रायपुर। छत्तीसगढ़ स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड (CSPTCL) में बिना वरिष्ठता सूची जारी किए गए प्रमोशन के मामले में प्रबंधन ने बैकफुट पर आते हुए एक बड़ा फैसला लिया है। कंपनी ने असिस्टेंट इंजीनियर (AE) से एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (EE) के पद पर प्रमोट किए गए ओमप्रकाश रात्रे का आदेश रद्द कर दिया है। हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया में भाई-भतीजावाद और नियमों की अनदेखी के आरोप अब भी प्रबंधन का पीछा नहीं छोड़ रहे हैं।
6 दिन में ही ‘अर्श से फर्श’ पर
मामले की टाइमलाइन बताती है कि किस तरह आनंद-फानन में फैसले लिए गए:
- 17 अप्रैल: 9 एई को ईई बनाने का आदेश जारी हुआ।
- 19 अप्रैल: ‘चतुरपोस्ट.कॉम’ ने पदोन्नति में नियमों की अनदेखी और भ्रष्टाचार की आशंका पर प्रमुखता से खबर प्रकाशित की।
- 20 अप्रैल: विवाद बढ़ता देख प्रबंधन ने प्रमोशन को होल्ड पर डाला।
- 23 अप्रैल: मुख्य अभियंता (HR) ने आदेश जारी कर ओमप्रकाश रात्रे की पदोन्नति को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया।
हैरानी की बात यह है कि रद्द करने के इस आदेश (क्रमांक 2132) में प्रबंधन ने निरस्त किए जाने के कारणों का कोई उल्लेख नहीं किया है।
राजीव त्रिपाठी पर मेहरबानी क्यों?
ओमप्रकाश रात्रे पर कार्रवाई के बाद अब विभाग के भीतर ही सवाल उठने लगे हैं। इसी सूची में राजीव कुमार त्रिपाठी का नाम भी शामिल है, जो मेरिट लिस्ट में 8वें नंबर पर थे। आरोप है कि उन्होंने भी अपने से सीनियर इंजीनियरों को ‘सुपरसीड’ (पीछे छोड़ना) किया है। प्रबंधन ने रात्रे का प्रमोशन तो रद्द कर दिया, लेकिन त्रिपाठी के मामले में अब तक चुप्पी साधी हुई है। इंजीनियरों का सवाल है कि यदि रात्रे का प्रमोशन गलत था, तो एक ही प्रक्रिया से प्रमोट हुए त्रिपाठी का आदेश सही कैसे हो सकता है?
नियमों को ताक पर रखकर हुआ प्रमोशन
विभागीय सूत्रों के मुताबिक, CSPTCL ने पदोन्नति की लोकतांत्रिक प्रक्रिया का गला घोंट दिया है।
- बिना ग्रेडेशन लिस्ट के प्रमोशन: नियमतः किसी भी पदोन्नति से पहले ‘अंतिम वरिष्ठता सूची’ प्रकाशित होनी चाहिए, जो नहीं की गई।
- दावा-आपत्ति का मौका नहीं: इंजीनियरों को अपनी सीनियरिटी को लेकर आपत्ति दर्ज कराने का अवसर ही नहीं दिया गया।
- मेरिट की अनदेखी: साल 2018 के भर्ती विज्ञापन के स्पष्ट निर्देशों (परीक्षा के अंकों के आधार पर वरिष्ठता) को पूरी तरह दरकिनार कर चहेतों को लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई।
पावर कंपनी में मचे इस ‘प्रमोशन कांड’ ने अब एक बड़े विवाद का रूप ले लिया है, जिससे कंपनी की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
विभाग सीएम का, दो- दो आईएएस, फिर भी…
बता दें कि बिजली कंपनियां ऊर्जा विभाग के अंतर्गत अंतर्गत आती हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ऊर्जा विभाग के भारसाधक मंत्री हैं। मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव (IAS) सुबोध कुमार सिंह और (IAS) डॉ. रोहित यादव ऊर्जा सचिव के साथ ही पावर कंपनियों के अध्यक्ष भी हैं। इसके बावजूद अफसर इस तरह का काम कर रहे हैं जिसका असर इन सभी की छवि पर पड़ना स्वभाविक हैं।

