
रायपुर: छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी ने संविदा लाइनमैनों के लिए नई एचआर पॉलिसी (HR Policy) जारी की है । इस नीति में सेवा शर्तो के साथ-साथ कुछ ऐसे कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं, जिन्हें कर्मचारी संघ ‘सेंसरशिप’ (Censorship) के रूप में देख रहा है। विशेष रूप से नीति का नियम 18.2 चर्चा का विषय बना हुआ है ।
नियम 18.2: क्या है यह ‘गोपनीयता’ का घेरा?
पॉलिसी के नियम 18.2 में स्पष्ट उल्लेख है कि संविदा पर कार्यरत कर्मचारी सक्षम अधिकारी की पूर्वानुमति (Prior Permission) या निर्देश के बिना किसी भी माध्यम से किसी अन्य व्यक्ति या विभाग को कोई भी सूचना या जानकारी साझा नहीं करेंगे । इसे कार्यालयीन गोपनीयता (Official Secrecy) का उल्लंघन माना जाएगा । जानकारों का मानना है कि यह नियम कर्मचारियों को अपनी समस्याओं को सार्वजनिक करने या मीडिया से साझा करने से रोकने का एक तरीका हो सकता है।
प्रमुख नियम और सेवा शर्तें (Terms & Conditions)
नई नीति में संविदा अवधि और कार्य मूल्यांकन (Performance Evaluation) को लेकर भी कड़े प्रावधान हैं:
- सीमित संविदा अवधि: संविदा नियुक्ति शुरुआत में अधिकतम 3 वर्ष के लिए होगी ।
- सालाना परीक्षा: 10 साल की सेवा के बाद, हर साल कार्य मूल्यांकन के आधार पर केवल 1-1 साल की ही सेवा वृद्धि (Service Extension) की जा सकेगी ।
- अन्य काम पर रोक: सेवा अवधि के दौरान कर्मचारी किसी अन्य संस्थान या कार्यालय में कार्य नहीं कर सकेंगे ।
- ट्रांसफर की तलवार: संविदा कर्मियों को आवश्यकतानुसार राज्य के किसी भी क्षेत्र में स्थानांतरित (Transfer) किया जा सकेगा ।
कर्मचारियों में डर की वजह
अफसरों की ‘तानाशाही’ को मिलेगी ताकत (Power to Bureaucracy)
इस नियम के लागू होने के बाद, यदि फील्ड में किसी कर्मचारी के साथ कोई अधिकारी अभद्र व्यवहार करता है, तो वह इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं कर पाएगा।
- ट्रांजिशन पॉइंट (Point of Conflict): कंपनी इसे ‘गोपनीयता’ (Confidentiality) कह रही है, जबकि कर्मचारी इसे ‘दमन’ (Suppression) मान रहे हैं।
सुरक्षा खामियों को उजागर करना होगा मुश्किल
लाइनमैन का काम सबसे जोखिम भरा (Hazardous) होता है। यदि फील्ड में सुरक्षा उपकरणों (Safety Gear) की कमी है या घटिया स्तर के उपकरण दिए जा रहे हैं, तो कर्मचारी इसकी शिकायत सार्वजनिक मंचों पर नहीं कर पाएगा।
- डर: जानकारी बाहर लीक (Leaked) होने पर नौकरी से हाथ धोना पड़ सकता है।
क्या कहते हैं नियम?
| नियम संख्या | लिखित प्रावधान | संभावित छिपा हुआ अर्थ |
| 18.2 | बिना अनुमति जानकारी देना प्रतिबंधित | भ्रष्टाचार या दुर्व्यवहार को दबाने का हथियार |
| 18.4 | अधिकारियों द्वारा सौंपे गए ‘समस्त’ कार्य करने होंगे | पद के बाहर के व्यक्तिगत काम कराने की छूट |
कर्मचारी संघ का आक्रोश: “यह शोषण की पराकाष्ठा है”कर्मचारी संघ का पक्ष: “संविधान के खिलाफ है यह शर्त”
विद्युत संविदा कर्मचारी संघ का मानना है कि यह नियम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (Freedom of Speech) के संवैधानिक अधिकार का हनन है। संघ का कहना है कि “हम कर्मचारी हैं, गुलाम नहीं।” यदि शोषण (Harassment) के खिलाफ बोलने पर पाबंदी होगी, तो कार्यस्थल पर असुरक्षा बढ़ेगी।
छत्तीसगढ़ विद्युत संविदा कर्मचारी संघ ने इस नीति का पुरजोर विरोध किया है। संघ के महामंत्री कमलेश भारद्वाज का कहना है कि:
- नियमितीकरण की अनदेखी: 10 साल की सेवा के बाद समायोजन (Adjustment) के बजाय कड़े नियमों के साथ सेवा वृद्धि करना गलत है।
- सुरक्षा से समझौता: नियमानुसार जो परमिट (Permit) नियमित अधिकारियों को देना चाहिए, वह अब 7 साल के अनुभवी संविदा कर्मियों से कराने की योजना है ।
- दुरुपयोग का डर: अफसरों द्वारा 24 घंटे काम लेने और दुर्घटना (Accident) होने पर सारा दोष कर्मचारियों पर मढ़ने की आशंका है।
पॉवर कंपनी ने जहाँ इसे प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण की ओर कदम बताया है, वहीं कर्मचारी इसे अपनी आवाज दबाने और शोषण का हथियार मान रहे हैं। आने वाले दिनों में यह विवाद आंदोलन (Protest) का रूप ले सकता है।







