
न्यूज डेस्क। Chaturpost। बिजली के स्मार्ट मीटर को लेकर एक बड़ी खबर है। उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (Uttar Pradesh Electricity Regulatory Commission – UPERC) ने स्मार्ट मीटर को लेकर चल रही मनमानी पर रोक लगाते हुए एक ऐतिहासिक और बेहद कड़ा आदेश जारी किया है.
आयोग ने साफ कर दिया है कि राज्य में स्मार्ट मीटर (Smart Meter UP) लगाना भले ही अनिवार्य हो, लेकिन उपभोक्ताओं पर जबरन प्रीपेड मोड (Prepayment Mode) थोपा नहीं जा सकता. यह पूरी तरह से कंज्यूमर की चॉइस (Consumer’s Choice) यानी उपभोक्ता की इच्छा पर निर्भर करेगा कि वह अपने मीटर को प्रीपेड रखना चाहता है या पोस्टपेड।
विद्युत कंपनियों द्वारा नियमों की गलत व्याख्या (Incorrect Interpretation) करने पर आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है और यूपी पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) समेत तमाम डिस्कॉम को तत्काल प्रभाव से नियमों का पालन करने की सख्त हिदायत दी है। आइए इस नए आदेश और इससे मिलने वाली बड़ी राहत को आसान भाषा में विस्तार से समझते हैं।
क्यों जारी करना पड़ा नया आदेश? जानिए इनसाइड स्टोरी
दरअसल, उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) के सचिव सुमीत कुमार अग्रवाल की ओर से 29 मई 2026 को यूपी पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के प्रबंध निदेशक (Managing Director) को एक आधिकारिक पत्र भेजा गया है. इस पत्र का मुख्य विषय कॉस्ट डेटा बुक (Cost Data Book) के नियमों की गलत व्याख्या को सुधारना है।
बिजली कंपनियां आरडीएसएस योजना (RDSS Scheme) के तहत एडवांस मीटरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विस प्रोवाइडर्स (AMISPs) के जरिए धड़ाधड़ नए स्मार्ट मीटर इंस्टॉल करवा रही हैं. इस प्रक्रिया के दौरान उपभोक्ताओं को यह कहकर डराया जा रहा था कि अब सिर्फ प्रीपेड मोड ही चलेगा और इसके लिए उन्हें मजबूर किया जा रहा था। जब यह मामला आयोग के पास पहुंचा, तो आयोग ने कानूनी प्रावधानों (Applicable Legal Provisions) का हवाला देते हुए स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया।
कानून क्या कहता है? उपभोक्ता के सबसे बड़े 3 अधिकार
आयोग ने अपने आदेश में विद्युत अधिनियम, 2003 (Electricity Act, 2003) और केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के नियमों को सामने रखकर बिजली कंपनियों की बोलती बंद कर दी है:
- विद्युत अधिनियम की धारा 47(5): यह नियम साफ कहता है कि यदि कोई व्यक्ति प्रीपेड मीटर (Pre-payment Meter) के जरिए बिजली की सप्लाई लेने के लिए तैयार है, तो वितरण लाइसेंसधारी (Distribution Licensee) यानी बिजली कंपनी उससे किसी भी प्रकार की सिक्योरिटी राशि (Security Deposit) की मांग नहीं कर सकती।
- CEA अमेंडमेंट रेगुलेशन 2026: केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के ‘मीटरों की स्थापना और संचालन’ संशोधन नियम 2026 के तहत संचार नेटवर्क वाले क्षेत्रों में स्मार्ट मीटर लगाना जरूरी है, लेकिन यह नियम भी किसी विशेष पेमेंट मोड (Prepaid or Postpaid) को अनिवार्य नहीं बनाता।
- कंज्यूमर प्रोटेक्शन रूल्स 2020: बिजली (उपभोक्ताओं के अधिकार) नियम, 2020 के तहत स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने की बात तो है, लेकिन आयोग के पास इसमें ढील देने और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने की पूरी शक्ति सुरक्षित है।
सिक्योरिटी डिपॉजिट (Security Deposit) को लेकर आया नया नियम
आयोग ने कॉस्ट डेटा बुक (Cost Data Book) के अध्याय-4 ‘सुरक्षा’ (Security) का हवाला देते हुए प्रीपेड और पोस्टपेड दोनों मोड के लिए सिक्योरिटी अमाउंट (Security Amount) की स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है:
- प्रीपेड मीटर पर कोई सिक्योरिटी नहीं: यदि उपभोक्ता का कनेक्शन प्रीपेड स्मार्ट मीटर (Pre-paid Mode) के जरिए चल रहा है, तो उससे कोई भी सिक्योरिटी डिपॉजिट नहीं लिया जाएगा।
- पोस्टपेड से प्रीपेड में बदलने पर रिफंड: यदि किसी उपभोक्ता का पुराना पोस्टपेड कनेक्शन है और वह उसे प्रीपेड मोड में कंवर्ट (Convert) करवाता है, तो बिजली कंपनी को उसकी पहले से जमा सिक्योरिटी राशि को उसके बकाया बिल में एडजस्ट करना होगा या आने वाले बिलों में क्रेडिट (Pass-on the Credit) के रूप में देना होगा।
इन सभी बिजली कंपनियों को कड़ाई से पालन करने का निर्देश
UPERC ने इस आदेश की कॉपियां उत्तर प्रदेश की सभी प्रमुख विद्युत वितरण कंपनियों (Discoms) के प्रबंध निदेशकों को भेज दी हैं, ताकि वे अपने स्तर पर चल रही मनमानी को तुरंत रोक सकें:
- पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (PuVVNL)
- मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (MVVNL)
- दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (DVVNL)
- पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (PVVNL)
- कानपुर विद्युत आपूर्ति कंपनी (KESCO)
- नोएडा पावर कंपनी लिमिटेड (NPCL) और टोरेंट पावर लिमिटेड
इन सभी कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि वे जमीनी स्तर पर काम कर रही निजी एजेंसियों (AMISPs) को नियंत्रित करें और उपभोक्ताओं को उनकी मर्जी के अनुसार प्रीपेड या पोस्टपेड मोड चुनने की पूरी आजादी दें।
उपभोक्ता अब क्या करें? (What Should Consumers Do?)
अगर आपके इलाके में बिजली कर्मचारी या ठेकेदार के लोग आकर आपको जबरन प्रीपेड मीटर लगवाने के लिए मजबूर करते हैं, तो आप उन्हें उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के इस ताजा आदेश का हवाला दे सकते हैं।
काम की बात: आप साफ तौर पर कह सकते हैं कि स्मार्ट मीटर (Smart Meter UP) लगाना कानूनी रूप से सही है, लेकिन उसे प्रीपेड रखना है या पोस्टपेड, इसका अंतिम फैसला सिर्फ और सिर्फ आपका है। यदि कोई अधिकारी आपकी बात नहीं सुनता है, तो आप विद्युत उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम (CGRF) में इसकी लिखित शिकायत भी दर्ज करा सकते हैं।
FAQs: स्मार्ट मीटर आदेश से जुड़े आपके जरूरी सवाल और जवाब
उत्तर: हाँ, CEA रेगुलेशन 2026 के तहत संचार नेटवर्क वाले क्षेत्रों में स्मार्ट मीटर लगाना अनिवार्य किया गया है, ताकि रीड़िंग और बिलिंग सटीक हो सके।
उत्तर: बिल्कुल नहीं। UPERC के ताजा आदेश के अनुसार, प्रीपेड या पोस्टपेड मोड का चयन पूरी तरह से उपभोक्ता की पसंद (Consumer’s Choice) पर निर्भर करता है।
उत्तर: नहीं, इलेक्ट्रिसिटी एक्ट की धारा 47(5) और कॉस्ट डेटा बुक के अनुसार प्रीपेड मीटर कनेक्शन पर कोई सुरक्षा राशि (Security Charge) नहीं ली जाएगी।
उत्तर: आपकी पुरानी सुरक्षा निधि (Security Deposit) को बिजली कंपनी द्वारा आपके बकाया बिल में एडजस्ट किया जाएगा या आगे के बिलों में क्रेडिट के रूप में वापस दिया जाएगा।
उत्तर: उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) द्वारा यह महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण पत्र 29 मई 2026 को जारी किया गया है।
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