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Custom Milling  कस्टम मिलिंग घोटाला में 1500 पेज की चार्जशीट दाखिल: अनिल टुटेजा और अनवर ढेबर पर…

Custom Milling  रायपुर। छत्‍तीसगढ़ की आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्‍यूरो ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के दौरान हुए कथित कस्‍टम मिलिंग घोटाला में सोमवार को विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) चार्जशीट दाखिल किया। इसमें सेवानिवृत्‍त आईएएस अनिल टुटेजा और कारोबारी अनवर ढेबर पर गंभीर आरोप लगा गए हैं । दोनों फिलहाल केंद्रीय जेल रायपुर में बंद हैं।

यह दूसरी चार्जशीट

प्रकरण संख्या 01/2024 में दर्ज एफआईआर के तहत दोनों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी (आपराधिक षड्यंत्र), 38 4 (जबरन वसूली), 409 (आपराधिक विश्वासघात) तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 198 8  की धारा 11, 13(1)(क), 13(2) के तहत आरोप लगाए गए हैं। इससे पहले फरवरी, 2025 में इस मामले में रोशन चंद्राकर और मनोज सोनी के खिलाफ भी पहली चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है।

Custom Milling अनिल टुटेजा पर राइस मिलरों से वसूली का आरोप

ईओडब्ल्यू की जांच में खुलासा हुआ है कि अनिल टुटेजा ने छत्तीसगढ़ राइस मिलर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों के साथ मिलकर 20 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध वसूली की। राइस मिलरों से प्रति क्विंटल 20 की दर से जबरन पैसा वसूला गया। इसके लिए मार्कफेड अधिकारियों पर दबाव बनाकर राइस मिलरों के बिलों को लंबित रखा जाता था, जिससे वे मजबूर होकर घूस देने को तैयार हो जाएं।

अनवर ढेबर पर अवैध निवेश का आरोप

चार्जशीट में खुलासा हुआ है कि अनवर ढेबर ने वर्ष 2022-23 में राजनीतिक प्रभाव का दुरुपयोग करते हुए न केवल शराब घोटाले, बल्कि लोक निर्माण विभाग और वन विभाग जैसे प्रमुख विभागों में भी गहरी पैठ बना रखी थी। आयकर विभाग की छापामारी के दौरान मिले डिजिटल सबूतों में यह प्रमाणित हुआ है कि उन्होंने कस्टम मिलिंग घोटाले से प्राप्त अवैध धन को संगृहीत, व्यय, निवेश और उपभोग किया। ढेबर ने मिलरों से वसूले गए धन को टुटेजा के लिए एकत्रित कर उसे आगे विभिन्न तरीकों से कालेधन को सफेद करने में उपयोग किया।

Custom Milling जांच अभी जारी

ईओडब्ल्यू ने बताया कि घोटाले में शामिल रामगोपाल अग्रवाल और अन्य आरोपियों के खिलाफ भी जांच जारी है। आगामी दिनों में और भी बड़े खुलासे तथा कार्रवाई होने की संभावना है।

 क्या है कस्टम मिलिंग घोटाल

कस्टम मिलिंग घोटाले में आरोप है कि सरकारी योजनाओं के तहत धान की मिलिंग प्रक्रिया को आधार बनाकर राइस मिलरों से करोड़ों रुपये की जबरन वसूली की गई। यह वसूली कथित रूप से उच्च अधिकारियों और प्रभावशाली व्यक्तियों के संरक्षण में की गई और फिर उस धन का उपयोग राजनीतिक और व्यक्तिगत लाभ के लिए किया गया।

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