
CSPGCL रायपुर। छत्तीसगढ़ बिजली उत्पादन कंपनी की 440 मेगावॉट उत्पादन क्षमता वाला कोरबा ईस्ट पॉवर प्लांट अब बंद हो चुका है। बंद पड़े इस पॉवर प्लांट को लेकर विधानसभा में सवाल- जवाब हुआ है। कोरबा ईस्ट पावर प्लांट को लेकर सवाल विधानसभा के मौजूदा बजट सत्र में पूछा गया है।
विधायक फूलसिंह राठिया ने पूछा सवाल
कोरबा ईस्ट को लेकर सवाल विधायक फूलसिंह राठिया ने पूछा था, राठिया के सवाल का मुख्यमंत्र की तरफ से उत्तर दिया गया है। राठिया ने पूछा कि कोरबा के बंद पड़े 440 मेगावाट पॉवर प्लांट में अब तक कितनी मात्रा में लो लाईन भूमि पर राख डालने की स्वीकृति दी गई है ? क्या इस पावर प्लांट के भूमि पर पहले कभी पानी भरने की समस्या हुई है? यदि नहीं तो फिर क्या राख डालने की अनुमति किस आधार पर दी गई?
अधिकारियों पर कार्यवाही
राठिया ने यह भी पूछा कि बंद पड़ा रिसदा राखड़ बांध, जो कि पिछले वर्ष जुलाई-अगस्त में टूट गया था, उस पर संबंधित अधिकारियों के उपर क्या कार्यवाही की गई?
मुख्यमंत्री ने सदन को दी यह जानकारी
इस प्रश्न के लिखित उत्तर में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बताया है कि सीएसईबी कोरबा के बंद पड़े 2×120 मेगावाट और 4×50 मेगावाट कोरबा थर्मल पावर स्टेशन (KTPS), कोरबा पूर्व में छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने कुल 2,97,867 मीट्रिक टन भराव की अनुमति दी है। पावर प्लांट के बंद होने के बाद परिसर स्थित मुख्य प्लांट बिल्डिंग और अन्य सहायक संरचनाओं को डिमोलिश की प्रक्रिया में बहुत सी संरचनाएं जो पावर प्लांट के शून्य लेवल के नीचे भी स्थित थी के डिमोलिश होने से प्लांट परिसर में गहरे गड्ढे निर्मित हो गए थे।
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बरसात के दौरान इन निर्मित गड्डों मे पानी का भराव होने से जनधन हानि होने की संभावना प्रबल हो गई थी। डिमोलीशन से निर्मित गड्डों के समतलीकरण के लिए छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने फ्लाई एश से भराई की अनुमति प्रदान की है।
गड्डों में फ्लाई एश भराई और उपरी सतह मिट्टी से ढंक कर प्लांट के शून्य लेवल तक समतलीकरण कार्य किया गया है।
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सीएसईबी के बंद पड़े रिसदा राखड़ बांध का स्थिरिकरण (Stabilized) किया जा चुका है इसलिए उस राखड बांध में स्लरी प्रवाह बंद है। बावजूद इसके बांध में वार्षिक रुप से रखरखाव करने की व्यवस्था की जाती है।
सितंबर-अक्टूबर, वर्ष 2025 में अधिक वर्षा के कारण बांध के उपर पानी का भराव अत्यधिक मात्रा में होने के फलस्वरूप तटबंध के कटने से कुछ मात्रा में राखड़ बह कर निचली सतह में फैल गई।
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अत्यधिक वर्षा की स्थिति में तत्काल सुरक्षात्मक उपाय करते हुए रेन-कट्स को नियंत्रित किया गया और स्थाई मरम्मत का कार्य किया जा रहा है। कटाव की प्रक्रिया प्राकृतिक घटना होने से व इस कटाव से बिजली उत्पादन बाधित नही होने और जन धन की हानि नही होने के फलस्वरूप किसी अधिकारी पर विभागीय कार्यवाही की आवश्यकता प्रतीत नहीं हुई।




