
Bageshwar Dham रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में बागेश्वर धाम सरकार की हनुमंत कथा का सोमवार को तीसरा दिन था। आज बागेश्वर धाम सरकार ने दिव्य दरबार लगाकर भक्तों पर्चे खोले। अर्जी लगती, उसका नाम पुकारा जाता। वह भागा-भागा बाबा तक पहुंचता। कोई चरणों में लोट जाता, कोई भावुक होकर रोने लगता। इसके बाद बाबा अपनी चिरपरिचित शैली में पूछते-कहां से आए हो?
भूत-प्रेतों की जमकर पटाई
रायपुर के दही हांडी उत्सव स्थल गुढ़ियारी में दूसरी ओर प्रेत दरबार भी लगा। ऐसा माना जाता है कि जिनके ऊपर प्रेत बाधाएं होती हैं, महाराज बालाजी की कृपा से उसे ठीक करते हैं। उनको उपाय भी बताते हैं। सिद्ध भभूति देते हैं, जिससे भक्तों को आराम मिलता है। वहीं बागेश्वर सरकार अदृश्य सेनापति के माध्यम से भूतों की जमकर पिटाई भी करवाई।
तन केवल खाने और सोने के लिए नहीं
हनुमंत कथा में बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि हमारा मनुष्य तन केवल खाने और सोने के लिए नहीं मिला कुछ करने के लिए मिला है, इस बात का जिसको बोध हो गया, वह भी भाग्यशाली है, क्योंकि हम साधु है और साधु के लिए सब बराबर है।
Bageshwar Dham बंगाल का कार्यक्रम रद्द
पं. धीरेंद्र शास्त्री ने कहा है कि ममता बनर्जी के मुख्यमंत्री रहते वे बंगाल में कथा नहीं करेंगे। उन्होंने बताया कि अभी हमको प. बंगाल जाना था, तो दीदी ने हमको मना कर दिया। परमिशन ही कैंसिल हो गई। दीदी जब तक हैं, तब तक नहीं जाएंगे, दादा जब आएंगे तो जाएंगे।
तीन दिन का था कार्यक्रम
बताया जा रहा है कि बागेश्वरधाम सरकार का कोलकाता में 10, 11 और 12 अक्टूबर को हनुमंत कथा होनी थी। बारिश की वजह से इसकी परमिशन रद्द कर दी गई। किसी और जगह पर कथा के लिए भी अनुमति नहीं मिली। जिसके चलते शास्त्री ने अब इसे स्थगित कर दिया है।
बड़े-बड़े इनामी नक्सली ढेर हो गए कितनी अच्छी बात है
पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में सभी पार्टी के लोग सत्ता में रहे पर भैया छत्तीसगढ़ का जो काला धब्बा था, नक्सलाइट कोई खत्म नहीं कर पाया, पर भगवान ने ऐसी कृपा की कि भारत के गृहमंत्री अमित शाह और छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री विजय शर्मा, जिन्होंने प्रण ले लिया कि भारत की सबसे प्रिय प्रदेशों में महतारी के रूप में जिसे पूजा जाता है,
वह छत्तीसगढ़ है और छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा काला धब्बा वह है नक्सलवाद और उसे 2026 तक खत्म किया जाएगा और हमें प्रसन्नता भी है कि शर्मा आज कथा में भी आए हैं।
आपने जो प्रण लिया, उसको करके भी दिखाया, बड़े-बड़े इनामी नक्सली ढेर हो गए, कितनी अच्छी बात है। पद को पा लेना बड़ी बात नहीं है, पद पर बैठ करके उस पद का सदुपयोग करना बहुत बड़ी बात है।
इससे छत्तीसगढ़ की जो गति है, उस गति को और चार-चांद लेंगे और छत्तीसगढ़ इसी तरह पूरे देश में आगे बढ़ता जाएगा।
Bageshwar Dham कथा सुनने के तीन मूल नियम है
बागेश्वर सरकार ने कहा कि कथा सुनने के तीन मूल नियम है। पहला नियम है कथा प्रारंभ होने से पूर्व बैठ जाए, दूसरा नियम है बहुत सावधान होकर सुनें क्योंकि कौन सी बात तुम्हारें चित्त में बैठकर चोट कर जाए और कौन सी बात तुम्हारा हृदय परिवर्तन कर दे।
तीसरा नियम रसिक बनकर कथा में बैठें, जब तक कथा पूरी न हो जाए, तब तक भावपूर्वक बैठकर कथा को सुनें।
रसिक का मतलब जैसे गाना गाने वाले को अपना गाना प्रिय होता है, जैसे घोड़ा चलाने वाले को घोड़ा प्रिय होता है, जैसे राजनीति व्यक्ति को राजनीति की बात प्रिय लगती है, जैसे साधु नीति की बातों को साधुओं को प्रिय लगती है वैसे ही कथा श्रोता को केवल कथा ही प्रिय लगनी चाहिए।
इस भाव से यदि कथा सुनोगे तो पक्का है आपको कथा का फल भी मिलेगा और कथा के सत्संग के प्रभाव से कथा में मिलेंगे संत।




