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Earthquake ओडिशा में भूकंप: बस्तर तक डोली धरती, 4.4 रही तीव्रता; जानें क्यों संवेदनशील हो रहा है छत्तीसगढ़ का यह इलाका

Earthquake in CG छत्‍तीसगढ़ के जशपुर में भूकंप के झटके: 4 से 5 सेकेंड तक ढोलती रही धरती

Earthquake जगदलपुर/रायपुर: छत्तीसगढ़ के पड़ोसी राज्य ओडिशा के कोरापुट में शनिवार देर रात भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 4.4 मापी गई। भूकंप का केंद्र जमीन से महज 5 किलोमीटर नीचे था, जिसके चलते इसका असर सीमावर्ती छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में भी देखने को मिला। रात करीब 11:31 बजे आए इन झटकों से लोगों में अफरा-तफरी मच गई।

बस्तर में भी दहशत, घरों से बाहर निकले लोग

भूकंप का केंद्र बस्तर मुख्यालय (जगदलपुर) से लगभग 80 किलोमीटर दूर कोरापुट में था। नजदीक होने के कारण जगदलपुर के आडावाल और आसपास के इलाकों में कंपन साफ तौर पर महसूस किया गया। कई लोग नींद से जाग गए और घबराहट में घरों से बाहर निकल आए। हालांकि, झटकों की अवधि बहुत कम थी, जिससे जान-माल के किसी नुकसान की सूचना नहीं है।

इतिहास दोहरा रहा है खुद को

एक समय था जब बस्तर और कोरापुट क्षेत्र को भूकंप मुक्त (Safe Zone) माना जाता था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में स्थितियां बदली हैं।


क्यों बार-बार कांप रही है छत्तीसगढ़ की धरती?

विशेषज्ञों के अनुसार, छत्तीसगढ़ अब पूरी तरह भूकंप से सुरक्षित नहीं रहा है। राज्य का वर्गीकरण दो मुख्य जोन में किया गया है:

  1. सीस्मिक जोन-2 (कम जोखिम): रायपुर, दुर्ग और बस्तर के अधिकांश हिस्से इसी जोन में आते हैं।
  2. सीस्मिक जोन-3 (मध्यम जोखिम): राज्य का उत्तरी हिस्सा जैसे सरगुजा, रायगढ़, कोरबा, कोरिया, जशपुर और जांजगीर-चांपा के कुछ इलाके इस श्रेणी में हैं। यहां भूकंप की तीव्रता $MSK \ VII$ तक हो सकती है।

माइनिंग और मानवीय हस्तक्षेप का असर

भू-गर्भ शास्त्रियों और जानकारों का मानना है कि सरगुजा और आसपास के इलाकों में सघन माइनिंग (Mining) की गतिविधियां धरती की आंतरिक परतों को संवेदनशील बना रही हैं। कोयला खदानों में होने वाले ब्लास्ट और जमीन के नीचे होने वाले खाली स्थानों के कारण ‘इंड्यूस्ड सीस्मिसिटी’ (Induced Seismicity) का खतरा बढ़ जाता है। यही कारण है कि अब उन इलाकों में भी झटके महसूस हो रहे हैं जिन्हें पहले सुरक्षित माना जाता था।

प्रशासन की अपील

प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि भूकंप महसूस होने पर घबराएं नहीं और खुले स्थानों की ओर जाएं। हालांकि इस बार तीव्रता कम होने से बड़ा नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन बार-बार आ रहे ये झटके भविष्य के लिए एक सतर्क रहने का संकेत हैं।


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