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Power Sector निजीकरण के विरोध में शक्ति प्रदर्शन की तैयारी: छत्‍तीसगढ़ में बिजली बंद..आंदोलन की अपील

Power Sector  रायपुर। देशभर में पावर सेक्‍टर के निजीकरण का मुद्दा गरमाया हुआ है। उत्‍तर प्रदेश में इसके खिलाफ लगातार आंदोलन चल रहा है। इधर, छत्‍तीसगढ़ में भी निजीकरण के विरोध की रणनीति बनने लगी है।  

मजदूर संघ इंटक के सुधीर नायक ने विद्युत सेक्‍टर में सेवारत लोगों के लिए एक संदेश जारी किया है। उन्‍होंने कहा कि  दीपावली पर्व निकल गया दीपोत्सव का पर्व का सीधा-सीधा बिजली का पर्व निकल गया, अब निजीकरण के विरुद्ध आंदोलन जो  डेढ़ वर्ष से अधिक समय से निरंतर चल रहा है। जिसमें आप हम सबको निहित शक्ति परीक्षण की मुख्य आवश्यकता है, तब हमें संपूर्ण प्रदेश में निर्णय लेकर कम से कम 1 घंटा अंधेरे में रखना ही होगा।

Power Sector बिजली बंद की अपील

श्री नायक ने कहा कि एक घंटा पूरे प्रदेश में बंद बिजली, बंद बिजली, बिजली बंद का नारा बुलंद होना चाहिए। एक डेट और समय निर्धारित कर पूरे प्रदेश को अंधकार में डालकर अपनी शक्ति का हमें स्वयं भी परीक्षण करना चाहिए। इससे शासन प्रशासन और केंद्र में बैठी हुई सत्ता जो कुछ भी नियम कानून बनाकर एक तरफा विद्युत के संस्थान को बेचना चाहती है, पूंजीपतियों को आने-पौने दाम में विद्युत के संस्थानों को बेचना और सौंपना चाहती है,  विद्युत के संस्थान का निजीकरण करना चाहती है तथा पूंजी पत्तियों के उद्योगपतियों के पक्ष में जाकर अच्छे हरे भरे फलते फूलते शासकीय की विद्युत के संस्थान को,,उन्हें सपना चाहती है बेचना चाहती है, इसके विरोध में हमें विद्युत का प्रवाह 1 घंटे के लिए बंद कर अपनी शक्ति का परिचय देना ही होगा।

उत्‍तर प्रदेश में सालभर से चल रहा है आंदोलन

उत्‍तर प्रदेश में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले करीब सालभर से आंदोलन चल रहा है। समिति ने अब चेतावनी दी है कि यदि जबरन – निजीकरण का टेंडर जारी किया गया तो प्रदेशभर के बिजली कर्मी सामूहिक जेल भरो आंदोलन – प्रारंभ करेंगे। समिति ने कहा कि इस आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी विद्युत प्रबंधन की होगी।

Power Sector टेंडर जारी करने की तैयारी

 समिति के अनुसार, पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण की प्रक्रिया गोपनीय रखे जाने की खबरों से बिजली कर्मियों में जबरदस्त आक्रोश है। बताया गया है कि निगमों को पांच हिस्सों में बांटकर पांच अलग-अलग टेंडर जारी किए जाएंगे। कंपनियों को आरएफपी डॉक्यूमेंट देखने के  लिए पांच लाख रुपये जमा करने होंगे और यह – शपथ पत्र देना होगा कि दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किए जाएंगे। समिति ने आरोप लगाया कि यह पूरी प्रक्रिया ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोसिएशन के सहयोग से चलाई जा रही है।  

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