
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2023 के बाद अब निर्वाचन आयोग उन प्रत्याशियों पर सख्त कार्रवाई कर रहा है, जिन्होंने चुनावी खर्च का ब्यौरा देने में लापरवाही बरती है। ताजा मामले में बेमेतरा (निर्वाचन क्षेत्र क्रमांक-69) से चुनाव लड़ चुके अभ्यर्थी गिरधारी लाल देवांगन को आयोग ने अपात्र घोषित कर दिया है।
आयोग द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, अब गिरधारी लाल देवांगन अगले तीन वर्षों तक किसी भी स्तर का चुनाव नहीं लड़ सकेंगे।
क्यों हुई यह कार्रवाई?
निर्वाचन आयोग के नियमों के मुताबिक, हर प्रत्याशी को चुनाव परिणाम आने के एक निश्चित समय के भीतर अपने निर्वाचन व्यय (चुनावी खर्च) का पूरा लेखा-जोखा दाखिल करना अनिवार्य होता है। गिरधारी लाल देवांगन निर्वाचन व्ययों का लेखा दाखिल न करने या निर्धारित रीति के अनुसार विवरण प्रस्तुत करने में असफल रहे। इसी चूक के कारण आयोग ने उन्हें लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत निरर्हित (Disqualified) घोषित किया है।
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सूची में और भी बड़े नाम: पाटन और दुर्ग के प्रत्याशी भी बैन
आयोग की यह कार्रवाई केवल बेमेतरा तक सीमित नहीं है। दिसंबर 2023 के विधानसभा चुनाव के बाद से अब तक कुल 5 लोगों पर गाज गिर चुकी है। आयोग ने अलग-अलग आदेश जारी कर निम्नलिखित नेताओं को भी 3 साल के लिए अपात्र किया है:
- अजय चंद्राकर (पाटन): दुर्ग जिले की हाई-प्रोफाइल सीट पाटन से चुनाव लड़ने वाले अजय चंद्राकर भी खर्च का हिसाब न देने के कारण अपात्र हुए हैं।
- धर्मेन्द्र (भिलाई नगर): भिलाई नगर विधानसभा से 2023 में किस्मत आजमाने वाले धर्मेन्द्र पर भी चुनाव लड़ने की रोक है।
- वर्षा रितु यादव और संजय दुबे (दुर्ग शहर): दुर्ग शहर से चुनाव लड़ने वाले इन दोनों अभ्यर्थियों को भी इसी सूची में शामिल किया गया है।
क्या होगा इन नेताओं पर असर?
आयोग के इस आदेश की तारीख से अगले तीन वर्षों की कालावधि के लिए ये सभी नेता किसी भी निर्वाचित पद के लिए दावेदारी नहीं कर पाएंगे। इसका मतलब है कि आगामी स्थानीय निकाय चुनाव या अन्य किसी भी उपचुनाव में ये अपनी किस्मत नहीं आजमा सकेंगे।
| अभ्यर्थी का नाम | विधानसभा क्षेत्र | कार्रवाई / स्थिति |
|---|---|---|
| गिरधारी लाल देवांगन | बेमेतरा (69) | 3 साल के लिए अपात्र |
| अजय चंद्राकर | पाटन (दुर्ग) | चुनाव लड़ने पर रोक |
| धर्मेन्द्र | भिलाई नगर | 3 साल के लिए बैन |
| वर्षा रितु यादव | दुर्ग शहर | अपात्र घोषित |
| संजय दुबे | दुर्ग शहर | 3 साल की रोक |
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निर्वाचन आयोग का सख्त संदेश
इस कार्रवाई के जरिए आयोग ने सभी राजनीतिक दलों और निर्दलीय प्रत्याशियों को सख्त संदेश दिया है कि चुनावी पारदर्शिता के साथ समझौता नहीं किया जाएगा। निर्वाचन व्यय का लेखा-जोखा जमा करना केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि कानूनी अनिवार्यता है।







