
रायपुर Chaturpost.com। देश में स्मार्ट मीटर को लेकर चल रही तमाम बहसों और भ्रांतियों के बीच केंद्र सरकार की नोडल एजेंसी आरईसी लिमिटेड (REC) अब सीधे जनता की अदालत में पहुंच गई है। आरईसी ने एक व्यापक ‘Smart Meter Feedback Survey’ शुरू किया है, जिसके लिंक उपभोक्ताओं के व्हाट्सएप और मोबाइल पर भेजे जा रहे हैं।
चतुरपोस्ट की पड़ताल में सामने आया है कि यह सर्वे महज एक खानापूर्ति नहीं है, बल्कि स्मार्ट मीटर की पूरी कार्यप्रणाली को उपभोक्ता की नजर से समझने की एक बड़ी कोशिश है।
सर्वे में पूछे जा रहे हैं 8 कड़े सवाल
उपभोक्ताओं को भेजे जा रहे इस ऑनलाइन सर्वे में कुल 8 चरण (Steps) हैं। इसमें क्षेत्रीय भाषाओं जैसे हिंदी, अंग्रेजी, असमिया, बांग्ला और मिजो में जवाब देने की सुविधा दी गई है। सर्वे में मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर फीडबैक मांगा जा रहा है:
- बिल की पारदर्शिता: क्या डिस्कॉम द्वारा भेजा जा रहा बिल उपभोक्ता को आसानी से समझ आ रहा है?
- मोबाइल ऐप का उपयोग: क्या उपभोक्ता स्मार्ट मीटर के मोबाइल एप्लीकेशन को आसानी से चला पा रहे हैं?
- सुविधाओं की उपलब्धता: क्या ऐप में ‘वास्तविक समय खपत’ (Real-time consumption), ‘आउटेज अलर्ट’ और ‘शिकायत पंजीकरण’ जैसे विकल्प सही ढंग से काम कर रहे हैं?
- समग्र रेटिंग: अंत में उपभोक्ताओं से उनके अनुभव के आधार पर ‘उत्कृष्ट’ से लेकर ‘खराब’ तक की रेटिंग मांगी जा रही है।
सर्वे का क्या होगा असर?
आरईसी द्वारा कराए जा रहे इस सर्वे के नतीजे सीधे बिजली मंत्रालय को भेजे जाएंगे। हाल ही में यूपी और बिहार जैसे राज्यों में उपभोक्ताओं के विरोध के बाद नियमों में ढील दी गई है। अब इस फीडबैक के आधार पर स्मार्ट मीटर के ‘प्रीपेड‘ या ‘पोस्टपेड‘ मोड को चुनने का अधिकार उपभोक्ताओं को दिया जा सकता है।
चतुरपोस्ट की सलाह
यदि आपके पास भी आरईसी की ओर से ऐसा कोई फीडबैक लिंक आता है, तो उसमें अपनी सही राय जरूर दर्ज करें। आपकी प्रतिक्रिया ही आने वाले समय में बिजली बिलिंग की पारदर्शिता तय करेगी।
कैसे पहचानें असली सर्वे लिंक?
आरईसी के आधिकारिक सर्वे लिंक में विभाग का लोगो और स्पष्ट रूप से ‘Smart Meter Feedback Survey’ लिखा होता है। किसी भी निजी जानकारी या ओटीपी (OTP) मांगने वाले संदिग्ध लिंक से सावधान रहें।
स्मार्ट मीटर को लेकर राज्यों की स्थिति
उत्तर प्रदेश (UP): स्मार्ट मीटर रहेंगे, लेकिन ‘प्रीपेड‘ व्यवस्था पूरी तरह खत्म
उत्तर प्रदेश सरकार ने जनहित और उपभोक्ताओं की लगातार मिल रही शिकायतों (जैसे ओवर-बिलिंग और तकनीकी गड़बड़ियां) को देखते हुए मई 2026 में एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला लिया है:
- पोस्टपेड में कनवर्ट: ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा के आदेशानुसार, राज्य में जितने भी स्मार्ट प्रीपेड मीटर लग चुके थे, उन्हें तत्काल प्रभाव से पोस्टपेड मोड में बदल दिया गया है। यानी अब उपभोक्ताओं को पहले की तरह बिजली इस्तेमाल करने के बाद महीने के अंत में बिल मिलेगा।
- नए कनेक्शन भी पोस्टपेड: यूपी में अब जितने भी नए बिजली कनेक्शन दिए जाएंगे, उनमें स्मार्ट मीटर तो लगेंगे लेकिन वे अनिवार्य रूप से पोस्टपेड मोड में ही काम करेंगे।
- बिलिंग का नया नियम: हर महीने की 10 तारीख तक उपभोक्ताओं को SMS और WhatsApp के जरिए बिल भेज दिया जाएगा।
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देश स्तर पर क्या है आधिकारिक रिपोर्ट (Official Status)?
भारत सरकार की RDSS (Revamped Distribution Sector Scheme) योजना के तहत पूरे देश में स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। केंद्र सरकार की पीआईबी (PIB) रिपोर्ट और संसद में अप्रैल-मई 2026 में साझा किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार देश की स्थिति इस प्रकार है:
- कुल लक्ष्य: देश भर में 25 करोड़ (250 मिलियन) पारंपरिक मीटरों को स्मार्ट मीटरों से बदलने का महा-अभियान चल रहा है।
- अब तक की प्रगति: देश में अब तक विभिन्न सरकारी और राज्य योजनाओं के तहत 6.13 करोड़ से अधिक स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं।
- प्रीपेड की स्थिति: राष्ट्रीय स्तर पर लगाए गए कुल स्मार्ट मीटरों में से लगभग 2.25 करोड़ मीटर प्रीपेड मोड में काम कर रहे हैं। केंद्र सरकार का मूल नियम (CEA रेगुलेशन) यही कहता है कि जहां संचार नेटवर्क (Communication Network) मजबूत है, वहां प्रीपेड कार्यप्रणाली (Prepayment Functionality) होनी चाहिए, लेकिन अंतिम फैसला राज्य की डिस्कॉम (DISCOMs) पर निर्भर करता है।
अलग-अलग राज्यों में स्मार्ट मीटर की वर्तमान स्थिति
संसद में पेश रिपोर्ट और एडवांस्ड मीटरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर (AMISP) के डेटा के अनुसार राज्यों में अलग-अलग रणनीतियां अपनाई जा रही हैं:
| राज्य / केंद्रशासित प्रदेश | स्मार्ट मीटर क्रियान्वयन की वर्तमान स्थिति (Status) |
| उत्तर प्रदेश (UP) | पहले प्रीपेड मोड लागू किया था, लेकिन जनता के विरोध और तकनीकी दिक्कतों के बाद मई 2026 से शत-प्रतिशत पोस्टपेड मोड में कनवर्ट कर दिया गया है। |
| बिहार (Bihar) | देश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर को सबसे तेजी से और आक्रामक तरीके से लागू करने वाला अग्रणी राज्य है। यहां बड़ी संख्या में उपभोक्ता प्रीपेड मॉडल पर शिफ्ट हो चुके हैं। |
| असम और बिहार | यहां अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस (AESL) और अन्य निजी कंपनियों को बड़े टेंडर मिले हैं, जहां प्रतिदिन हजारों की संख्या में तेजी से मीटर सैचुरेशन (Saturation) मोड में लगाए जा रहे हैं। |
| केरल (Kerala) | केरल ने शुरुआत में केंद्र के हाइब्रिड मॉडल का विरोध किया था, लेकिन अब राज्य विद्युत बोर्ड (KSEB) अपने स्वयं के वैकल्पिक क्रियान्वयन मॉडल (Alternative Implementation Model) के तहत धीरे-धीरे इसका रोल-आउट कर रहा है। |
| मध्य प्रदेश (MP) | बिजली घाटे (AT&C Losses) को कम करने के लिए फीडर, डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफार्मर (DT) और घरेलू उपभोक्ताओं पर तेजी से हाइब्रिड (प्रीपेड/पोस्टपेड) स्मार्ट मीटरिंग लागू कर रहा है। |
| जम्मू और कश्मीर | आरडीएसएस (RDSS) योजना के तहत यहां तेजी से काम हुआ है और अब तक लगभग 5 लाख के करीब स्मार्ट मीटर इंस्टॉल किए जा चुके हैं ताकि बिजली चोरी और घाटे को रोका जा सके। |
केंद्र सरकार का नया रुख क्या है?
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) ने मार्च 2026 में ही मीटर स्थापना और संचालन नियमों में नए संशोधन (Draft Amendment Regulations, 2026) का मसौदा जारी किया है।
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केंद्र सरकार का कहना है कि वे उपभोक्ताओं को प्रीपेड मीटर अपनाने के लिए प्रोत्साहित (Incentivize) कर रहे हैं (जैसे बिल में कुछ छूट देना), लेकिन साथ ही बिजली कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि वे उपभोक्ताओं के हितों का ध्यान रखें, जैसे:
- स्मार्ट मीटर की अधिकतम मांग (Maximum Demand) रिकॉर्ड होने पर उपभोक्ता पर कोई पेनाल्टी नहीं लगेगी।
- अगर किसी का पुराना बिल बकाया है, तो उसे आसान किश्तों (Installments) में वसूलने की व्यवस्था की जाए।
- उपभोक्ताओं का भरोसा जीतने के लिए मुख्य स्मार्ट मीटर के साथ चेक मीटर (Check Meters) लगाने की भी सुविधा दी जा रही है ताकि उपभोक्ता अपनी संतुष्टि कर सकें।







