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EXPLAINER: क्या है पार्ट-B शराब? छत्तीसगढ़ के 2000 करोड़ के घोटाले का वो ‘सीक्रेट’ जो आपको जानना चाहिए

Khabar

छत्तीसगढ़ के कथित 2000 करोड़ के शराब घोटाले में ‘पार्ट-B’ (Part-B) शब्द बार-बार सामने आ रहा है। सामान्य पाठक के लिए यह समझना जरूरी है कि आखिर यह तकनीक क्या थी जिसने सरकारी सिस्टम के भीतर ही एक ‘समानांतर अर्थव्यवस्था’ खड़ी कर दी थी।

1. क्या है ‘पार्ट-B’ शराब?

आसान भाषा में कहें तो ‘पार्ट-B’ वह शराब है जो वैध डिस्टिलरी (शराब बनाने वाली फैक्ट्री) में ही बनती थी, लेकिन इसे सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया जाता था।

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2. कैसे होता था यह पूरा खेल? (स्टेप-बाय-स्टेप)

जांच एजेंसियों (ED/ACB/EOW) के अनुसार, इस सिंडिकेट ने एक पूरा नेटवर्क तैयार किया था:

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3. सरकारी खजाने को कैसे लगी चपत?

नॉर्मल शराब बिकने पर उसका पैसा सरकार के पास जाता है जिससे विकास कार्य होते हैं। लेकिन ‘पार्ट-B’ शराब की बिक्री का 100% पैसा सीधा सिंडिकेट और उससे जुड़े रसूखदारों की जेब में गया। इसमें न तो आबकारी ड्यूटी मिली और न ही बिक्री का मुनाफा सरकार तक पहुँचा।

4. क्यों नहीं पकड़ी गई यह चोरी?

जांच में यह सामने आया है कि इस सिंडिकेट में आबकारी विभाग के बड़े अधिकारी (जैसे तत्कालीन एमडी और सचिव) खुद शामिल थे। जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं, तो दुकानों की चेकिंग करने वाला कोई नहीं बचा। अधिकारियों ने ही डिस्टिलरी मालिकों और ट्रांसपोर्टरों को इस अवैध काम के लिए ‘प्रोटेक्शन’ दे रखा था।

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शराब घोटाला: सिंडिकेट के 4 प्रमुख स्तंभ

1. अनिल टुटेजा (पूर्व IAS अधिकारी)

2. अनवर ढेबर (रायपुर के रसूखदार कारोबारी)

3. निरंजन दास (पूर्व MD, CSMCL)

4. अरुणपति त्रिपाठी (पूर्व आबकारी अधिकारी/ITS)


घोटाले की ‘चेन’ कैसे काम करती थी?

  1. डिस्टिलरी: वेलकम, भाटिया और केडिया जैसी डिस्टिलरी से अवैध शराब (Part-B) बनवाई गई।
  2. होलोग्राम: प्रिज्म होलोग्राफी कंपनी के जरिए नकली होलोग्राम छपवाए गए।
  3. ट्रांसपोर्ट: जैसा कि हाल ही में 16 गाड़ियां ज़ब्त हुई हैं, इन निजी वाहनों से शराब सीधे दुकानों तक गई।
  4. दुकानें: प्लेसमेंट एजेंसियों के कर्मचारियों ने इस शराब को बिना बिल के बेचा।
  5. संग्रहण: सारा कैश अनवर ढेबर और उनके साथियों तक पहुँचा, जिसे बाद में रसूखदारों में बांट दिया गया।
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