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सरकारी कर्मचारी पति-पत्नी की एक ही जगह पोस्टिंग पर बड़ी खबर, सरकार ने नियमों पर दी ये सफाई

Husband Wife Same Station Posting

नई दिल्ली: सरकारी सेवा में कार्यरत शादीशुदा जोड़ों के लिए ‘Work-Life Balance’ बनाए रखना हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है। अलग-अलग शहरों में पोस्टिंग (Geographical Locations) के कारण परिवार चलाने में आने वाली दिक्कतों को देखते हुए भारत सरकार ने नियमों पर एक महत्वपूर्ण स्थिति स्पष्ट की है।

राज्यसभा में हाल ही में पूछे गए एक सवाल के जवाब में सरकार ने साफ किया है कि Husband Wife Same Station Posting के नियम किन कर्मचारियों पर लागू होते हैं और किन पर नहीं।

क्या है DoPT का मुख्य नियम? (The 2009 OM)

कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने 30 सितंबर 2009 को एक ऑफिस मेमोरेंडम (OM) जारी किया था। इसका Objective (उद्देश्य) यह था कि यदि पति-पत्नी दोनों सरकारी सेवा में हैं, तो उन्हें यथासंभव एक ही स्टेशन पर तैनात किया जाए ताकि उनकी उत्पादकता (Productivity) बनी रहे।

Highlights:
  • पति-पत्नी की एक ही स्टेशन पर पोस्टिंग को लेकर राज्यसभा में स्थिति साफ।
  • DoPT का 2009 का नियम केवल केंद्रीय विभागों पर लागू।
  • स्वायत्त निकायों (Autonomous Bodies) के लिए फिलहाल कोई नया प्रस्ताव नहीं।
  • राज्यसभा में क्या हुआ खुलासा? (Recent Clarification)

    12 मार्च 2026 को राज्यसभा में प्रोफेसर मनोज कुमार झा द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने स्थिति स्पष्ट की। Specifically (विशेष रूप से), स्वायत्त निकायों (Autonomous Bodies) को लेकर उठ रहे सवालों पर सरकार ने बड़ा बयान दिया है।

    सरकार के जवाब की मुख्य बातें:

    • लागू होना: 2009 के निर्देश केवल उन मंत्रालयों और विभागों पर लागू होते हैं जो सीधे केंद्र सरकार (Central Government) के अधीन हैं।
    • स्वायत्त निकाय: Centrally Funded Autonomous/Statutory निकायों के कर्मचारियों पर यह नियम स्वतः (Automatically) लागू नहीं होता।
    • भविष्य की योजना: सरकार ने स्पष्ट किया कि फिलहाल इन नियमों को स्वायत्त संस्थानों तक बढ़ाने का कोई प्रस्ताव (No Proposal) विचाराधीन नहीं है।

    कर्मचारियों के लिए इसके मायने (Key Takeaways for Employees)

    यदि आप केंद्र सरकार के सीधे नियंत्रण वाले विभाग में हैं, तो आप 2009 के नियमों का लाभ ले सकते हैं। हालांकि, स्वायत्त संस्थानों (जैसे IITs, IIMs या अन्य Statutory Bodies) के मामले में स्थिति अलग है:

    • Institutional Bylaws: ऐसे संस्थानों के अपने आंतरिक नियम (Internal Policies) होते हैं।
    • Career Planning: ट्रांसफर के लिए आवेदन करते समय कर्मचारियों को अपने संस्थान के विशिष्ट उपनियमों की जांच करनी होगी।
    • No Change: 2026 में भी पुरानी नीति ही प्रभावी रहेगी, इसमें विस्तार की उम्मीद फिलहाल कम है।

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    सरकार मानती है कि परिवार का साथ होना जरूरी है, लेकिन प्रशासनिक स्वायत्तता (Administrative Autonomy) के कारण हर संस्थान पर एक ही नियम थोपना संभव नहीं है। Therefore (इसलिए), स्वायत्त निकायों में काम करने वाले कर्मचारियों को अपनी संस्था के नियमों के तहत ही आवेदन करना होगा।

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