Pension Restoration Update: भारत सरकार के कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय ने पेंशन के संकुचित हिस्से (Commutation) की बहाली को लेकर एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी किया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि पेंशन बहाली की 15 साल की वर्तमान समय सीमा में बदलाव का निर्णय पूरी तरह से सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है।
पेंशन बहाली पर क्या है सरकार का रुख?
भारतीय डाक पेंशनभोगी संघ (BPPS) द्वारा बहाली की अवधि कम करने की मांग के जवाब में मंत्रालय ने निम्नलिखित जानकारी साझा की है:
- Pay Commissions का प्रभाव: पेंशन बहाली की अवधि और इसके टेबल में कोई भी संशोधन केंद्रीय वेतन आयोगों (Central Pay Commissions) की सिफारिशों का परिणाम होता है।
- सुप्रीम कोर्ट का फैसला: सरकार ने 1986 के “Common Cause” मामले का हवाला दिया, जिसमें कोर्ट ने 15 वर्षों के बाद पेंशन बहाली को उचित ठहराया था।
- DoPPW की भूमिका: मंत्रालय ने बताया कि पेंशन नियमों का मसौदा तैयार करने का काम Department (विभाग) करता है, लेकिन बहाली की अवधि तय करना इसके दायरे में नहीं है।
अदालतों के हालिया आदेश (Legal Context)
मंत्रालय ने दिल्ली, पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालयों के विभिन्न आदेशों का विश्लेषण किया है। कई मामलों में अदालतों ने यह माना है कि पेंशन बहाली की अवधि तय करना एक Policy (नीतिगत) मामला है, जिसे सरकार को ही तय करना चाहिए। वर्तमान में 15 साल की अवधि के बाद ही पेंशन का पूरा हिस्सा बहाल किया जाता है।
यह समाचार भारत सरकार के कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के आधिकारिक पत्र (फा. स. 4/1/2025-P&PW(D)-Part(2)/E-10640) दिनांक 20.03.2026 पर आधारित है। chaturpost.com सरकारी दस्तावेजों और न्यायिक आदेशों के आधार पर विश्वसनीय रिपोर्टिंग सुनिश्चित करता है।

