
Vishwaranjan रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) विश्वरंजन का 8 मार्च 2026 को निधन हो गया है। लंबे समय से बीमार चल रहे विश्वरंजन पटना का मेदांता में इलाज चल रहा था। विश्वरंजन छत्तीसगढ़ के छठवें डीजीपी थे।
कठिन दौर में बने डीजीपी
विश्वरंजन 1973 बैच के आईपीएस थे। 2007 में उन्हें छत्तीसगढ़ का डीजीपी बनाया गया था, तब वे दिल्ली में आईबी में पदस्थ थे। छत्तीसगढ़ के तत्कालीन डीजीपी ओपी राठौर की अचानक हुई मौत के बाद सरकार ने विश्वरंजन को दिल्ली से बुलाकर राज्य पुलिस की कमान सौंपी थी।
गया में हुआ था जन्म
विश्वरंजन का जन्म 1 अप्रैल 1952 को बिहार के गया में हुआ था। वे पुलिस अफसर के साथ कवि और साहित्यकार भी थे।
पुलिसिंग में कई बदलाव
विश्वरंजन के कार्यकाल में नक्सल मोर्चे से लेकर प्रदेश की पुलिसिंग सिस्टम में बड़ा बदलाव आया। खुफिया तंत्र को मजबूत करने और पुलिस के आधुनिकीकरण की भी शुरुआत विश्वरंजन के कार्यकाल में हुई।
नक्सलवाद के खिलाफ बड़ी जंग
विश्वरंजन को जब प्रदेश पुलिस की कमान सौंपी गई तब राज्य में नक्सलवाद चरम पर पहुंच गया था। ऐसे समय में विश्वरंजन ने नक्सलियों के खिलाफ बड़ी जंग शुरू की। विश्वरंजन के कार्यकाल में बस्तर मे बड़ी घटनाएं हुईं, लेकिन नक्सलियों के शहरी नेटवर्क को तोड़ने के साथ ही अर्बन नक्सलियों के चेहरे भी उजगार हुए।
नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई की बदली रणनीति
विश्वरंजन के कार्यकाल में न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि देश के दूसरे राज्यों में भी नक्सलवाद के खिलाफ जंग की रणनीति बदली गई। नक्सलियों के खिलाफ आक्रामक अभियान के लिए प्रभावित क्षेत्रों में केंद्रीय फोर्स की तैनाती बढ़ाई गई।
पुलिस अफसर के साथ साहित्यकार
विश्वरंजन पुलिस अफसर के साथ साहित्यकार और कवि भी थे। स्वपन का होना जरुरी और एक नई पूरी सुबह समेत कुछ और काव्य संग्रह का प्रकाशन हुआ है।
फिराक गोरखपुरी के नाती
विश्वरंजन प्रसिद्ध शायर फिराक गोरखपुरी यानी रघुपति सहाय के नाती थे। साहित्य और कविता उन्हें विरासत में मिली थी।
पटना में बनाया था ठिकाना
विश्वरंजन चार साल तक छत्तीसगढ़ के डीजीपी रहे। रिटायरमेंट के करीब सालभर पहले सरकार ने उन्हें डीजीपी के पद से हटाकर होमगार्ड की जिम्मेदारी दे दी थी। रिटायरमेंट के बाद विश्वरंजन कुछ समय तक रायपुर में रहने के बाद पटना चले गए।




