
नई दिल्ली |(Chaturpost Digital Desk) भारत के ऊर्जा क्षेत्र (Energy Sector) में एक बड़ी क्रांति दस्तक दे चुकी है। केंद्र सरकार अब बिजली चोरी (Power Theft), धोखाधड़ी (Fraud) और तकनीकी नुकसान (Technical Losses) को जड़ से खत्म करने के लिए Artificial Intelligence (AI) का सहारा ले रही है। अब तक जो बिजली चोर अंधेरे का फायदा उठाकर बच निकलते थे, उन्हें अब ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ की तीसरी आंख हर पल ट्रैक करेगी।
AI और स्मार्ट मीटर का घातक कॉम्बिनेशन
बिजली मंत्रालय (Power Ministry) ने हाल ही में सूचना प्रौद्योगिकी की स्थायी समिति को बताया कि सरकार Advanced Analytics और Machine Learning (ML) का उपयोग कर रही है। स्मार्ट मीटर (Smart Meters) से मिलने वाले डेटा का विश्लेषण करके AI यह पहचान लेगा कि किस इलाके में कितनी बिजली भेजी गई और कितनी इस्तेमाल हुई।
“AI की मदद से अब बिना किसी मानवीय दखल के बिजली के गैर-तकनीकी नुकसान (Non-technical losses) को रिकॉर्ड स्पीड और सटीकता (Accuracy) के साथ पकड़ा जा सकेगा।”
NTPC ने शुरू किया सोलर पावर का सटीक पूर्वानुमान
ऊर्जा क्षेत्र में सुधार के लिए सिर्फ बिजली चोरी रोकना ही काफी नहीं है, बल्कि बिजली का सही प्रबंधन (Grid Management) भी जरूरी है। देश की सबसे बड़ी बिजली उत्पादक कंपनी NTPC ने इसके लिए एक खास AI/ML आधारित फोरकास्टिंग सिस्टम तैनात किया है।
- रियल-टाइम डेटा (Real-time Data): यह सिस्टम मौसम की जानकारी देने वाले IoT स्टेशनों से डेटा लेता है।
- सैटेलाइट इनपुट (Satellite Inputs): बादलों की आवाजाही और सूरज की रोशनी (Irradiance) पर नजर रखता है।
- सटीक भविष्यवाणी (Accurate Forecast): यह सिस्टम पहले से बता देता है कि अगले दिन कितनी सोलर बिजली पैदा होगी, जिससे बिजली की बर्बादी कम होती है।
बिजली क्षेत्र में AI के 5 बड़े फायदे (Key Benefits)
सरकार के अनुसार, AI केवल चोरी ही नहीं रोकता, बल्कि यह पूरे सिस्टम को स्मार्ट बनाता है:
- ऊर्जा की बचत (Energy Saving): फालतू बिजली की बर्बादी को रोकने में मदद।
- लागत में कमी (Lower Operational Costs): सिस्टम के ऑटोमेशन से खर्चों में कटौती।
- स्वच्छ ऊर्जा (Clean Energy Adoption): सौर और पवन ऊर्जा (Renewable Energy) को ग्रिड के साथ जोड़ना आसान।
- मांग का अनुमान (Demand Forecasting): छुट्टियों और त्योहारों पर बिजली की कितनी जरूरत होगी, इसका सटीक अंदाजा।
- ग्रिड स्थिरता (Grid Stability): अचानक बिजली गुल होने (Power Outages) की घटनाओं में कमी।
साइबर सुरक्षा: 1 जनवरी 2026 से बदला नियम
जैसे-जैसे हम डिजिटल हो रहे हैं, साइबर हमलों (Cyberattacks) का खतरा भी बढ़ रहा है। इसे देखते हुए सरकार ने Cyber Security in Power Sector Regulations को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है।
सबसे महत्वपूर्ण बदलाव 1 जनवरी 2026 से लागू । बिजली क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले सभी IT उपकरण और सेवाओं को अब ‘विश्वसनीय टेलीकॉम पोर्टल’ (Trusted Telecom Portal) से सुरक्षा मंजूरी (Security Clearance) लेनी अनिवार्य होगी। इसका मतलब है कि कोई भी विदेशी उपकरण सीधे हमारे पावर ग्रिड में नहीं लग पाएगा।
ग्रिड कंट्रोलर ऑफ इंडिया की नई तैयारी
Grid Controller of India Limited अब एक ऐसे AI मॉडल पर काम कर रहा है जो मौसम, ऐतिहासिक डेटा और सप्ताहांत (Weekends) जैसे कारकों को मिलाकर बिजली की मांग का अनुमान लगाएगा। सरकार का लक्ष्य इसमें 3-5% का Error Margin रखना है, जो कि वैश्विक स्तर पर बहुत ही सटीक माना जाता है।
chaturpost: भविष्य की ओर बढ़ता भारत
सरकार का यह कदम न केवल बिजली कंपनियों (DISCOMs) को घाटे से उबारेगा, बल्कि आम उपभोक्ताओं को भी बेहतर और सस्ती बिजली दिलाने में मदद करेगा। AI के इस उपयोग से ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘ग्रीन एनर्जी’ के लक्ष्यों को नई उड़ान मिलेगी।







