
भोपाल। मध्य प्रदेश शासन के ऊर्जा विभाग (Energy Department) ने प्रदेश की बिजली कंपनियों में कार्यरत हजारों संविदा अधिकारियों और कर्मचारियों के हित में एक बड़ा फैसला लिया है। अब संविदा कर्मचारियों को भी नियमित शासकीय सेवकों की भांति ग्रेच्युटी (Gratuity) भुगतान का लाभ मिलेगा। इस संबंध में विभाग ने विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं, जिससे लंबे समय से चली आ रही संशय की स्थिति (Confusion) अब समाप्त हो गई है।
5 साल की निरंतर सेवा का नियम (Continuous Service Rule)
ऊर्जा विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, “ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम, 1972” के तहत लाभ प्राप्त करने के लिए कम से कम 5 वर्ष की निरंतर सेवा (Continuous Service) अनिवार्य है। पूर्व में, दो संविदा अनुबंधों के बीच 3 कार्य दिवसों के अंतराल (Gap) के कारण सेवा की निरंतरता में तकनीकी बाधा आती थी।
सरकार ने अब यह स्पष्ट कर दिया है कि:
- दो अनुबंधों के बीच नियम या प्रक्रियागत कारणों से हुए अंतराल (Interval) को सेवा में व्यवधान (Break in service) नहीं माना जाएगा।
- ग्रेच्युटी की गणना के लिए इस अंतराल की अवधि को छोड़कर शेष सेवा अवधि को जोड़ा जाएगा।
- ● पात्रता (Eligibility): यह नियम 1 अगस्त 2023 के बाद सेवा पूर्ण करने वाले या सेवा के दौरान मृत्यु होने वाले कर्मचारियों पर लागू होगा।
- ● आश्रितों को लाभ: संविदा कर्मचारी की मृत्यु की स्थिति में उनके आश्रितों (Dependents) को ग्रेच्युटी का भुगतान किया जाएगा।
- ● प्रभावी तिथि: जिनका संविदा अनुबंध 1 अगस्त 2023 को या उसके बाद वैध है, वे इसके पात्र होंगे।
इन कंपनियों पर लागू होगा आदेश (Applicability)
यह आदेश मध्य प्रदेश की सभी प्रमुख बिजली कंपनियों के प्रबंध संचालकों (Managing Directors) को भेज दिया गया है। इसमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
- एम.पी. पावर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड, भोपाल।
- मध्य क्षेत्र, पूर्व क्षेत्र और पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनियां (Jabalpur, Bhopal, Indore)।
- एम.पी. पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड, जबलपुर।
संविदा कर्मचारियों के लिए बड़ी जीत (Big Win for Contract Employees)
ऊर्जा विभाग का यह निर्णय संविदा कर्मचारियों के लिए एक बड़ी सामाजिक सुरक्षा (Social Security) की तरह देखा जा रहा है। अक्सर संविदा अवधि खत्म होने और दोबारा रिन्यू होने के बीच के समय को ‘ब्रेक’ मान लिया जाता था, जिससे वे ग्रेच्युटी के लाभ से वंचित रह जाते थे। अब सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रक्रियागत देरी (Procedural Delay) कर्मचारी का हक नहीं छीन सकती।
अब बिजली कंपनियों को अपने डेटाबेस में सुधार कर पात्र संविदा कर्मियों की सूची तैयार करनी होगी ताकि समय पर भुगतान सुनिश्चित (Ensure) किया जा सके। विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी वी.के. गौड़ द्वारा हस्ताक्षरित यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू माना जाएगा।

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