
नवा रायपुर / बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले की हाई-प्रोफाइल सीतापुर विधानसभा सीट (ST) से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक पूर्व सैनिक रामकुमार टोप्पो की विधायकी को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा आधिकारिक दस्तावेज़ सामने आया है। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के निर्देश पर छत्तीसगढ़ शासन द्वारा इस मामले में एक विशेष राजपत्र (Gazette Notification) प्रकाशित किया गया है।
यह राजपत्र छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर द्वारा विधायक रामकुमार टोप्पो के निर्वाचन को चुनौती देने वाली एक चुनाव याचिका पर सुनाए गए अंतिम फैसले से जुड़ा हुआ है। माननीय न्यायालय ने इस मामले में अपना फैसला देते हुए याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया है, जिससे भाजपा विधायक की विधायकी पर मंडरा रहा कानूनी खतरा हमेशा के लिए टल गया है।
आइए जानते हैं कि यह पूरा कानूनी विवाद क्या था, हाई कोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा और किसी अदालती फैसले को इस तरह सरकारी राजपत्र में क्यों प्रकाशित किया जाता है–
क्या था पूरा मामला और क्यों रद्द हुआ था नामांकन?
मामले की पृष्ठभूमि साल 2023 के छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव से जुड़ी हुई है। सीतापुर विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 11 से चुनाव लड़ने के लिए मुन्ना लाल टोप्पो नामक उम्मीदवार ने आम आदमी पार्टी (AAP) की ओर से अपना नामांकन पत्र दाखिल किया था।
नामांकन पत्रों की स्क्रूटनी (जांच) के दौरान 31 अक्टूबर 2023 को एक अन्य उम्मीदवार राम कुमार किंदो ने रिटर्निंग ऑफिसर के समक्ष लिखित आपत्ति दर्ज कराई। आपत्ति में दावा किया गया कि मुन्ना लाल टोप्पो लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) में एक पंजीकृत सरकारी ठेकेदार हैं और वर्तमान में उनके पास ‘जल जीवन मिशन’ के तहत कई सक्रिय सरकारी ठेके (Contracts) हैं।
रिटर्निंग ऑफिसर ने तत्काल इस पर PHE विभाग के कार्यपालन अभियंता से तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी। विभाग ने पुष्टि की कि मुन्ना लाल टोप्पो के नाम पर कई सरकारी अनुबंध जीवित (Subsisting Contracts) हैं और उन पर काम प्रगति पर है। इसके बाद, रिटर्निंग ऑफिसर ने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 9A (सरकारी अनुबंधों के कारण अयोग्यता) के तहत मुन्ना लाल टोप्पो का नामांकन पत्र खारिज कर दिया। बाद में इस सीट पर हुए चुनाव में भाजपा के पूर्व सैनिक रामकुमार टोप्पो ने शानदार जीत दर्ज की।
हाई कोर्ट पहुंचे मुन्ना लाल टोप्पो, लेकिन अपनी ही दलील में उलझे
नामांकन रद्द होने से असंतुष्ट होकर मुन्ना लाल टोप्पो ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर में एक चुनाव याचिका (Election Petition No. 1/2024) दायर कर रामकुमार टोप्पो के निर्वाचन को शून्य घोषित करने की मांग की। याचिकाकर्ता की दलील थी कि उनका अनुबंध सीधे राज्य सरकार के साथ नहीं बल्कि ‘जिला जल एवं स्वच्छता मिशन’ के साथ था, जो “समुचित सरकार” की परिभाषा में नहीं आता, इसलिए उनका नामांकन गलत तरीके से खारिज किया गया।
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मामले की विस्तृत सुनवाई हाई कोर्ट के माननीय न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय के. अग्रवाल की एकल पीठ (Single Bench) में हुई। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता का खुद का कबूलनामा ही उन पर भारी पड़ गया।
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया कि याचिकाकर्ता मुन्ना लाल टोप्पो ने स्वयं अपने नामांकन पत्र के कॉलम नंबर 7 और अपने शपथ पत्र (Affidavit) के कॉलम 9B में यह लिखित रूप से स्वीकार किया था कि उनके पास सरकार के साथ जल जीवन मिशन के तहत जीवित और सक्रिय अनुबंध हैं। भारतीय साक्ष्य अधिनियम के तहत खुद की गई यह लिखित स्वीकारोक्ति सबसे बड़ा और ठोस सबूत बनी। अदालत ने माना कि याचिकाकर्ता यह साबित करने में पूरी तरह विफल रहे कि यह अनुबंध सरकार के दायरे से बाहर था। इसी के साथ हाई कोर्ट ने रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले को सही ठहराते हुए याचिका को खारिज कर दिया।
जानें राजपत्र (Gazette) में क्यों प्रकाशित हुआ कोर्ट का यह फैसला?
अक्सर आम जनता और पाठकों के मन में यह सवाल उठता है कि जब हाई कोर्ट ने अप्रैल में ही याचिका खारिज कर दी थी, तो अब इसे शासकीय राजपत्र में क्यों छापा गया है?
दरअसल, यह देश की लोकतांत्रिक और चुनावी व्यवस्था का एक अनिवार्य कानूनी नियम है। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 106 के तहत यह प्रावधान है कि जब भी उच्च न्यायालय किसी चुनाव याचिका पर अपना अंतिम आदेश या फैसला सुनाता है, तो भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के लिए यह आवश्यक होता है कि वह उस आदेश को संबंधित राज्य के आधिकारिक शासकीय राजपत्र (Government Gazette) में सर्वसाधारण की जानकारी हेतु प्रकाशित करवाए।
इसी कानूनी प्रक्रिया के तहत:
- 17 अप्रैल 2026 को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने इस पर अपना अंतिम फैसला सुनाया।
- 06 मई 2026 को भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली के सचिव द्वारा इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई।
- 03 जून 2026 को मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय, रायपुर के माध्यम से इसे छत्तीसगढ़ राजपत्र (असाधारण) में सर्वसाधारण के लिए विधिवत प्रकाशित किया गया।
इस राजपत्र प्रकाशन का सीधा और साफ मतलब यह है कि सीतापुर के भाजपा विधायक पूर्व सैनिक रामकुमार टोप्पो के खिलाफ चल रहा यह कानूनी विवाद अब आधिकारिक रूप से हमेशा के लिए बंद (Closed) हो चुका है और उनका निर्वाचन पूरी तरह वैध और सुरक्षित है।
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