
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने सरकारी दफ्तरों में जनप्रतिनिधियों के सम्मान को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (Department of Personnel & Training) ने 4 मई 2026 को एक ताजा कार्यालय ज्ञापन (Office Memorandum) जारी किया है।
इस आदेश के तहत प्रशासन (Administration) और सांसदों (Members of Parliament) व विधायकों के बीच होने वाले आधिकारिक व्यवहार (Official Dealings) के लिए सख्त दिशा-निर्देश (Guidelines) जारी किए गए हैं।
DoPT गाइडलाइंस 2026: मुख्य बातें
कार्मिक विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच संवाद और व्यवहार के लिए पुराने नियमों को ही और अधिक कड़ाई से लागू किया जा रहा है।
- सख्ती से अनुपालन (Compliance): सभी मंत्रालयों, विभागों और राज्य सरकारों के मुख्य सचिवों को निर्देश दिया गया है कि वे इन गाइडलाइंस को जिला और डिवीजन स्तर तक के अधिकारियों तक पहुँचाएं।
- सेंसिटाइजेशन (Sensitization): प्रशासनिक अधिकारियों को उनके कर्तव्यों और जनप्रतिनिधियों के प्रति उनकी जवाबदेही के बारे में जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं।
- अनुशासनात्मक कार्रवाई: नियमों का उल्लंघन करने वाले सरकारी सेवकों पर उचित जाँच के बाद सजा का प्रावधान भी किया गया है।
सांसदों और विधायकों के साथ व्यवहार के नियम
सरकारी अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों के साथ बातचीत करते समय निम्नलिखित बुनियादी सिद्धांतों (Basic Principles) का ध्यान रखना अनिवार्य है:
- शिष्टाचार और सम्मान: अधिकारियों को सांसदों/विधायकों से मिलते समय खड़े होकर उनका स्वागत करना चाहिए और उन्हें विदा करना चाहिए।
- अपॉइंटमेंट का सम्मान: यदि किसी सांसद या विधायक के साथ मुलाकात का समय तय है, तो उसमें किसी भी बदलाव की सूचना उन्हें तुरंत दी जानी चाहिए।
- फोन और संदेशों का जवाब: अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों के टेलीफोन कॉल, SMS और ईमेल को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और जल्द से जल्द उनका जवाब देना चाहिए।
- सार्वजनिक कार्यक्रम: स्थानीय सांसदों को सरकारी कार्यक्रमों में अनिवार्य रूप से आमंत्रित किया जाना चाहिए और उनके बैठने के लिए प्रोटोकॉल के अनुसार उचित व्यवस्था होनी चाहिए।
पत्रों का त्वरित निपटारा (Prompt Disposal)
जनप्रतिनिधियों की ओर से प्राप्त होने वाले पत्रों और सूचनाओं के लिए समय-सीमा (Timeline) तय की गई है:
- पावती (Acknowledgment): किसी भी पत्र के प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर उसकी पावती भेजी जानी चाहिए।
- अंतिम उत्तर: पावती भेजने के अगले 15 दिनों के भीतर अंतिम जवाब दिया जाना चाहिए।
- हस्ताक्षर का स्तर: यदि पत्र किसी मंत्री को संबोधित है, तो उत्तर यथासंभव मंत्री द्वारा ही दिया जाना चाहिए। अन्य मामलों में, उत्तर सचिव स्तर के अधिकारी के हस्ताक्षर से होना चाहिए।
- सूचना देना: सांसदों द्वारा मांगी गई जानकारी या आंकड़े (Statistics) विशिष्ट होने चाहिए और मांगी गई बातों का स्पष्ट उत्तर देने वाले होने चाहिए।
अधिकारियों के लिए विशेष निर्देश
अधिकारी सांसदों या विधायकों का उपयोग अपने व्यक्तिगत मामलों (जैसे प्रमोशन या ट्रांसफर) के लिए पैरवी करवाने हेतु नहीं कर सकते। ऐसा करना ‘कंडक्ट रूल्स’ (Conduct Rules) के खिलाफ माना जाएगा।
यह आदेश सक्षम प्राधिकारी (Competent Authority) के अनुमोदन के बाद उप सचिव जी.के. रजनीश द्वारा जारी किया गया है।








