
रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले (Liquor Scam) की जांच कर रही एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) और आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने एक और बड़ी कामयाबी हासिल की है। एजेंसी ने प्रदेश की दो बड़ी डिस्टिलरी से उन 16 वाहनों को ज़ब्त किया है, जिनका उपयोग कथित तौर पर अवैध ‘पार्ट-B’ शराब के परिवहन के लिए किया जाता था।
कहां-कहां हुई कार्रवाई?
जांच एजेंसी ने बिलासपुर जिले के कोटा स्थित वेलकम डिस्टिलरी और मुंगेली जिले के सरगांव स्थित भाटिया वाइंस डिस्टिलरी पर दबिश देकर यह कार्रवाई की है। डिजिटल साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर दोनों डिस्टिलरी से 8-8 वाहन (कुल 16) चिन्हित कर ज़ब्त किए गए हैं। इसके अलावा केडिया डिस्टिलरी में भी निजी गाड़ियों के इस्तेमाल को लेकर जांच तेज कर दी गई है।
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क्या है ‘पार्ट-B’ शराब का पूरा खेल?
शराब घोटाले में ‘पार्ट-B’ शराब वह सबसे बड़ा जरिया था जिससे सरकारी खजाने को चूना लगाया गया।
- यह शराब सरकारी देसी दुकानों पर ही बेची जाती थी।
- फर्क सिर्फ इतना था कि इसकी बिक्री का पैसा सरकारी खाते में जमा होने के बजाय सीधे ‘सिंडिकेट’ की जेब में जाता था।
- एजेंसी के अनुसार, इन ज़ब्त वाहनों के जरिए डिस्टिलरी से सीधे चुनिंदा सरकारी दुकानों तक अवैध शराब पहुंचाई जाती थी।
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भरोसेमंद कर्मचारियों के नाम पर खरीदी गई थीं गाड़ियाँ
विवेचना में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि इस अवैध नेटवर्क को सुरक्षित रखने के लिए डिस्टिलरी मालिकों ने अपनी कंपनियों, कर्मचारियों और कुछ बेहद भरोसेमंद करीबियों के नाम पर ये गाड़ियाँ खरीदी थीं। जांच में पाया गया कि कुछ निर्धारित गाड़ियों का ही बार-बार अवैध परिवहन के लिए इस्तेमाल किया जाता था।
कई रसूखदार पहले ही जा चुके हैं जेल
बता दें कि इस मामले में अपराध क्रमांक 04/2024 के तहत भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और धोखाधड़ी की विभिन्न धाराओं में जांच जारी है। इस घोटाले में पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा, निरंजन दास और कारोबारी अनवर ढेबर समेत कई रसूखदार अधिकारी और नेता पहले ही सलाखों के पीछे जा चुके हैं। फिलहाल ईडी (ED) और सीबीआई (CBI) भी इस मामले के अलग-अलग पहलुओं की जांच कर रही हैं।







