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छत्तीसगढ़ में बुजुर्गों का बड़ा अपमान? मुख्य सचिव से मिलने तरस रहे Chhattisgarh Pensioners, महीनों बाद भी नहीं मिला समय!

रायपुर (chaturpost.com)। छत्तीसगढ़ के लाखों सेवानिवृत्त कर्मचारियों और बुजुर्गों के स्वाभिमान को लेकर एक बड़ा विवाद (Controversy) खड़ा हो गया है। राज्य के विकास में अपनी पूरी जिंदगी खपाने वाले वरिष्ठ नागरिक अपनी जायज मांगों को लेकर शासन के सर्वोच्च अधिकारी के दरवाजे पर दस्तक दे रहे हैं, लेकिन उन्हें निराशा हाथ लग रही है। भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ छत्तीसगढ़ के प्रांताध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव ने राज्य प्रशासन के मुखिया यानी मुख्य सचिव (Chief Secretary) पर छत्तीसगढ़ पेंशनर्स (Chhattisgarh Pensioners) की उपेक्षा करने का गंभीर आरोप लगाया है।

प्रांताध्यक्ष नामदेव के मुताबिक, नए मुख्य सचिव के पदभार ग्रहण करने के बाद से ही महासंघ लगातार पत्राचार (Official Correspondence) कर रहा है। पेंशनरों की कई लंबित और जटिल समस्याओं पर चर्चा करने के लिए महीनों से शिष्टमंडल (Delegation) से मुलाकात का समय मांगा जा रहा है। बेहद अफसोसजनक स्थिति है कि कई महीनों के लगातार प्रयास और रिमाइंडर भेजने के बावजूद, प्रदेश के इन वरिष्ठ नागरिकों और रिटायर्ड अधिकारियों-कर्मचारियों को मुख्य सचिव से मिलने का एक छोटा सा अवसर भी नहीं मिल पाया है।

😡 विचारधारा के बाद भी अनदेखी: महासंघ का फूटा दर्द

महासंघ के प्रदेश महामंत्री द्वय अनिल गोल्हानी एवं प्रवीण कुमार त्रिवेदी ने इस पूरे मामले पर गहरी चिंता और नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका संगठन एक राष्ट्रवादी विचारधारा (Nationalist Ideology) से प्रेरित है। भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ का मुख्य उद्देश्य राजनीति करना नहीं, बल्कि प्रदेश के लाखों बुजुर्गों और वरिष्ठ नागरिकों की जायज समस्याओं को राज्य प्रशासन के सर्वोच्च स्तर पर उठाना है।

महासंघ के नेताओं का मानना है कि पेंशनर्स से जुड़े अनेक ऐसे जटिल और पुराने मामले (Pending Pension Issues) हैं, जिनका त्वरित निराकरण (Quick Resolution) केवल और केवल मुख्य सचिव के सीधे हस्तक्षेप और उनके प्रशासनिक मार्गदर्शन से ही संभव है। जब प्रशासन का मुखिया ही संवाद के रास्ते बंद कर देगा, तो बुजुर्ग अपनी गुहार लेकर कहाँ जाएंगे?

🛑 CS ऑफिस का जवाब: “वित्त सचिव से मिलिए”

इस प्रशासनिक गतिरोध (Administrative Deadlock) के बीच हाल ही में मुख्य सचिव कार्यालय (Chief Secretary Office) से महासंघ को एक पत्र और जानकारी प्राप्त हुई है। 4 जून को दी गई इस आधिकारिक सूचना के बाद पेंशनरों में आक्रोश और बढ़ गया है।

मुख्य सचिव कार्यालय का संदेश: “मुख्य सचिव ने पेंशनर्स महासंघ के आवेदन को वित्त सचिव (Finance Secretary) के पास फॉरवर्ड कर दिया है। पेंशन से जुड़े तमाम विषयों और वित्तीय मामलों पर चर्चा करने का अधिकार केवल वित्त सचिव को है, इसलिए प्रतिनिधिमंडल उनसे ही मुलाकात करे।”

इस जवाब पर प्रतिक्रिया देते हुए महासंघ के पदाधिकारियों ने कहा कि वे वित्त सचिव से संवाद (Dialogue) करने का स्वागत करते हैं। वित्तीय और तकनीकी मुद्दों पर उनसे बात होनी ही चाहिए, लेकिन राज्य प्रशासन के प्रशासनिक मुखिया (Administrative Head) होने के नाते मुख्य सचिव से भी वरिष्ठ नागरिकों की मुलाकात बेहद आवश्यक है।

पेंशनरों की समस्याएं केवल एक विभाग तक सीमित नहीं होती हैं। अलग-अलग विभागों (Different Departments) से संबंधित ग्रेच्युटी, मेडिकल अलाउंस, और एरियर जैसे कई समग्र मुद्दे होते हैं, जिन पर केवल मुख्य सचिव ही कोई नीतिगत फैसला (Policy Decision) ले सकते हैं।

📌 छत्तीसगढ़ पेंशनर्स महासंघ की प्रमुख मांगें (Key Demands)

  • महंगाई राहत (Dearness Relief – DR): मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ सरकार के बीच आपसी सहमति की बाध्यता के कारण पेंशनर्स की 4% से 8% तक की महंगाई राहत लंबे समय से अटकी रहती है।
  • सातवें वेतनमान का एरियर (7th Pay Commission Arrears): कई विभागों में रिटायर्ड कर्मचारियों को सातवें वेतनमान के एरियर का पूरा भुगतान अब तक नहीं हो पाया है।
  • पेंशनर कल्याण बोर्ड (Pensioners Welfare Board): राज्य में पेंशनरों की शिकायतों के त्वरित निपटारे के लिए एक स्वतंत्र कल्याण बोर्ड या ट्रिब्यूनल के गठन की मांग।
  • चिकित्सा भत्ता (Medical Allowance): बुजुर्गों की बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य समस्याओं को देखते हुए मासिक चिकित्सा भत्ते में सम्मानजनक बढ़ोतरी की आवश्यकता।

😢 “हम केवल संवाद का अवसर चाहते हैं” – टी. पी. सिंह

वरिष्ठ नागरिकों और जीवन के उत्तरार्ध में जी रहे बुजुर्गों की इस प्रशासनिक उपेक्षा पर महासंघ के प्रदेश संगठन मंत्री टी. पी. सिंह ने गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि एक सरकारी कर्मचारी अपनी पूरी जिंदगी, अपनी जवानी और अपनी ऊर्जा शासन-प्रशासन की सेवा (Public Service) में लगा देता है। रिटायरमेंट के बाद जब वह अपनी समस्याओं के समाधान के लिए भटकता है, तो उसे सिर्फ आश्वासन या उपेक्षा मिलती है।

टी. पी. सिंह ने मुख्य सचिव से सीधा आग्रह किया है कि वे एक सर्वोच्च लोकसेवक (Public Servant) हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता और कर्मचारियों से संवाद करना उनका बुनियादी कर्तव्य है। उन्हें तत्काल संवेदनशीलता दिखाते हुए Chhattisgarh Pensioners के प्रतिनिधिमंडल को मिलने का समय (Appointment) प्रदान करना चाहिए, ताकि एक सार्थक चर्चा के बाद आवश्यक दिशा-निर्देश (Guidelines) जारी किए जा सकें।

🤝 रायपुर संभाग को अब भी है सकारात्मक उम्मीद

इस पूरे विवाद और महीनों के इंतजार के बावजूद, पेंशनर्स महासंघ ने उम्मीद का दामन नहीं छोड़ा है। महासंघ के रायपुर संभाग के अध्यक्ष शैलेन्द्र सिन्हा तथा जिला रायपुर के अध्यक्ष आर जी बोहरे ने संयुक्त रूप से आशा व्यक्त की है।

उनका कहना है कि मुख्य सचिव एक बेहद अनुभवी और संवेदनशील प्रशासनिक अधिकारी हैं। संभवतः कार्यव्यस्तता के कारण अब तक समय नहीं मिल पाया होगा। अधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि खबर मीडिया में आने के बाद मुख्य सचिव शीघ्र ही प्रतिनिधिमंडल को भेंट का अवसर प्रदान करेंगे, जिससे प्रदेश के लाखों बुजुर्ग पेंशनरों को मानसिक और आर्थिक राहत मिल सके।

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S. J. Kumar

पत्रकारिता के क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव । सुदीर्घ करियर में राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। जटिल मुद्दों के सरल विश्लेषण और खोजी रिपोर्टिंग के साथ राजनीति, प्रशासन और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है। पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में Chaturpost.com में सेवाएं दे रहे हैं।
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