
Vacation rules रायपुर। छत्तीसगढ़ सिविल सेवाएं (अवकाश) नियम, 2010 को दिनांक 01 अक्टूबर, 2010 से लागू किया गया है। समय-समय पर संदर्भित वित्त निर्देशों के माध्यम से अवकाश नियमों में संशोधन और नए प्रावधान शामिल किए गए हैं। समस्त संशोधनों और प्रावधानों को नियमों के पालन में सुगमता के दृष्टिगत समेकित निर्देश जारी किए जा रहे हैं।
छत्तीसगढ़ सिविल सेवाएं (अवकाश) नियम,
2. छत्तीसगढ़ सिविल सेवाएं (अवकाश) नियम, 2010 के नियम 25 के अंतर्गत अर्जित अवकाश संचय की अधिकतम सीमा 300 दिन और नियम 25 (3) में, एक समय में अर्जित अवकाश स्वीकृत करने की अधिकतम सीमा 180 दिन निर्धारित है। अपरिहार्य परिस्थितियों में ही 180 दिन से अधिक अवधि के अवकाश प्रकरण वित्त विभाग को प्रेषित किया जाए।
अर्धवेतन अवकाश
3. नियम 28-अर्धवेतन अवकाश (half pay leave) की पात्रता प्रत्येक पूर्ण वर्ष के लिए 20 दिन निर्धारित है जिसे अर्जित अवकाश के समान ही वर्ष में दो बार 01 जनवरी और 01 जुलाई को 10-10 दिन अग्रिम अर्धवेतन अवकाश खाते में जमा किया जाएगा। अवकाश लेखे को इन सीमाओं का ध्यान रखते हुए नियमित रूप से अद्यतन रखने की आवश्यकता है।
लघुकृत अवकाश
4. नियम 29 लघुकृत अवकाश (shortened leave) किसी शासकीय सेवक को, केवल चिकित्सा प्रमाणपत्र के आधार पर, अर्धवेत्तन अवकाश के आधे से अधिक लघुकृत अवकाश स्वीकृत नहीं किया जा सकता है. देय अर्धवेतन अवकाश के विरुद्ध, ऐसे अवकाश की दुगुनी संख्या विकलित की जाएगी।
मेडिकल सर्टिफिकेट जरुरी
संपूर्ण सेवा अवधि में अधिकतम 180 दिनों तक का अर्धवेतन अवकाश (चिकित्सा प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए बिना) लघुकृत अवकाश में परिवर्तित करने की अनुमति दी जा सकती है. जहां ऐसे अवकाश का उपयोग किसी ऐसे अनुमोदित पाठ्यक्रम के अध्ययन के लिए हो जिसे अवकाश स्वीकृत करने के लिए प्राधिकारी की तरफ से लोकहित में होना प्रमाणित किया गया हो।
जहां शासकीय सेवक जिसे लघुकृत अवकाश स्वीकृत किया गया है, सेवा से त्यागपत्र देता है अथवा उसे उसके निवेदन पर सेवा में वापस लौटे बिना स्वैच्छिक सेवानिवृत्त होने की अनुमति दी जाती है, के लघुकृत अवकाश को अर्धवेतन अवकाश के समान समझा जाएगा और लघुकृत अवकाश व अर्धवेतन अवकाश के संबंध में अवकाश वेतन के मध्य के अंतर की वसूली की जाएगी।
लेकिन ऐसी वसूली नहीं की जाएगी, यदि सेवानिवृत्ति शासकीय सेवक की अस्वस्थता के कारण आगे की सेवा के लिए अनुपयुक्त होने के फलस्वरूप हुई हो अथवा उसकी मृत्यु हो गई हो।
अदेय अवकाश
5. नियम 30 अदेय (unpaid) अवकाश (1) अदेय अवकाश उस अर्धवेतन अवकाश तक सीमित होगा जो उसके द्वारा भविष्य में अर्जित किया जाना संभावित है। किसी शासकीय सेवक को संपूर्ण सेवाकाल में अदेय अवकाश अधिकतम 360 दिनों तक स्वीकृत किया जा सकता है। एक समय में अधिकत्तम 90 दिन और कुल 180 दिनों तक अदेय अवकाश बिना चिकित्सा प्रमाण पत्र के स्वीकृत किया जा सकता है।
यदि शासकीय सेवक, सेवा से त्यागपत्र देता है या उसे उसके निवेदन पर सेवा में वापस लौटे बिना स्वैच्छिक सेवानिवृत्त होने की अनुमति दी जाती है, तो उसका अदेय अवकाश निरस्त कर दिया जाएगा, उसका त्यागपत्र अथवा सेवानिवृत्ति उस तिथि से प्रभावशील मानी जाएगी जिस तिथि से ऐसा अवकाश प्रारंभ हुआ था और अवकाश वेतन की वसूली की जाएगी।
अवकाश वेतन की वसूली नहीं की जाएगी, यदि शासकीय सेवक की सेवानिवृत्ति अस्वस्थता के कारण आगे की सेवा के लिए अनुपयुक्त होने के फलस्वरूप हुई हो अथवा उसकी मृत्यु हो गई हो।
Vacation rules असाधारण अवकाश
6. नियम 31 असाधारण अवकाश (Extraordinary holidays) जब कोई अन्य प्रकार का अवकाश स्वीकार्य न हो. अथवा जब कोई अन्य प्रकार का अवकाश स्वीकार्य हो, लेकिन शासकीय सेवक असाधारण अवकाश स्वीकृत करने के लिए लिखित आवेदन दे, असाधारण अवकाश स्वीकृत किया जा सकता है। स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए उसकी सूचना की अवधि के दौरान शासकीय सेवक को असाधारण अवकाश स्वीकृत नहीं किया जाएगा।
असाधारण अवकाश, अवकाश लेखा में विकलित नहीं किया जाएगा।
प्रसूति अवकाश
7. ‘नियम 38-प्रसूति अवकाश 180 दिवस स्वीकृति के प्रावधान है। “नियम 38 के उप-नियम (1) के अनुसार किसी महिला शासकीय सेवक जिसकी दो से कम जीवित संताने है, को ‘180’ दिन तक की अवधि के लिए प्रसूति अवकाश स्वीकृत किया जा सकता है। अवकाश अवधि में गर्भावस्था की अवधि और प्रसूति का दिन भी शामिल होंगे, लेकिन ऐसा अवकाश प्रसूति की तिथि से 180 दिन की पश्चातवर्ती किसी अवधि के लिए स्वीकृत नहीं किया जाएगा। ऐसी अवधि में वह उस वेतन के समतुल्य अवकाश वेतन की पात्र होगी, जो उसने अवकाश पर प्रस्थान करने के ठीक पहले आहरित किया है।”
8. नियम 14 अवकाश लेखा प्रत्येक शासकीय सेवक का अवकाश लेखा कार्यालय प्रमुख करेंगे।
9. कर्त्तव्य से अधिकतम अनुपस्थिति अवधि के लिए विभिन्न नियमों में निम्नानुसार प्रावधान
3 (1) मूलभूत नियम-18 जब तक कि राज्यपाल मामले की विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अन्यथा विनिश्चित न करें, किसी भी शासकीय सेवक को लगातार तीन वर्ष से अधिक अवधि का किसी भी प्रकार अवकाश स्वीकृत नहीं किया जाएगा।
(2) अवकाश नियम-11 कर्तव्य से अनुपस्थित अवधि
(1) शासकीय सेवक को तीन वर्ष से अधिक निरंतर अवधि के लिए किसी प्रकार का अवकाश स्वीकृत नहीं किया जाएगा।
(2) कोई शासकीय सेवक अवकाश सहित या बिना अवकाश के, बाह्य सेवा से भिन्न, तीन वर्ष से अधिक निरंतर अवधि के लिए कर्तव्य से अनुपस्थित रहता है तो उसे शासकीय सेवा से त्यागपत्र दिया हुआ समझा जाएगा जब तक कि राज्यपाल, प्रकरण की आपवादिक परिस्थितियों को देखते हुए अन्यथा विनिश्चित न करें: लेकिन उप-नियम (2) के प्रावधानों को लागू करने के पूर्व उस शासकीय सेवक को ऐसी अनुपस्थिति के कारणों को स्पष्ट करने हेतु युक्तियुक्त अवसर दिया जाएगा।
(3) आचरण नियम-7 कोई भी शासकीय सेवक अवकाश (आकस्मिक अथवा अन्य) पर उसके स्वीकृत हो जाने के पूर्व प्रगमन नहीं करेगा, परन्तु आपाती दशा में अवकाश स्वीकार करने के लिए समक्ष प्राधिकारी उन कारणों से जो लेखबद्ध किए जायेंगे पहले ही उठाये गए अवकाश को, भूतलक्षी स्वीकृति दे सकेगा।
उपरोक्त उद्धरणों से स्पष्ट है कि इन नियमों के अनुसार कर्तव्य से अधिकतम अनुपस्थिति की अवधि तीन वर्ष हो सकती है, इससे अधिक अनुपस्थिति के लिए राज्यपाल की स्वीकृति आवश्यक होगी। राज्यपाल का अधिकार मंत्रि-परिषद् को प्रत्यायोजित है। एक माह से अधिक अवधि के अनाधिकृत अनुपस्थिति के मामले में तत्परता से विभागीय कार्यवाही की जाए और उचित दण्ड अधिरोपित किया जाए।
10. नियम 13 अवकाश के लिए आवेदन इस नियम के उप-नियम (1) संतान पालन अवकाश को छोड़कर, अवकाश अथवा अवकाश में वृद्धि के लिए आवेदन प्रस्तुत किया जाना चाहिए और संतान पालन अवकाश अथवा अवकाश में वृद्धि के लिए आवेदन, सक्षम प्राधिकारी को ऐसे अवकाश अथवा अवकाश में वृद्धि स्वीकृत करने के लिए प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
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11. नियम 38-ग. संतान पालन अवकाशः महिला शासकीय सेवक को उनके 18 वर्ष से कम उम्र के 2 ज्येष्ठ जीवित संतानों के पालन-पोषण के लिए सम्पूर्ण सेवाकाल में अधिकतम 730 दिन की कालावधि के लिए संतान पालन अवकाश स्वीकृत किया जाएगा। इस अवकाश के संबंध में मुख्य बिन्दु निम्नानुसार होंगे –
(1) यह अवकाश एक कैलेण्डर वर्ष में तीन बार से अधिक स्वीकृत नहीं किया जाएगा।
(2) किसी एक अवसर के लिए अवकाश की कोई अधिकतम सीमा नहीं होगी, जबकि न्यूनतम सीमा 5 दिन की होगी।
(3) स्वीकृति के लिए संतान पालन अवकाश अर्जित अवकाश के समान मानी जाएगी और उसी प्रकार से स्वीकृत की जाएगी। इस अवकाश के लिए तीन सप्ताह पूर्व आवेदन प्रस्तुत करना होगा। यद्यपि विशेष परिस्थितियों में 10 दिन से कम अवधि के अवकाश स्वीकृति के लिए तीन सप्ताह की सीमा शिथिल की जा सकेगी।
(4) संतान पालन अवकाश, अवकाश लेखा के विरूद्ध विकलित नहीं किया जाएगा और अवकाश नियम के अंतर्गत लागू किसी अन्य अवकाश के साथ संयोजित किया जा सकेगा।
(5) अवकाश अवधि के लिए, अवकाश में प्रस्थान करने के ठीक पूर्व लागू दर से अवकाश वेतन की पात्रता होगी।
(6) संतान पालन अवकाश के समय केवल जन्म प्रमाण पत्र की आवश्यकता होगी, आवेदक को आवेदन पत्र के कालम 10 पर आवेदित अवकाश का स्पष्ट कारण अंकित करना होगा। यह अवकाश बच्चे के पालन-पोषण अथवा उसके विशिष्ट आवश्यकताओं जैसे कि परीक्षा, बीमारी इत्यादि के लिए स्वीकृत किया जा सकेगा।
(7) संतान पालन अवकाश का दावा अधिकार के रूप में नहीं किया जा सकेगा, लेकिन सामान्यतः कार्यालय का सुचारू संचालन सुनिश्चित करते हुए स्वीकृतकर्ता अधिकारी की तरफ से यह अवकाश स्वीकृत किया जाएगा। किसी भी परिस्थिति में विधिवत अवकाश स्वीकृत होने के पश्चात् ही महिला शासकीय सेवक द्वारा अवकाश पर प्रस्थान किया जाएगा।
(8) अवकाश के पहले या बाद में पड़ने वाले राजपत्रित या साप्ताहिक अवकाश स्वयमेव अवकाश के साथ संयोजित माने जाएंगे और अवकाश अवधि में पड़ने वाले ऐसे अवकाश संतान पालन अवकाश की गणना में शामिल किए जाएंगे।
(9) संतान पालन अवकाश लेखा का संधारण निम्न प्रपत्र में किया जाएगाः-
टीप:-
1. प्रत्यायोजन की सीमा एक बार में स्वीकृत किए जाने वाले अवकाश के लिए है, खंड-खंड में स्वीकृत अवकाश के लिए नहीं।
2. प्रत्यायोजित अधिकार छत्तीसगढ़ सिविल सेवाएं (अवकाश) नियम, 2010 के नियम-11 की सीमा के अधीन होगी, जिसके अन्तर्गत सभी प्रकार के अवकाशों को शामिल करते हुए एक समय में स्वीकृत योग्य अवकाश की अधिकतम सीमा तीन वर्ष है।
3. विभागाध्यक्ष और कार्यालय प्रमुख के स्वयं के प्रकरण, संबंधित पद के नियंत्रण अधिकारियों द्वारा निराकृत किए जाएंगे।
4. यह आदेश न्यायालयों की व्यवस्था पर लागू नहीं होंगे।
13. विभागों से अपेक्षा है कि अवकाश नियम का विधिवत पालन किया जाये ताकि शासकीय सेवकों के अवकाश स्वीकृति के प्रकरणों में किसी भी प्रकार की विसंगति न हो और लंबे समय तक अवकाश स्वीकृति के प्रकरणों के लंबित रहने के कारण शासकीय सेवकों को उनके स्वत्वों के निराकरण के संबंध में कठिनाई का सामना न करना पड़े। विभागों से यह भी अपेक्षा है कि वे समय-समय पर उनके विभाग के अंतर्गत लंबित अवकाश के प्रकरणों की समीक्षा भी करे ताकि प्रकरणों का त्वरित निराकरण हो सके। 12. छत्तीसगढ़ सिविल सेवाएं (अवकाश) नियम, 2010 के नियम 41 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रत्यायोजन निम्नानुसार प्रभावशील है:-







