Tariff रायपुर। छत्तीसगढ़ की सरकारी बिजली वितरण कंपनी ने राज्य विद्युत नियामक आयोग को वित्तीय वर्ष 2025 26 के लिए जो टैरिफ का प्रस्ताव दिया है, उसमें कई कमियां हैं। बिजली कंपनी ने कुछ मामलों में पूरी जानकारी नहीं दी है। कंपनी के प्रस्ताव में कमियों को कंपनी के कर्मचारियों ने ही सार्वजिक किया है।
आयोग में बिजली कंपनियों के प्रस्तावों पर हुई जन सुनवाई के दौरान छत्तीसगढ़ विद्युत सेवानिवृत्त कर्मचारी अधिकारी महासंघ की ओर से पक्ष रखा गया। महासंघ के राष्ट्रीय महामंत्री अरुण देवांगन और सदस्य संजय चौधरी ने कर्मचारियों, पेंशनरों और जनता के हित में डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी में चल रही भर्राशाही और अराजकता की स्थिति को नियामक आयोग के अध्यक्ष श् हेमंत वर्मा, सदस्य अजय सिंह और विवेक गनोदवाले के समक्ष बात रखते हुए लिखित प्रतिवेदन सौंपा । इस दौरान आयोग के अध्यक्ष ने बताया कि स्टोर अग्निकांड और कर्मचारियों के दुर्घटना के संबंध में आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए कंपनी से जवाब तलब किया है ।
छत्तीसगढ़ बिजली वितरण कंपनी, प्रदेश सरकार के आधीन है और सरकारी कंपनी होने के नाते यह स्वतः स्पष्ट है कि यह कंपनी, भारत सरकार और छत्तीसगढ़ प्रदेश सरकार के द्वारा विभिन्न जन हितैषी योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए प्राप्त अरबों रूपये की का निवेश करने के साथ ही बिजली खरीद करते हुए प्रदेश की जनता को 24×7 सस्ती और गुणवत्तापूर्ण बिजली प्रदाय के लिए जिम्मेदार है । स्पष्ट रूप से यह कहना पूरी तरह उचित होगा कि केन्द्र व राज्य सरकार के द्वारा आवंटित निधि, जनता से ही प्राप्त होती है । अतः बिजली वितरण कंपनी, सीधे तौर पर जनता के प्रति जवाबदेह है ।
कंपनी ने अपनी याचिका में वितरण हानि में आयोग की तरफ से तय लक्ष्य 15.33% से भी अधिक 17.42% लाया जाना बताया गया है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि वास्तविक हानि कितने प्रतिशत है । इसी तरह बिजली वितरण कंपनी ने बिजली खरीदी में आयोग की स्वीकृत औसत दर 3.81 रुपए प्रति यूनिट से काफी अधिक 4.53 रुपए प्रति यूनिट टूअप में औसत खरीद दर बताया गया है, जांच का विषय है।
कंपनी ने अपनी याचिका में वार्षिक राजस्व की आवश्यकता में संचारण और संधारण मद के अंतर्गत कर्मचारी व्यय के लिए अनुमोदित राशि 1,308.04 करोड की तुलना में मात्र 1,168.50 करोड़ टू अप बताते हुए इसमें 139.54 रुपए की कमी बताई गई है जिसका कोई कारण उल्लेखित नहीं है। संगठन यह स्पष्ट करना चाहता है कि कंपनी के पास अविरल और गुणवत्तापूर्ण बिजली व्यवस्था बनाए रखने के लिए कुशल कर्मचारियों की भारी कमी है, पिछले वर्षों में बड़ी संख्या में कुशल कार्यालयीन / तकनीकी कर्मचारी सेवानिवृत्त हुए हैं लेकिन इनके स्थान पर नई भरती की कोई योजना या दूरदर्शिता नहीं होने से अमले में बहुत ज्यादा अंतर विद्यमान है, कर्मचारी आंकड़ों को बहुत ही चतुराईपूर्ण ढंग से याचिका में स्थान नहीं दिया गया है
महासंघ के प्रतिनिधियों ने कहा कि प्रति वर्ष सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारियों (इंजीनियरों) की रिक्त संख्या के अनुरूप शत प्रतिशत नई भर्ती की जाती है लेकिन कर्मचारियों के रिक्त 50 प्रतिशत से अधिक पदों पर कोई भर्ती नहीं की गई है। गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति की व्यववस्था को ठेकेदारों के भरोसे छोड दिया गया है क्योंकि नियमित अनुभवी, कुशल व उच्च कुशल कर्मचारियों की तुलना में आज आउटसोर्स कर्मचारियों की संख्या लगभग तीन गुनी से भी ज्यादा हो सकता है जिसे याचिका में उल्लेख नहीं किया गया है ।
कार्यालयों, सबस्टेशनों, उपभोक्ता सेवा फ्यूज काल, मेन्टेनेन्स, रिडिंग, बिल कलेक्शन जैसे सभी मूलभूत कार्य 10 से 15 हजार रूपये देकर आउटसोर्स / ठेका कर्मचारियों से कराया जा रहा है ऐसे में विद्युत आपूर्ति व उपभोक्ता सेवा कार्यों में संतुष्टिकारक गुणवत्ता आना संभव नहीं हैं और यही कारण है कि कार्यालय और मैदानी क्षेत्र में कुशल नियमित कर्मचारी के अभाव में आये दिन सिमित संख्या में कार्य कर रहे कर्मचारियों को जन आकोश का सामना करना पड रहा है।
हम आयोग के संज्ञान में लाना चाहेंगे कि कंपनी की कोई भर्ती की नीति नहीं होने, कुशल कर्मचारियों की भारी कमी होने, ठेका आउटसोर्स को वैकल्पिक व्यवस्था मान लेने से बिजली वितरण कंपनी कर्मचारी लागत में कमी का दावा कर रही है लेकिन जनता के प्रति जवाबदेही के महत्त्वपूर्ण उत्तरदायित्व से मुंह मोड़ रही है।
याचिका में पेंशन व उपादान में अनुमोदित राशि 768.40 करोड के स्थान पर दू अप में 895.21 करोड बताते हुए 126.81 करोड का आधिक्य व्यय बताया गया है जो कि इस बात का द्योतक है कि बीते वर्ष में सेवानिवृत्त होने वालों की संख्या में काफी अधिक बढ़ोतरी हुई है जिसे पिछले याचिका में युक्तियुक्त आंकडे कंपनी द्वारा बताया नहीं गया था ।
कंपनी ने अपनी याचिका में कुल सकल राजस्व आवश्यकता के लिए अनुमोदित 17,228.31 करोड़ की तुलना में टू अप में 23,079.22 करोड़ बताते हुए 5,9470.15 का आधिक्य व्यय होना कंपनी के वित्तीय अनुशासन की पोल खोलने के लिए पर्याप्त उदाहरण है। वर्ष 2023-24 के लिए आयोग से 5.564.93 करोड़ राजस्व कमी के अनुमोदन का अनुरोध किया गया है, इतनी भारी भरकम राजस्व राशि की कमी कंपनी के कुप्रबंधन एवं वित्तीय अकुशलता को दर्शाने के लिए पर्याप्त है ।
वर्ष 2025-26 के लिए संचारण एवं संधारण व्यय मद अंतर्गत पूर्व टू अप 1,168.50 के विरूद्ध कुल कर्मचारी लागत 1,307.57 करोड, कुल सेवानिवृत्ति लाभ (पेंशन और ग्रेज्यूटी) में पूर्व टूअप राशि 895.21 के विरूद्ध 950.27 करोड़ की मांग कंपनी द्वारा की गई है जो कि अत्यल्प वृद्धि होने से अस्वीकारणीय प्रतीत होता है । महासंघ के प्रतिनिधियों ने कहा कि कर्मचारी व्यय में पर्याप्त वुद्धि न होने का सीधा सा अर्थ है कि कंपनी आज भी विद्युत सेवा कार्य को भगवान भरोसे छोडना चाहती है अर्थात उसकी कोई नीति नहीं है सिवाय ठेकेदारों / मैन पावर सप्लायरों को उपकृत करने के।
पेंशन एवं ग्रेच्युटी मद में भी अति न्यून मांग दर्शाया जाना प्रबंधन की लगभग 16 हजार पेंशनरों के प्रति जिम्मेदारी से मुंह मोडने जैसा है। प्रबंधन और पेंशन ट्रस्ट द्वारा बाह्य विशेषज्ञों के माध्यम से पेंशनरों को निर्विध्न पेंशन प्रदान करने के लिए ट्र्स्ट के लिए आवश्यक राशि से बहुत कम राशि ट्रस्ट के कोष में है। आयोग द्वारा पिछले वर्षों में जो राशि अनुमोदित करते हुए बिजली कंपनियों से प्रति माह ट्रस्ट में जमा करने के लिए जो निर्देश जारी किए गए हैं उसमें भी कंपनी हीला हवाला करते आ रही है नियमित तौर पर अंशदान का भुगतान नहीं किया जाता । देने का नामजद आदेश दो किश्तों में जारी किया गया है इस पर भी आयोग संज्ञान ले तथा पुराना पेंशन का लाभ सभी कर्मचारियों को दिये जाने के लिए निर्देशित करें ।