कर्मचारी हलचल

छत्तीसगढ़ पावर कंपनीज में प्रमोशन पर बवाल: रिटायर्ड लाइन स्टाफ के साथ सौतेला व्यवहार क्यों? पेंशनर्स ने खोला मोर्चा

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल (Chhattisgarh State Electricity Board) के सेवानिवृत्त कर्मचारियों और अधिकारियों की पदोन्नति का मामला अब गरमाता जा रहा है। एक तरफ जहां प्रशासनिक और सिविल के अधिकारियों को लगातार उच्च पदों पर प्रमोट किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ बिजली विभाग की रीढ़ कहे जाने वाले लाइन स्टाफ (Line Staff) आज भी अपने हक के लिए तरस रहे हैं। पूरे प्रदेश के सेवानिवृत्त बिजली कर्मियों में इसे लेकर भारी आक्रोश और असंतोष (Resentment and Anger) व्याप्त है।

छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल पेंशनर्स एसोसिएशन (Chhattisgarh State Electricity Board Pensioners Association, Raipur) के महासचिव सुधीर नायक ने इस पूरे मामले पर मैनेजमेंट की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने साफ कहा है कि जो कर्मचारी पूरी जिंदगी जान जोखिम में डालकर बिजली खंभों पर चढ़े, आज रिटायरमेंट के बाद भी वे अपनी जायज पदोन्नति (Legitimate Promotion) के लिए मुंह ताक रहे हैं।

अधिकारियों से मुलाकात और आश्वासन का दौर

पेंशनर्स एसोसिएशन का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल इस संबंध में लगातार प्रबंधन और जिम्मेदार अधिकारियों (Responsible Officials) से चर्चा कर रहा है। हाल ही में एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने मानव संसाधन ट्रांसमिशन (HR Transmission) की मुख्य अभियंता (Chief Engineer) मैडम से मुलाकात की।

इस बैठक के दौरान मुख्य अभियंता ने आश्वासन (Assurance) दिया है कि लंबित प्रमोशन ऑर्डर (Pending Promotion Order) जल्द ही प्रसारित किए जाएंगे। हालांकि, कर्मचारियों का कहना है कि पूर्व में भी ऐसे कई आश्वासन मिल चुके हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। वर्तमान में स्थिति यह है कि कई पात्र कर्मचारी SO (Section Officer) से ADO (Assistant Administrative Officer) के पद पर प्रमोट नहीं हो पाए हैं।

1987 के बैच का अटका मामला और सीनियरिटी का संकट

यह मामला कितना पुराना और पेचीदा है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जो कर्मचारी साल 1987 में ओ ग्रेड 2 (O Grade 2) के रूप में सेवा में आए थे, वे लंबे समय बाद प्रमोशन पाकर ADO तो बन गए और इसी पद से सेवानिवृत्त (Retired) भी हो गए। नियमानुसार उन्हें सीनियर प्रशासनिक अधिकारी (Senior Administrative Officer) बनाया जाना था, लेकिन आज तक उन्हें यह पदोन्नति नहीं मिल सकी है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि उन्हें पदोन्नति देने की कार्रवाई प्रक्रियाधीन (Under Process) है, लेकिन फाइलों की कछुआ चाल से कर्मचारियों का धैर्य अब जवाब दे रहा है।

लाइन स्टाफ की दयनीय स्थिति: चौबीस घंटे सेवा, फिर भी उपेक्षा

एसोसिएशन ने पूरे प्रदेश का दौरा करने के बाद जो रिपोर्ट तैयार की है, उसमें सबसे ज्यादा चिंताजनक स्थिति हमारे लाइन स्टाफ की सामने आई है।

  • कठिन परिस्थितियां: इन कर्मचारियों ने अपनी पूरी जिंदगी दिन-रात, कड़कड़ाती ठंड, चिलचिलाती धूप और मूसलाधार बरसाती बारिश (Torrential Rains) में भी विद्युत व्यवस्था (Power Supply) को बहाल रखने में लगा दी।
  • जोखिम भरा काम: बिजली के ऊंचे खंभों और ट्रांसफार्मर पर चढ़कर अपनी जान हथेली पर रखकर काम करने वाले इन जांबाजों ने विद्युत मंडल का नाम ऊंचा किया है।
  • पदोन्नति के लिए मोहताज: आज यही कर्मठ कर्मचारी सेवानिवृत्ति के बाद अपने वैध प्रमोशन (Valid Promotion) के लिए तरस रहे हैं, जो सीधे तौर पर मानवीय अधिकारों का भी हनन है।

मानव संसाधन डिस्ट्रीब्यूशन और ट्रांसमिशन के बीच फंसा पेंच

जब पेंशनर्स एसोसिएशन ने इस विषय पर मानव संसाधन डिस्ट्रीब्यूशन (HR Distribution) के आला अधिकारियों से चर्चा की, तो एक बड़ा तकनीकी पेंच (Technical Hitch) सामने आया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि:

साल 2022 के पहले तक के जितने भी नॉन-स्टाफ के पदोन्नति आदेश (Promotion Orders) हैं, उन्हें जारी करने की जिम्मेदारी मानव संसाधन ट्रांसमिशन (HR Transmission) की है। जब तक ट्रांसमिशन विभाग इन आदेशों को क्लियर नहीं करता, तब तक डिस्ट्रीब्यूशन विभाग साल 2022 के बाद के प्रमोशन ऑर्डर जारी करने में सक्षम नहीं होगा।”

इस प्रशासनिक खींचतान और विभागों के बीच आपसी समन्वय (Coordination) की कमी का खामियाजा सीधे तौर पर उन बुजुर्ग रिटायर्ड कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है जो अपनी पेंशन और बढ़े हुए एरियर का इंतजार कर रहे हैं।

16 हजार से अधिक पेंशनर्स का बढ़ता आक्रोश

आज की तारीख में छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल पेंशनर्स एसोसिएशन से जुड़े सेवानिवृत्त कर्मचारियों और अधिकारियों की संख्या 16,000 से ऊपर पहुंच चुकी है। इनमें से लगभग 7,000 सक्रिय सदस्य सीधे तौर पर एसोसिएशन के साथ जुड़े हुए हैं। इस संगठन में सबसे बड़ी संख्या इसी शोषित लाइन स्टाफ के सेवानिवृत्त साथियों की है।

सोशल मीडिया, इंटरनेट और व्हाट्सएप (WhatsApp) के इस आधुनिक दौर में जब लाइन स्टाफ के लोग देखते हैं कि प्रशासन ने हाल ही में सिविल विंग के रिटायर्ड सुपरिटेंडिंग इंजीनियरों (Superintending Engineers) को मुख्य अभियंता (Chief Engineer) और कार्यपालक निदेशक (Executive Director) जैसे उच्च पदों पर बैक-टू-बैक प्रमोशन दिए हैं, तो उनका आक्रोश और बढ़ जाता है। जब वे संगठन से पूछते हैं कि हमारे साथ यह भेदभाव क्यों, तो आज संगठन के पदाधिकारी भी उन्हें कोई संतोषजनक जवाब देने की स्थिति में नहीं हैं।

हाईकोर्ट का आदेश और मैनेजमेंट पर बढ़ता दबाव

उच्च न्यायालय (High Court Order) के दिशा-निर्देशों के बाद अब विभाग पर पदोन्नति का कार्यभार और दबाव बहुत अधिक बढ़ गया है। चारों ओर से मैनेजमेंट पर फाइलों को निपटाने का प्रेशर है। स्थिति यह हो गई है कि पीड़ित कर्मचारी व्यक्तिगत रूप से न्याय की गुहार लगाने सीधे मंत्रालय (Ministry) तक पहुंच रहे हैं।

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कंपनी ने वर्तमान में एक नई गाइडलाइन (New Guideline) भी बनाई है, जिसके तहत सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों के रिटायरमेंट से 45 दिन पूर्व ही उनकी पदोन्नति की कार्रवाई पूरी करने का प्रावधान (Provision) रखा गया है। यह व्यवस्था कागजों पर तो बेहद शानदार है, लेकिन वर्तमान में लंबित पड़े सैकड़ों मामलों को देखकर लगता है कि इस नियम का पालन पूरी तरह से नहीं किया जा रहा है।

S. J. Kumar

पत्रकारिता के क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव । सुदीर्घ करियर में राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। जटिल मुद्दों के सरल विश्लेषण और खोजी रिपोर्टिंग के साथ राजनीति, प्रशासन और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है। पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में Chaturpost.com में सेवाएं दे रहे हैं।
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