
रायपुर। पश्चिम बंगाल के कल्याणी स्थित विधानचंद्र कृषि विश्वविद्यालय के सभा कक्ष में राष्ट्रीय राज्य कर्मचारी महासंघ (Rashtriya Rajya Karmachari Mahasangh) की अखिल भारतीय कार्यसमिति बैठक का भव्य आयोजन संपन्न हुआ। इस राष्ट्रीय बैठक में देशभर के अलग-अलग राज्यों से आए प्रतिनिधिमंडलों ने शिरकत की और अपने-अपने राज्यों के कर्मचारियों की ज्वलंत समस्याओं व मांगों को मजबूती से रखा।
बैठक में छत्तीसगढ़ राज्य का प्रतिनिधित्व करते हुए कर्मचारी नेताओं ने प्रदेश के लाखों अधिकारियों व कर्मचारियों के हितों से जुड़ी 7 प्रमुख मांगों का खाका पेश किया। छत्तीसगढ़ राज्य कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष अश्वनी कुमार चेलक ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इस राष्ट्रीय बैठक की विस्तृत जानकारी मीडिया से साझा की है।
छत्तीसगढ़ से दिग्गज कर्मचारी नेताओं की सहभागिता
कल्याणी (पश्चिम बंगाल) में आयोजित इस राष्ट्रीय कार्यसमिति में छत्तीसगढ़ से राज्य कर्मचारी संघ का एक मजबूत प्रतिनिधिमंडल शामिल हुआ। इसमें प्रमुख रूप से:
- राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव (राष्ट्रीय महामंत्री, राष्ट्रीय राज्य कर्मचारी महासंघ)
- अश्वनी कुमार चेलक (प्रदेश अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ राज्य कर्मचारी संघ)
- बोधी राम निषाद (प्रदेश महामंत्री, छत्तीसगढ़ राज्य कर्मचारी संघ)
- अमोद श्रीवास्तव (वरिष्ठ नेता)
- मनी राम (वरिष्ठ प्रतिनिधि)
बैठक के दौरान छत्तीसगढ़ राज्य कर्मचारी संघ के प्रदेश महामंत्री बोधी राम निषाद ने वृत्त निवेदन (रिपोर्ट) प्रस्तुत करते हुए राज्य के कर्मचारियों की लंबित मांगों को राष्ट्रीय मंच पर प्रमुखता से उठाया।
छत्तीसगढ़ की 7 प्रमुख मांगें: 8वां वेतन आयोग और OPS सबसे ऊपर
छत्तीसगढ़ प्रतिनिधिमंडल द्वारा राष्ट्रीय कार्यसमिति के समक्ष रखी गई मांगों में कर्मचारियों के वित्तीय व प्रशासनिक हितों को प्राथमिकता दी गई। प्रदेश महामंत्री बोधी राम निषाद ने वृत्त निवेदन (रिपोर्ट) प्रस्तुत करते हुए निम्नलिखित 7 मुख्य मांगें राष्ट्रीय मंच पर रखीं:
- केंद्र के समान देय तिथि से महंगाई भत्ता (DA) लागू हो: राज्य के कर्मचारियों को केंद्र सरकार की तर्ज पर देय तिथि से ही महंगाई भत्ता स्वीकृत और लागू किया जाए।
- आठवें वेतन आयोग की कार्यवाही शीघ्र पूर्ण हो: देश में 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के गठन और उसे जल्द से जल्द लागू करने की प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी की जाए।
- प्रशासनिक न्यायाधिकरण (SAT) की स्थापना: छत्तीसगढ़ प्रदेश में कर्मचारियों के सेवा संबंधी मामलों और विवादों के त्वरित समाधान के लिए प्रशासनिक न्यायाधिकरण की स्थापना की जाए।
- 25 वर्षों की सेवा पर पूर्ण पेंशन का लाभ: कर्मचारियों को 25 वर्ष की अर्हता सेवा पूर्ण कर लेने पर ही पूर्ण पेंशन का लाभ प्रदान किया जाए।
- पुरानी पेंशन योजना (OPS) लागू किया जावे: कर्मचारियों के भविष्य और सेवानिवृत्ति के बाद की वित्तीय सुरक्षा के लिए पुरानी पेंशन योजना को पूर्ण रूप से लागू रखा जाए।
- वेतन विसंगति का अतिशीघ्र निराकरण: समस्त सरकारी विभागों में व्याप्त वेतन विसंगतियों (Pay Anomalies) को दूर करने के लिए अतिशीघ्र ठोस कदम उठाए जाएं।
- कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा का क्रियान्वयन: राज्य के कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए कैशलेस इलाज (Cashless Medical Facility) की सुविधा को तुरंत धरातल पर लागू किया जाए।
देशभर के राज्यों ने रखा अपना रिपोर्ट कार्ड
विधानचंद्र कृषि विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित इस अखिल भारतीय बैठक में केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि देश के कई प्रमुख राज्यों के प्रतिनिधिमंडलों ने अपने-अपने राज्यों के कर्मचारियों की समस्याओं पर वृत्त प्रस्तुत किया।
बैठक में उत्तर प्रदेश, केरल, ओडिशा, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, और अंडमान निकोबार द्वीप समूह के कर्मचारी प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सभी राज्यों के प्रतिनिधियों ने सामूहिक रूप से यह संकल्प लिया कि कर्मचारियों की मांगों को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर एकबद्ध होकर संघर्ष किया जाएगा।
राष्ट्रीय स्तर पर बड़े आंदोलन की तैयारी
प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से प्रदेश अध्यक्ष अश्वनी कुमार चेलक ने बताया कि राष्ट्रीय कार्यसमिति ने सभी राज्यों से आई रिपोर्ट और मांगों का संकलन कर केंद्र व संबंधित राज्य सरकारों के समक्ष ज्ञापन प्रस्तुत करने का निर्णय लिया है। यदि सरकारों द्वारा 8वें वेतन आयोग, डीए और पुरानी पेंशन जैसी बुनियादी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो महासंघ राष्ट्रीय स्तर पर चरणबद्ध आंदोलन की रूपरेखा तैयार करेगा।
चतुर विचार
पश्चिम बंगाल के कल्याणी में हुई राष्ट्रीय राज्य कर्मचारी महासंघ की यह बैठक कर्मचारियों की मांगों को एक नया राष्ट्रीय मंच देने में सफल रही है। छत्तीसगढ़ से पहुंचे प्रतिनिधिमंडल द्वारा उठाई गई 7 सूत्रीय मांगों ने राज्य के कर्मचारियों में एक नई उम्मीद जगाई है। अब देखने वाली बात होगी कि सरकारें इन जायज मांगों पर क्या रुख अपनाती हैं।







