूनों को पूरी तरह ताक पर रख दिया।
- एक ही नाम पर तिगुना भुगतान: ठेकेदारों ने एक ही श्रमिक की उपस्थिति एक ही दिन में 2 से 3 अलग-अलग जोनों में दिखाकर कंपनी से भुगतान लिया।
- 24 से 36 घंटे लगातार ड्यूटी: दस्तावेजों के अनुसार एक ही कर्मचारी से 24 से 36 घंटे लगातार काम कराया जाना दिखाया गया, जो कि व्यावहारिक रूप से असंभव है।
- आधे स्टाफ से काम: ठेकेदारों ने फील्ड पर सिर्फ आधा स्टाफ रखा और बाकी के फर्जी नाम जोड़कर लाखों रुपये डकार लिए।
- अनुबंध का उल्लंघन: यह पूरी प्रक्रिया कंपनी के स्टैंडर्ड कॉन्ट्रैक्ट एग्रीमेंट और लेबर लॉ का सीधा उल्लंघन है।
असिस्टेंट इंजीनियर (AE) और एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (EE) पर उठे गंभीर सवाल
इस पूरे फर्जीवाड़े में सिर्फ ठेकेदार ही दोषी नहीं हैं, बल्कि फील्ड में तैनात जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी बेहद संदिग्ध मानी जा रही है। जोन स्तर पर पदस्थ असिस्टेंट इंजीनियर (AE) और डिवीजन स्तर पर बैठे एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (EE) ने बिना सत्यापन (Verification) किए ठेकेदारों के वाउचरों पर हस्ताक्षर किए और बिलों को पास होने के लिए आगे बढ़ाया।
नियमों के अनुसार, बिल भुगतान से पहले फील्ड में मौजूद श्रमिकों का भौतिक सत्यापन करना अनिवार्य होता है। लेकिन अधिकारियों ने ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से आंखें मूंद रखीं। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या कंपनी अपने ही दागी अधिकारियों और इंजीनियरों पर कार्रवाई करने से डर रही है?
क्या कहते हैं विद्युत कंपनी के जिम्मेदार अधिकारी?
इस मामले में मीडिया ने बिलासपुर क्षेत्र के ईडी एके अम्बस्ट से चर्चा की… तो उन्होंने कहा-
“जांच रिपोर्ट मानव संसाधन (HR) विभाग के पास प्रक्रियाधीन है। जिस अधिकारी ने ठेकेदारों से अनुबंध किया है, नियमानुसार उन्हीं को कार्रवाई करनी होती है। यदि प्रतिवेदन हमारे कार्यालय तक आधिकारिक रूप से भेजा जाता है, तो संबंधित ठेकेदारों को ब्लैक लिस्ट (Blacklist) करने के लिए आला अधिकारियों को लिखा जाएगा। इस मामले में पूरी फाइल जल्द ही मंगाई जाएगी।” — ए.के. अम्बस्ट (कार्यपालन निदेशक, विद्युत कंपनी, बिलासपुर)
उपभोक्ताओं का दर्द: मेंटेनेंस शून्य, बिल में पूरी वसूली
एक तरफ बिलासपुर शहर की जनता लगातार बिजली कटौती, लो वोल्टेज और फ्यूज उड़ने की शिकायतों से त्रस्त है, वहीं दूसरी तरफ मेंटेनेंस के नाम पर 93 लाख रुपये का Cyber and Manual Fraud का घालमेल जारी है।
ग्राउंड रियलिटी यह है कि ठेकेदारों द्वारा पर्याप्त स्टाफ न रखने के कारण जब उपभोक्ता फ्यूज कॉल सेंटर में फोन करते हैं, तो घंटों तक कोई कर्मचारी सुधार के लिए नहीं पहुंचता। जनता परेशान होती रहती है और ठेकेदार फर्जी हाजिरी के जरिए कंपनी का खजाना खाली करते रहते हैं।
Chatur विचार
बिलासपुर का यह CSPDCL Scam केवल 93 लाख रुपये के गबन का मामला नहीं है, बल्कि यह विद्युत कंपनी के ढीले प्रशासनिक रवैये और पारदर्शी प्रणाली (Transparency Mechanism) के अभाव को भी उजागर करता है। यदि 8 महीने पुरानी जांच रिपोर्ट पर अब भी तुरंत कड़ा एक्शन नहीं लिया गया, तो इससे भ्रष्ट ठेकेदारों और अधिकारियों के हौसले और बुलंद होंगे।
देखना यह होगा कि क्या विद्युत कंपनी के उच्च अधिकारी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए दोषी एई, ईई और फर्जीवाड़ा करने वाले ठेकेदारों पर प्राथमिकी दर्ज (FIR) कराकर उन्हें ब्लैकलिस्ट करते हैं, या फिर यह फाइल भी अन्य घोटालों की तरह फाइलों के अंबार में गुम हो जाएगी।







