
रायपुर (chaturpost.com)। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत कंपनी (Chhattisgarh State Power Holding Company Limited) में सेवानिवृत्त अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ हो रहे प्रशासनिक अन्याय को लेकर बवाल मच गया है। छत्तीसगढ़ विद्युत सेवानिवृत्त कर्मचारी अधिकारी महासंघ के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल (Delegation) ने आज दिन भर बिजली कंपनी के तमाम आला अफसरों और प्रबंध निदेशकों (Managing Directors) के दफ्तरों का घेराव कर तीखी चर्चा की।
मामला पेंशन पुनरीक्षण (Pension Revision), पेपर प्रोफॉर्मा पदोन्नति (Proforma Promotion) में विसंगतियों और विभाग की लापरवाही का खमियाजा बुजुर्ग सेवानिवृत्त कर्मचारियों पर थोपने से जुड़ा है। महासंघ ने प्रबंधन के कई फैसलों को पूरी तरह से गैर-कानूनी (Illegal) और तानाशाही पूर्ण करार दिया है। आइए आपको बताते हैं कि आज दिन भर बिजली दफ्तरों में क्या कुछ हुआ और किन मुद्दों पर प्रबंधन की बोलती बंद हो गई।
“विभाग की गलती, तो कर्मचारी क्यों दे शपथ पत्र?” (The SAP Dispute)
मुलाकात के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने सबसे तीखा सवाल पेंशनर्स के नाम और सरनेम में हुई लिपिकीय त्रुटि (Clerical Error) को लेकर उठाया। दरअसल, मानव संसाधन विभाग (Human Resources Department) की गलती से कई आदेशों में कर्मचारियों के नाम गलत छप गए हैं। अब विभाग इसे सुधारने के लिए बुजुर्ग सेवानिवृत्त कर्मचारियों से ₹100-50 के स्टांप पर शपथ पत्र (Affidavit) मांग रहा है।
महासंघ ने दो टूक शब्दों में कहा: “सवाल 50 या 100 रुपये खर्च करने का नहीं है। जो गलती विभाग की ओर से हुई है, उसके लिए एक सेवानिवृत्त कर्मचारी से शपथ पत्र मांगना पूरी तरह से विधि विरुद्ध (Against the Law) है। आदेश की त्रुटि पर कोई कर्मचारी भला क्या लिखकर देगा?”
प्रतिनिधिमंडल ने मांग की है कि इस मानव संसाधन कार्यालय (HR Office) के इस निर्देश को तत्काल वापस लिया जाए और कर्मचारी संख्या (Employee ID) के अनुसार SAP रिकॉर्ड में दर्ज नाम को ही मान्य कर वेतन निर्धारण (Fixation of Salary) और पेंशन पुनरीक्षण किया जाए।
बैठक में इन बड़े मुद्दों पर हुई सार्थक चर्चा (Key Agenda Points)
महासंघ के प्रांतीय महामंत्री श्री पी आर साहू, अखिल भारतीय महामंत्री श्री अरुण देवांगन, क्षेत्रीय अध्यक्ष श्री संजय चौधरी, कोषाध्यक्ष श्री हेमेन्द्र जाधव और श्री ए पी नामदेव ने संयुक्त रूप से प्रबंधन के सामने निम्नलिखित गंभीर मुद्दे रखे:
- जूनियर को प्रमोशन, सीनियर छूटे: ट्रांसमिशन कंपनी द्वारा जारी तीन पदोन्नति आदेशों में भारी विसंगति है। जूनियर कर्मचारियों को तो प्रमोट कर दिया गया, लेकिन कई सीनियर कर्मचारी तकनीकी आधार पर छूट गए हैं।
- फाइलों की फुटबॉल: जनरेशन और ट्रांसमिशन कंपनी के अधिकारी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर पल्ला झाड़ रहे हैं।
- सफाई कर्मचारियों का शोषण: पिछले वर्ष का बोनस भुगतान (Bonus Payment) अभी तक सफाई कर्मचारियों को नहीं किया गया है।
- अमर्यादित पत्र व्यवहार: सेवानिवृत्त अभियंता के आवास गृह के संबंध में अधीक्षण अभियंता (सिविल) द्वारा भेजे गए अपमानजनक पत्र पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराते हुए कार्रवाई की मांग की गई।
किन-किन अधिकारियों से हुई मुलाकात? (High-Level Meetings)
अपनी मांगों को लेकर महासंघ का गुस्सा सातवें आसमान पर था। प्रतिनिधिमंडल ने एक ही दिन में विद्युत कंपनी के इन शीर्ष अधिकारियों से टेबल टॉक की:
- श्री संजीव कटियार (प्रबंध निदेशक, जनरेशन कंपनी)
- श्री राजेश शुक्ला (प्रबंध निदेशक, ट्रांसमिशन कंपनी)
- श्रीमती रश्मि वर्मा (मुख्य अभियंता, मानव संसाधन ट्रांसमिशन)
- श्री राजेंद्र प्रसाद (महाप्रबंधक, मा संसा डिस्ट्रीब्यूशन)
- श्री द्विवेदी (मुख्य अभियंता, मा संसा जनरेशन)
- श्री नवीन ठाकुर (महाप्रबंधक, वित्त)
इन मुद्दों पर बनी सहमति, मिला आश्वासन (The Outcomes)
दिन भर चले इस भारी दबाव के बाद आखिरकार बिजली कंपनी के प्रबंधन को झुकना पड़ा और कई महत्वपूर्ण विषयों पर सकारात्मक सहमति बनी है:
- SAP रिकॉर्ड ही होगा मान्य: महाप्रबंधक वित्त श्री नवीन ठाकुर ने महासंघ के विरोध पत्र को स्वीकार करते हुए सहमति जताई कि SAP में दर्ज नाम के आधार पर ही पेंशन पुनरीक्षण (Pension Revision) की कार्रवाई की जाएगी, अलग से शपथ पत्र की अनिवार्यता पर रोक लगेगी।
- पदोन्नति प्रकरणों का त्वरित निपटारा: एमडी जनरेशन श्री संजीव कटियार और अन्य अधिकारियों ने आश्वस्त किया कि छूटे हुए कार्यालयीन और तकनीकी कर्मचारियों के पेपर प्रोफॉर्मा पदोन्नति के प्रकरणों का जल्द निपटारा किया जाएगा।
- डिस्पेंसरी में दवाओं की आपूर्ति: बिजली कंपनी की डिस्पेंसरी में चल रही दवाओं की किल्लत को दूर करने के लिए तत्काल आदेश जारी कर दिए गए हैं, जल्द ही कमी दूर होगी।
- बोनस और दुर्व्यवहार पर जांच: सफाई कर्मियों के बोनस और अधीक्षण अभियंता के अपमानजनक पत्र व्यवहार के मामले में एमडी ने उचित दंडात्मक कार्रवाई का भरोसा दिया है।
इस पूरी वार्ता के बाद कर्मचारियों में उम्मीद जगी है, लेकिन महासंघ ने साफ कर दिया है कि अगर आश्वासनों को जल्द ही आधिकारिक आदेशों में नहीं बदला गया, तो यह शांतिपूर्ण चर्चा एक बड़े आंदोलन (Protest) का रूप ले सकती है।







