
न्यूज डेस्क: आज के डिजिटल युग में, हर कोई इंटरनेट पर अपनी पहचान बनाना चाहता है। स्मार्टफोन और सस्ते इंटरनेट ने हर किसी को कंटेंट क्रिएटर बना दिया है। आम जनता से लेकर सरकारी कर्मचारी तक, सभी Social Media Platforms पर अपनी दिनचर्या साझा कर रहे हैं। लेकिन, भारतीय रेलवे (Indian Railways) के कर्मचारियों के लिए यह शौक अब एक बड़ी मुसीबत बन सकता है। पूर्वोत्तर रेलवे के वाराणसी मंडल ने एक बेहद सख्त आदेश जारी किया है, जिसके तहत ड्यूटी के दौरान वीडियो या रील्स बनाने वाले Railway Employees पर गाज गिरना तय है।
अगर आप भी रेलवे में काम करते हैं और यूट्यूब (YouTube) या इंस्टाग्राम (Instagram) पर व्लॉगिंग (Vlogging) का शौक रखते हैं, तो यह खबर आपके लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है।
सर्कुलर में क्या है खास? (Details of the Official Order)
हाल ही में पूर्वोत्तर रेलवे (North Eastern Railway), वाराणसी मंडल के कार्यालय से एक आधिकारिक पत्र (chaturpost.com इस पत्र की पुष्टि नहीं करता है) जारी हुआ है। यह सर्कुलर दिनांक 29.06.2026 को जारी किया गया है। सोशल मीडिया में वायरल हो रहे लेटर के अनुसार, सतर्कता कार्यालय (Vigilance Office) गोरखपुर को लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ रेल कर्मचारी ड्यूटी के दौरान गंभीर लापरवाही बरत रहे हैं।
Consequently (परिणामस्वरूप), प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया है। पत्र में स्टेशन डायरेक्टर, सभी यातायात निरीक्षक, स्टेशन अधीक्षक, स्टेशन मास्टर, ट्रेन मैनेजर और मुख्य नियंत्रक को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि कार्यस्थलों, उपकरणों और रेलवे प्रणालियों से संबंधित वीडियो बनाना पूरी तरह से प्रतिबंधित है।
सुरक्षा और संरक्षा पर मंडराता खतरा (Safety and Security Concerns)
रेलवे एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ एक सेकंड की भी चूक किसी बड़े हादसे (Major Accident) का कारण बन सकती है। Furthermore (इसके अलावा), जब कोई कर्मचारी ड्यूटी के दौरान अपने मोबाइल कैमरे पर ध्यान केंद्रित करता है, तो उसका ध्यान अपने मूल काम से हट जाता है।
लोको पायलट (Loco Pilot), स्टेशन मास्टर (Station Master) या ट्रैकमैन (Trackman) का काम अत्यधिक जिम्मेदारी वाला होता है। ऐसे में, रेलवे परिसर (Railway Premises) और कंट्रोल पैनल के वीडियो इंटरनेट पर अपलोड करने से न केवल Safety and Security प्रभावित होती है, बल्कि यह रेलवे की गोपनीय जानकारी (Confidential Information) को भी सार्वजनिक कर देता है, जिसका गलत इस्तेमाल हो सकता है। प्रशासन ने माना है कि इन Viral Videos के कारण परिचालन की सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
आर्थिक लाभ कमाना पड़ा भारी (The Issue of Monetization)
इस सर्कुलर में एक और बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया गया है। पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि, “यह भी देखा गया है कि ऐसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से कुछ मामलों में आर्थिक लाभ (Financial Benefit) भी अर्जित किया जा रहा है।”
आजकल यूट्यूब और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म्स Monetization की सुविधा देते हैं, जिससे व्यूज (Views) के आधार पर पैसे मिलते हैं। Moreover (इसके अतिरिक्त), कई रेल कर्मचारी अपनी सरकारी ड्यूटी के समय का उपयोग अपने निजी चैनल को प्रमोट करने और पैसे कमाने के लिए कर रहे थे। सरकारी नियमों के अनुसार, कोई भी कर्मचारी सरकार की अनुमति के बिना किसी अन्य स्रोत से इस तरह का व्यवसाय या आर्थिक लाभ प्राप्त नहीं कर सकता है। यह सीधे तौर पर सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन है।
आचरण नियम 1966 का हवाला (Railway Service Conduct Rules)
इस आदेश को लागू करने के लिए रेलवे प्रशासन ने Railway Service (Conduct) Rules, 1966 के नियम 11 और नियम 15 का सख्त हवाला दिया है। आइए सरल भाषा में समझते हैं कि ये नियम क्या कहते हैं:
- नियम 11 (Rule 11): यह नियम सरकारी कर्मचारियों को किसी भी अनधिकृत व्यक्ति या प्लेटफॉर्म के साथ आधिकारिक जानकारी, दस्तावेज या कार्यप्रणाली साझा करने से रोकता है। ड्यूटी के दौरान के वीडियो इंटरनेट पर डालना इसी नियम का सीधा उल्लंघन माना गया है।
- नियम 15 (Rule 15): यह नियम किसी भी सरकारी कर्मचारी को बिना पूर्व स्वीकृति के किसी भी निजी व्यापार, रोजगार या आर्थिक लाभ देने वाले कार्य (जैसे YouTube से पैसा कमाना) में शामिल होने से रोकता है।
यदि नियम तोड़े तो क्या होगा? (Impact and Actions)
रेलवे अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि यह आदेश केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगा। यदि कोई भी Railway Employee इन नियमों की अनदेखी करता पाया गया, तो उसके खिलाफ कड़ी Disciplinary Action (अनुशासनिक कार्यवाही) की जाएगी।
इस कार्यवाही के तहत कर्मचारी का निलंबन (Suspension), वेतन वृद्धि (Increment) रोकना, या गंभीर मामलों में नौकरी से बर्खास्तगी (Dismissal) भी शामिल हो सकती है। प्रशासन ने सभी संबंधित अधिकारियों को इस आदेश का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
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चतुर विचार
डिजिटल दुनिया का आकर्षण अपनी जगह है, लेकिन जब बात लाखों यात्रियों की सुरक्षा और एक सरकारी कर्मचारी की पेशेवर जिम्मेदारी (Professional Responsibility) की आती है, तो कोई समझौता नहीं किया जा सकता। पूर्वोत्तर रेलवे का यह कदम एक नजीर बनेगा और उम्मीद है कि जल्द ही भारतीय रेलवे के अन्य जोन (Zones) भी ऐसे ही सख्त कदम उठाएंगे। रेलवे कर्मचारियों को अब समझ लेना चाहिए कि ड्यूटी का समय जनता की सेवा के लिए है, न कि सोशल मीडिया पर लाइक्स और शेयर्स बटोरने के लिए।








