
Chaturpost News Desk भारत सरकार के वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) ने देश के हजारों सरकारी ठेकेदारों, कंसल्टेंट्स और सर्विस प्रोवाइडर्स को एक बड़ी राहत दी है। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों, विशेष रूप से पश्चिम एशिया (West Asia situation) में जारी तनाव को देखते हुए सरकार ने ‘फोर्स म्योर’ यानी Force Majeure Clause (FMC) को सक्रिय करने का फैसला किया है।
व्यय विभाग (Department of Expenditure) द्वारा 29 अप्रैल 2026 को जारी एक आधिकारिक ज्ञापन (Office Memorandum) के अनुसार, जो ठेकेदार युद्ध जैसी स्थितियों के कारण अपना काम समय पर पूरा नहीं कर पा रहे हैं, उन्हें अब न तो भारी जुर्माना (Penalty) देना होगा और न ही उनका कॉन्ट्रैक्ट ब्लैकलिस्ट होगा।
क्या है Force Majeure Clause (FMC)? सरल भाषा में समझें
सरल शब्दों में कहें तो Force Majeure एक ऐसी कानूनी स्थिति है जो किसी ‘ईश्वरीय घटना’ (Act of God) या ऐसी परिस्थितियों में लागू होती है जो इंसान के नियंत्रण से बाहर हों। इसमें प्राकृतिक आपदा, युद्ध, दंगे या महामारी जैसी घटनाएं शामिल होती हैं।
जब किसी अनुबंध (Contract) में यह क्लॉज लागू होता है, तो ठेकेदार और सरकारी विभाग दोनों को अपनी जिम्मेदारियों से कुछ समय के लिए छूट मिल जाती है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि काम में देरी होने पर ठेकेदार पर कोई आर्थिक दंड (Financial Repercussion) नहीं लगाया जाता।
पश्चिम एशिया संकट को माना गया ‘युद्ध’ (War)
वित्त मंत्रालय के इस नए आदेश (O.M. No.1/3/2026-PPD) की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकार ने स्पष्ट रूप से पश्चिम एशिया (West Asia) के हालातों को ‘युद्ध’ की श्रेणी में रखते हुए इसे FMC के लिए वैध आधार माना है।
अक्सर ठेकेदारों को यह साबित करने में पसीने छूट जाते थे कि वैश्विक संकट का उनके प्रोजेक्ट पर सीधा असर पड़ा है, लेकिन अब सरकार ने खुद ही इसे स्वीकार कर लिया है। यदि इस संकट के कारण आपके सामान की सप्लाई (Supply Chain) बाधित हुई है या प्रोजेक्ट साइट पर काम रुका है, तो आप इस राहत के हकदार हैं।
इन मैनुअल्स में किया गया है बदलाव (Technical Overview)
सरकार ने अपने विभिन्न प्रोक्योरमेंट मैनुअल्स (Procurement Manuals) का हवाला देते हुए यह निर्देश जारी किया है:
- Goods (सामान): Manual for Procurement of Goods, 2024 (Para 9.3.6)
- Consultancy (परामर्श): Manual for Procurement of Consultancy Services, 2025 (Para 10.4.9)
- Non-Consultancy: Manual for Procurement of Non-Consultancy Services, 2025
- Works (निर्माण): Manual for Procurement of Works, 2025 (Para 7.4.4)
ठेकेदारों के लिए आवेदन की प्रक्रिया (Transition to Action)
यदि आप एक सरकारी ठेकेदार हैं और इस वैश्विक संकट (Global Disruption) से प्रभावित हैं, तो आपको निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना होगा:
- समय सीमा (Time Limit): आपको FMC की घटना घटने के 14 दिनों के भीतर विभाग को लिखित सूचना (Notice) देनी होगी। इसे ‘एक्स-पोस्ट फैक्टो’ (Ex-post facto) यानी देरी से क्लेम नहीं किया जा सकता।
- दस्तावेजी प्रमाण (Evidence): आपको यह साबित करना होगा कि पश्चिम एशिया संकट का आपके प्रोजेक्ट की डिलीवरी (Delivery Period) पर सीधा असर पड़ा है।
- स्वैच्छिक समाप्ति (Contract Termination): यदि काम 90 दिनों से अधिक समय तक बाधित रहता है, तो दोनों में से कोई भी पक्ष बिना किसी वित्तीय नुकसान के अनुबंध को समाप्त (Terminate) करने का विकल्प चुन सकता है।
एक्सपर्ट की राय: उद्योग जगत पर क्या होगा असर?
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस कदम से बुनियादी ढांचा (Infrastructure) और निर्माण क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों को बड़ी राहत मिलेगी। पश्चिम एशिया से आने वाले कच्चे माल और लॉजिस्टिक्स की बढ़ती कीमतों और देरी ने कई प्रोजेक्ट्स को अधर में लटका दिया था।
वित्त मंत्रालय का यह फैसला न केवल इज ऑफ डूइंग बिजनेस (Ease of Doing Business) को बढ़ावा देता है, बल्कि सरकार की ‘संवेदनशील और सहायक’ (Supportive & Empathetic) छवि को भी मजबूत करता है।
निष्कर्ष (Conclusion)
वित्त मंत्रालय का 29 अप्रैल 2026 का यह आदेश सरकारी कार्यप्रणाली में एक बड़े बदलाव का संकेत है। यह स्पष्ट करता है कि असाधारण परिस्थितियों (Extraordinary Circumstances) में सरकार अपने साझेदारों के साथ खड़ी है।
यदि आप भी एक सरकारी प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं, तो तुरंत अपने संबंधित विभाग से संपर्क करें और अपनी स्थिति की समीक्षा (Case-to-case basis review) करवाएं ताकि आप समय विस्तार और जुर्माने से छूट का लाभ उठा सकें।
डिस्क्लेमर: यह खबर आधिकारिक सरकारी ज्ञापन पर आधारित है। किसी भी कानूनी कार्रवाई से पहले आधिकारिक मैनुअल और अपने अनुबंध की शर्तों को ध्यान से पढ़ें।







