
रायपुर (धरसीवां): राजधानी रायपुर के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों, वाणिज्यिक हब और कचना सहित विधानसभा मार्ग से लगे रिहायशी इलाकों के उपभोक्ताओं के लिए आज का दिन एक बड़ी सौगात लेकर आया है। छत्तीसगढ़ स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड (CSPTCL) ने रायपुर संभाग की विद्युत पारेषण व्यवस्था (Power Transmission System) को सुदृढ़ करने की दिशा में आज एक और ऐतिहासिक सफलता हासिल की है।
कंपनी के प्रबंध निदेशक (Managing Director) राजेश कुमार शुक्ला ने आज धरसीवां विकासखंड के अंतर्गत आने वाले 220/132 केवी उपकेंद्र कुथरेल (Kuthrel) में पहुंचे। जहां उन्होंने कंट्रोल पैनल के माध्यम से बटन दबाकर 160 एमवीए (MVA) क्षमता के एक बेहद शक्तिशाली नए पावर ट्रांसफॉर्मर को सफलतापूर्वक ऊर्जीकृत (Energized) किया। इस क्षमता वृद्धि (Capacity Enhancement) के बाद अब राजधानी के एक बड़े हिस्से में लो-वोल्टेज और ट्रिपिंग की समस्या हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी।
रायपुर के ‘टॉप-4’ क्लब में शामिल हुआ कुथरेल (Kuthrel Becomes 4th Largest Substation)
इस नए ट्रांसफॉर्मर की स्थापना के साथ ही कुथरेल उपकेंद्र की कुल क्षमता अब बढ़कर 480 एमवीए (MVA) हो गई है। इसी के साथ इस ग्रिड ने एक नया रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया है:
- रायपुर का चौथा बड़ा केंद्र: क्षमता में इस भारी इजाफे के बाद कुथरेल अब रायपुर जिले का चौथा सबसे बड़ा 220 केवी सब-स्टेशन बन गया है।
- उरला-सिलतरा की कतार में: इससे पहले रायपुर संभाग में केवल उरला, सिलतरा और बोरझरा स्थित 220/132 केवी के तीनों उपकेंद्र ही 480-480 एमवीए की अधिकतम क्षमता के साथ संचालित हो रहे थे। अब कुथरेल भी इसी श्रेणी में आ गया है।
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गर्मी के लोड प्रबंधन और भविष्य की मांग के लिए बड़ा कदम (Peak Load & Demand Management)
पावर ग्रिड अपग्रेडेशन (Power Grid Upgradation) के इस प्रोजेक्ट के पूरे होने से उपभोक्ताओं को सीधे तौर पर बेहतरीन तकनीकी फायदे (Technical Benefits) मिलेंगे:
- विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति: इस क्षमता वृद्धि से आसपास के सैकड़ों भारी उद्योगों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और हजारों घरेलू उपभोक्ताओं को अधिक विश्वसनीय और उच्च गुणवत्ता वाली बिजली मिल सकेगी।
- गर्मी के लोड का सटीक प्रबंधन: भीषण गर्मी के मौसम में एसी, कूलर और फैक्ट्रियों के कारण अचानक बढ़ने वाले विद्युत भार (Peak Load) को संभालने में अब ट्रांसमिशन सिस्टम को कोई दिक्कत नहीं आएगी।
- भविष्य की अधोसंरचना तैयार: रायपुर और धरसीवां के ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में तेजी से हो रहे विकास और भविष्य की अतिरिक्त विद्युत मांग (Power Demand) को पूरा करने के लिए बिजली कंपनी ने एडवांस में पर्याप्त पारेषण अधोसंरचना उपलब्ध करा दी है।
एमडी शुक्ला ने दी बधाई, मौके पर मौजूद रही इंजीनियरों की टीम
सफलतापूर्वक ऊर्जीकरण के इस बड़े मौके पर प्रबंध निदेशक राजेश कुमार शुक्ला ने पारेषण कंपनी के अभियंताओं और तकनीकी कर्मचारियों की पीठ थपथपाई। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं को निर्बाध (Interrupted-free) और क्वालिटी पावर सप्लाई देना ही हमारी प्राथमिकता है।
इस महत्वपूर्ण तकनीकी कार्य को पूरा कराने के दौरान मुख्य अभियंता ई. अब्राहम वर्गीज, अतिरिक्त मुख्य अभियंता आर. के. तिवारी, कार्यपालन अभियंता (उपकेंद्र) जितेंद्र कुमार झा, कार्यपालन अभियंता (परीक्षण संभाग) कमंजय सिन्हा सहित विभाग के कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी और लाइन स्टाफ के कर्मचारी मुख्य रूप से उपस्थित थे।
विद्युत प्रणाली में आए ये 4 मुख्य सुधार (Key System Modifications)
इस ग्रिड के चार्ज होते ही बिजली वितरण व्यवस्था में तत्काल ये बड़े तकनीकी सुधार देखने को मिलेंगे:
- 1. वोल्टेज प्रोफाइल में सुधार (Improved Voltage Profile): कचना, विधानसभा रोड, धरसीवां और सड्डू जैसे इलाकों के टेल-एंड (आखरी छोर) तक के उपभोक्ताओं को अब लो-वोल्टेज की समस्या नहीं झेलनी पड़ेगी। सभी को स्थिर और पूरा वोल्टेज मिलेगा।
- 2. ओवरलोडिंग से बड़ी राहत (Zero Overloading): इस नए महा-ट्रांसफॉर्मर के चार्ज होने से पारेषण तंत्र पर लोड का बेहतर और समान वितरण (Load Distribution) होगा। इससे सब-स्टेशन के फेल होने, केबल जलने या ट्रिपिंग की संभावनाएं पूरी तरह शून्य हो जाएंगी।
- 3. निर्बाध औद्योगिक आपूर्ति (Uninterrupted Industrial Supply): रायपुर के प्रमुख औद्योगिक बेल्ट और धरसीवां क्षेत्र की रोलिंग मिलों व अन्य फैक्ट्रियों को बिना किसी फ्लक्चुएशन के हाई-क्वालिटी बिजली मिलेगी, जिससे उनके प्रोडक्शन और कामकाज को गति मिलेगी।
- 4. पीक लोड का सटीक प्रबंधन (Peak Load Management): भीषण गर्मी के मौसम में जब अचानक एसी, कूलर और भारी मशीनों के कारण बिजली की मांग (Peak Demand) चरम पर पहुंच जाती है, तब यह 480 एमवीए की बढ़ी हुई क्षमता ग्रिड को पूरी तरह सुरक्षित रखेगी।







