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‘बेटे को खोने जैसा है यह गम’, हादसे पर वेदांता चेयरमैन अनिल अग्रवाल का छलका दर्द, सुरक्षा चूक पर उठाए सवाल

कोरबा। “एक तरफ जवान बेटे को खोने का असहनीय दुख और दूसरी तरफ अपने 25 कर्मठ साथियों की अचानक विदाई—यह साल मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से किसी बड़ी त्रासदी से कम नहीं है।” यह भावुक शब्द वेदांता समूह (Vedanta Group) के चेयरमैन अनिल अग्रवाल (Anil Agarwal) के हैं, जिन्होंने सिंघीतराई (एथेना) पावर प्लांट हादसे पर पहली बार सार्वजनिक रूप से अपना मौन तोड़ा है।

सोशल मीडिया पर साझा किए गए अपने एक बेहद मार्मिक संदेश में अनिल अग्रवाल ने न केवल अपनी व्यक्तिगत पीड़ा (Personal Grief) व्यक्त की है, बल्कि प्लांट की सुरक्षा और ऑपरेशन्स को लेकर भी कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर बात की है।

विशेषज्ञता (Expertise) के बावजूद हुआ हादसा: अनिल अग्रवाल का सवाल

वेदांता प्रमुख ने अपनी प्रतिक्रिया में इस बात पर गहरा आश्चर्य और दुख (Shock and Sorrow) जताया कि सर्वोच्च सुरक्षा मानकों के बावजूद इतनी बड़ी अनहोनी कैसे हो गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि सिंघीतराई प्लांट के रखरखाव (Maintenance) और संचालन की कमान देश की सबसे प्रतिष्ठित और भरोसेमंद महारत्न कंपनी NTPC-GE (NGSL) को सौंपी गई थी।

उन्होंने एक प्रभावशाली उदाहरण देते हुए कहा, “यह ठीक वैसा ही है जैसे कोई वाहन मालिक अपनी गाड़ी किसी बेहद अनुभवी और लाइसेंस प्राप्त ड्राइवर को सौंपकर निश्चिंत हो जाता है कि सब सुरक्षित रहेगा। हमने भी विशेषज्ञता पर भरोसा किया था, लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण हादसा दिल तोड़ देने वाला है।” अनिल अग्रवाल ने जोर देकर कहा कि वेदांता के हर अनुबंध (Contract) में सुरक्षा (Safety) हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता रही है।

बेटे की मृत्यु और हादसे का दोहरा दर्द

यह खबर इसलिए भी अधिक मर्मस्पर्शी हो जाती है क्योंकि अनिल अग्रवाल स्वयं एक बड़े व्यक्तिगत संकट से गुजर रहे हैं। साल की शुरुआत में उन्होंने अपने नौजवान बेटे अग्निवेश को खो दिया था। उन्होंने कहा कि अपनों को खोने का दर्द क्या होता है, इसे वे गहराई से समझते हैं। 14 अप्रैल को हुए इस हादसे में 25 साथियों की मौत ने उनके पुराने जख्मों को फिर से हरा कर दिया है।

उन्होंने अपने संदेश के अंत में कहा, “असामयिक मृत्यु (Untimely Demise) का दर्द मैं भली-भांति जानता हूं। मेरे लिए वे 25 लोग केवल कर्मचारी नहीं, बल्कि मेरे अपने थे।”

मुआवजा वितरण (Compensation Distribution) और सहायता का भरोसा

हादसे के बाद उठ रहे सवालों और पीड़ित परिवारों की स्थिति पर सफाई देते हुए वेदांता प्रमुख ने जानकारी दी कि सिंघीतराई प्लांट हादसे के सभी पीड़ितों के परिजनों को नियमानुसार मुआवजा राशि वितरित कर दी गई है। उन्होंने प्रशासन और कंपनी के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सहायता की यह प्रक्रिया केवल मुआवजे तक सीमित न रहे।

एक चेयरमैन (Chairman) के रूप में उन्होंने प्रतिबद्धता जताई है कि वेदांता परिवार आगे भी प्रभावित परिवारों की हर संभव मदद करता रहेगा। उन्होंने विश्वास दिलाया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए सुरक्षा ऑडिट (Safety Audit) और कड़े कदम उठाए जा रहे हैं।

निष्कर्ष (Conclusion)

सिंघीतराई हादसे पर अनिल अग्रवाल का यह बयान न केवल एक कॉर्पोरेट लीडर की जिम्मेदारी को दर्शाता है, बल्कि उनकी मानवीय संवेदनाओं को भी उजागर करता है। जहां एक ओर सुरक्षा चूक के कारणों की जांच जारी है, वहीं चेयरमैन के इस सीधे संवाद ने प्रभावित परिवारों और कर्मचारियों के बीच एक सकारात्मक संदेश भेजने का प्रयास किया है।

निश्चित रूप से, विशेषज्ञता (Expertise) और भरोसे के बीच हुई इस अनहोनी ने औद्योगिक जगत के लिए सुरक्षा मानकों (Industrial Safety Norms) पर फिर से विचार करने की आवश्यकता पैदा कर दी है।

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S. J. Kumar

पत्रकारिता के क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव । सुदीर्घ करियर में राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। जटिल मुद्दों के सरल विश्लेषण और खोजी रिपोर्टिंग के साथ राजनीति, प्रशासन और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है। पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में Chaturpost.com में सेवाएं दे रहे हैं।
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