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IMD ने जारी किया देशव्यापी अलर्ट: इस साल सामान्य से कम बारिश, जून में झुलसाएगी भीषण गर्मी

न्‍यूज डेस्‍क (Chaturpost): भारतीय अर्थव्यवस्था और देश के करोड़ों किसानों के लिए एक बहुत ही चिंताजनक (alarming) खबर सामने आ रही है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (India Meteorological Department – IMD) ने साल 2026 के दक्षिण-पश्चिम मॉनसून (Southwest Monsoon) को लेकर अपना दूसरा और संशोधित दीर्घकालिक पूर्वानुमान (Updated Long Range Forecast) जारी कर दिया है. मौसम विभाग के मुताबिक, इस साल देश में मॉनसून के दौरान सामान्य से काफी कम बारिश (below normal rainfall) होने की आशंका है.

इसके साथ ही, जून के महीने में देश के अधिकांश हिस्सों में भीषण लू (severe heatwave) चलने और अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहने की दोहरी मार पड़ने वाली है. आइए इस विस्तृत रिपोर्ट में समझते हैं कि मौसम प्रणाली (weather system) में ऐसा क्या बदल गया है, जिससे इस साल सूखे और भीषण गर्मी (drought and extreme heat) का संकट मंडरा रहा है.

Monsoon 2026: आंकड़ों में समझें कितनी होगी बारिश?

मौसम विभाग (IMD) के महानिदेशक द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, जून से सितंबर के दौरान पूरे देश में औसतन केवल 90% बारिश होने की संभावना है. मौसम विज्ञान की भाषा में इसे ‘सामान्य से कम’ यानी Below Normal Rainfall की श्रेणी में रखा जाता है.

इस पूर्वानुमान मॉडल में $\pm4\%$ की त्रुटि (model error) हो सकती है. भारत में 1971 से 2020 के आंकड़ों के आधार पर मॉनसूनी सीजन की दीर्घकालिक अवधि का औसत (Long Period Average – LPA) 87 सेंटीमीटर है. इस साल बारिश इसी 87 सेमी के औसत से 10 फीसदी कम रहने वाली है.

मौसम विभाग के संभाव्यता पूर्वानुमान (probability forecast) के आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति और भी गंभीर दिखती है:

  • ·        देश में Deficient (सूखे जैसे हालात) रहने की संभावना सबसे ज्यादा यानी 60% है.
  • ·        बारिश के Below Normal (सामान्य से कम) रहने की संभावना 24% है.
  • ·        जबकि मॉनसून के Normal (सामान्य) रहने की उम्मीद सिर्फ 14% बची है.
  • ·        मौसम के Above Normal या Excess होने की संभावना लगभग शून्य (0-2%) है.

क्षेत्रीय पूर्वानुमान: आपके राज्य में कैसा रहेगा मॉनसून?

IMD ने देश के चार प्रमुख समरूप भौगोलिक क्षेत्रों (four homogenous regions) और मुख्य मॉनसून क्षेत्र (Monsoon Core Zone – MCZ) के लिए भी अलग-अलग आंकड़े जारी किए हैं. इसके तहत देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का मिजाज कुछ इस तरह रहेगा:

1. मध्य भारत और दक्षिण प्रायद्वीप (Central and South Peninsular India)

मध्य भारत (जिसमें मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र के हिस्से आते हैं) और दक्षिणी राज्यों में इस साल मॉनसून की बेरुखी सबसे ज्यादा झेलनी पड़ सकती है. इन क्षेत्रों में मौसमी वर्षा (seasonal rainfall) LPA के 94% से भी कम रहने का अनुमान है.

2. उत्तर-पश्चिम भारत (Northwest India)

दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे उत्तर-पश्चिमी राज्यों में भी मॉनसूनी बादल निराश करेंगे. यहाँ सीजनल वर्षा LPA के 92% से कम रहने की अत्यधिक संभावना जताई गई है.

3. पूर्वोत्तर भारत (Northeast India)

पूर्वोत्तर के राज्यों (Northeast states) के लिए थोड़ी राहत की खबर है. असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश सहित आसपास के इलाकों में मॉनसून के सामान्य (Normal) रहने की उम्मीद है, जो कि LPA का 94% से 106% के बीच हो सकता है.

4. मॉनसून कोर ज़ोन (Monsoon Core Zone – MCZ)

भारत के वे इलाके जो पूरी तरह से वर्षा आधारित कृषि (rainfed agriculture areas) पर निर्भर हैं, उन्हें मॉनसून कोर जोन कहा जाता है. दुर्भाग्य से, इस कृषि बेल्ट में भी वर्षा का स्तर LPA के 94% से नीचे (Below Normal) रहने की 43% संभावना है.

अल नीनो (El Nino Affect) का विलेन अवतार: क्यों रूठा मॉनसून?

जलवायु मॉडल के ताजा पूर्वानुमानों (latest climate model forecasts) से संकेत मिलता है कि यह अल नीनो स्थिति जून से सितंबर के दौरान पूरी तरह सक्रिय हो जाएगी. ऐतिहासिक रूप से, जब भी प्रशांत महासागर में अल नीनो सक्रिय होता है, तब-तब भारतीय मॉनसून कमजोर पड़ता है और देश को सूखे (drought) का सामना करना पड़ता है.

दूसरी ओर, हिंद महासागर में द्विध्रुव स्थिति यानी Indian Ocean Dipole (IOD) फिलहाल न्यूट्रल (neutral) बनी हुई है और पूरे मॉनसून सीजन में इसके न्यूट्रल रहने की ही संभावना है. इसका मतलब यह है कि हिंद महासागर से भी अल नीनो के इस नकारात्मक प्रभाव (negative impact) को बेअसर करने वाली कोई मदद मिलती नहीं दिख रही है.

जून महीने का आउटलुक: शुरुआत ही होगी बेहद खराब

पूरे सीजन के अलावा अगर केवल जून 2026 की बात करें, तो मॉनसून की शुरुआती रफ्तार (onset and progress) बेहद सुस्त रहने वाली है.

  • कम बारिश का अलर्ट: जून महीने में देशव्यापी औसत वर्षा सामान्य से काफी कम यानी LPA के 92% से भी नीचे रहने की संभावना है. उत्तर-पश्चिम और पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों को छोड़कर देश के बाकी सभी राज्यों में जून में बहुत कम पानी बरसेगा.
  • झुलसाने वाला तापमान: जून में रात और दिन दोनों ही बेहद गर्म होने वाले हैं. देश के अधिकांश हिस्सों में मासिक अधिकतम तापमान (maximum temperatures) और न्यूनतम तापमान (minimum temperatures) दोनों ही सामान्य से अधिक (above normal) रहने वाले हैं.

इन राज्यों में चलेगी भीषण लू (Heatwave Alert)

IMD की हीटवेव गाइडलाइन (Heatwave outlook) के मुताबिक जून 2026 में देश के कई राज्यों में सामान्य से कहीं ज्यादा दिनों तक लू (heat wave days) का प्रकोप रहेगा.

राहत कहाँ? केवल राजस्थान और झारखंड ऐसे राज्य हैं, जहाँ जून महीने में सामान्य से कम लू (below-normal heatwave days) चलने की उम्मीद जताई गई है.

आम जनजीवन, खेती और बिजली ग्रिड पर क्या होगा असर?

बारिश में कमी और रिकॉर्ड तोड़ गर्मी के इस दोहरे संकट के कारण भारत को कई मोर्चों पर चुनौतियों (multi-sectoral challenges) का सामना करना पड़ सकता है:

  • कृषि संकट (Agricultural Challenge): देश के बड़े हिस्से में खरीफ फसलों (धान, मक्का, सोयाबीन) की बुआई जून में शुरू होती है. बारिश न होने से फसलों की बुआई में देरी होगी और किसानों पर लागत का बोझ बढ़ेगा.
  • जल संकट (Water Scarcity): देश के प्रमुख जलाशयों और डैम में पानी का स्तर नीचे जा सकता है, जिससे पीने के पानी (drinking water resources) की किल्लत हो सकती है.
  • बिजली की भारी मांग (Power Consumption Spike): भीषण गर्मी और लू के कारण देश में एयर कंडीशनर और कूलिंग उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ेगा, जिससे बिजली ग्रिड (power grid) पर दबाव चरम पर पहुंच जाएगा. वहीं, नदियों में कम पानी के चलते जलविद्युत उत्पादन (hydropower generation) भी प्रभावित हो सकता है.
  • स्वास्थ्य जोखिम (Public Health Risks): लगातार उच्च तापमान बने रहने से बुजुर्गों, बच्चों और खुले में काम करने वाले मजदूरों (outdoor workers) में हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और अन्य बीमारियां बढ़ने का खतरा बढ़ गया है.

क्या हैं बचाव के उपाय? IMD की प्रशासनिक सलाह

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मौसम विभाग ने सभी राज्य सरकारों और जिला प्रशासनों (State Governments and district administrations) को अभी से आपदा प्रबंधन और पूर्व तैयारी (preparedness measures) तेज करने की सलाह दी है.

  1. कूलिंग सेंटर्स का निर्माण: शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक कूलिंग शेल्टर्स को तुरंत चालू किया जाए.
  2. पेयजल की उपलब्धता: हीटवेव प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षित और ठंडे पेयजल की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित की जाए.
  3. कृषि आकस्मिक योजना: किसानों के लिए कम पानी में उगने वाली फसलों और वैकल्पिक सिंचाई (contingency planning) के लिए गाइडलाइन जारी की जाए.
  4. अर्ली वार्निंग सर्विस: आईएमडी की साप्ताहिक और दैनिक उन्नत पूर्वानुमान सेवाओं (Extended Range and Short Range Forecast) का लगातार अवलोकन किया जाए ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके.

Chaturpost की पाठकों से अपील: जून महीने के दौरान दोपहर के समय (peak afternoon hours) बेवजह घर से बाहर निकलने से बचें, शरीर में पानी की कमी न होने दें (maintain adequate hydration) और ओआरएस या नींबू पानी का सेवन करते रहें. मौसम की हर सटीक और तेज अपडेट के लिए Chaturpost.com के साथ जुड़े रहें.

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S. J. Kumar

पत्रकारिता के क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव । सुदीर्घ करियर में राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। जटिल मुद्दों के सरल विश्लेषण और खोजी रिपोर्टिंग के साथ राजनीति, प्रशासन और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है। पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में Chaturpost.com में सेवाएं दे रहे हैं।
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