
न्यूज डेस्क (chaturpost.com): देश के ऊर्जा क्षेत्र यानी Energy Sector (इकोनॉमी का मुख्य आधार) में इस वक्त एक साथ कई बड़े भूचाल आए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए खजाना खोल दिया है।
एक तरफ जहां सरकार ने कोयले से गैस बनाने की महा-योजना को हरी झंडी दी है, वहीं दूसरी तरफ आम जनता के बिजली बिल के ढांचे में बड़े बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है। इसके साथ ही देश की सौर ऊर्जा क्षमता (Solar Power Capacity) ने भी एक नया इतिहास रच दिया है।
कैबिनेट का मास्टरस्ट्रोक: कोयला गैसीकरण योजना के लिए ₹37,500 करोड़ मंजूर
भारत सरकार ने देश के भीतर सतह कोयला गैसीकरण यानी Surface Coal Gasification प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा देने के लिए ₹37,500 करोड़ के भारी-भरकम वित्तीय परिव्यय (Financial Outlay) को मंजूरी दे दी है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य साल 2030 तक 100 मिलियन टन (MT) कोयले को गैस में बदलना है।
सरकार इस प्रोत्साहन योजना यानी Incentive Scheme के तहत प्लांट और मशीनरी की लागत का 20% या अधिकतम ₹5,000 करोड़ प्रति प्रोजेक्ट की सहायता देगी। इसके अलावा, गैर-पंजीकृत क्षेत्र (NRS) के लिए कोयले की लिंकेज अवधि को बढ़ाकर 30 साल कर दिया गया है।
इस ऐतिहासिक कदम से बाजार में ₹2.5 से ₹3.0 लाख करोड़ का निजी निवेश यानी Private Investment आने की उम्मीद है। सबसे बड़ी बात यह है कि इससे देश में लगभग 50,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार (Jobs) पैदा होंगे।
बड़ी उपलब्धि: भारत की बिजली क्षमता में 53.6% हिस्सा ‘ग्रीन एनर्जी’ का
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, 30 अप्रैल 2026 तक भारत की कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता 5,37,264 मेगावाट (MW) तक पहुंच गई है। इसमें सबसे चौंकाने वाली और सुखद बात यह है कि कुल क्षमता का 53.61% हिस्सा गैर-जीवाश्म ईंधन (Non-Fossil Fuel) स्रोतों से आ रहा है।
अकेले अप्रैल 2026 के महीने में, भारत ने रिकॉर्ड 4,317.16 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) को ग्रिड में जोड़ा, जबकि पारंपरिक कोयला आधारित बिजली में सिर्फ 207.5 मेगावाट का इजाफा हुआ। यह आंकड़ा साबित करता है कि भारत अब हरित ऊर्जा यानी Green Energy का ग्लोबल लीडर बन रहा है।
आम उपभोक्ताओं को झटका? बिजली के फिक्स्ड चार्ज बढ़ाने का प्रस्ताव
बिजली उपभोक्ताओं के लिए आने वाले दिन थोड़े बदलावों वाले हो सकते हैं। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) ने बिजली वितरण कंपनियों यानी DISCOMs की वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए बिजली के फिक्स्ड चार्ज (Fixed Charges) में चरणबद्ध बढ़ोतरी का एक नया प्रस्ताव रखा है।
सीईए की रिपोर्ट के मुताबिक, डिस्कॉम कंपनियों का फिक्स्ड कॉस्ट खर्च 38% से 56% तक होता है, लेकिन वर्तमान में उन्हें ग्राहकों के फिक्स्ड चार्ज से केवल 9% से 20% तक ही राजस्व (Tariff Revenue) मिलता है। इस घाटे को पाटने के लिए निम्नलिखित सिफारिशें की गई हैं:
- घरेलू और कृषि उपभोक्ता: साल 2030 तक फिक्स्ड चार्ज की वसूली बढ़ाकर 25% और 2035 तक 50% करने का लक्ष्य है।
- औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ता: कमर्शियल और इंडस्ट्रियल ग्राहकों से 100% फिक्स्ड कॉस्ट की वसूली फिक्स्ड चार्ज के जरिए ही की जाएगी।
- नया बिलिंग सिस्टम: 50 किलोवाट (kW) से अधिक खपत वाले उपभोक्ताओं को अब अनिवार्य रूप से kVAh बिलिंग सिस्टम पर ट्रांसफर किया जाएगा।
NTPC का धमाका: राजस्थान में 62.5 MW का नया सोलर प्लांट शुरू
भारत की दिग्गज सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी एनटीपीसी (NTPC Limited) ने राजस्थान में अपनी सहायक कंपनियों के माध्यम से 62.5 मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता के व्यावसायिक संचालन यानी Commercial Operation की घोषणा कर दी है। यह प्रोजेक्ट 15 मई 2026 से पूरी तरह चालू हो गया है।
इस नए प्लांट के जुड़ने के बाद, एनटीपीसी समूह (NTPC Group) की कुल स्थापित क्षमता बढ़कर 89,868 मेगावाट हो गई है। एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (NGEL) ने बताया कि इस कमीशनिंग के बाद उनकी कुल कमर्शियल क्षमता बढ़कर 10,516.40 मेगावाट के पार जा चुकी है।
फूजीयामा पावर सिस्टम्स का मध्य प्रदेश में बड़ा निवेश, रतलाम प्लांट चालू
सौर ऊर्जा उपकरणों के निर्माण में तेजी लाते हुए फुजीयामा पावर सिस्टम्स लिमिटेड (Fujiyama Power Systems) ने मध्य प्रदेश के रतलाम में अपनी नई विनिर्माण लाइन यानी Manufacturing Line चालू की है। यह एक 2,000 मेगावाट क्षमता की अत्याधुनिक सोलर पैनल मैन्युफैक्चरिंग लाइन है।
कंपनी इस ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट को शुरुआत में सिंगल-शिफ्ट में चलाएगी, जिससे सालाना 1,000 मेगावाट उत्पादन होगा। वित्त वर्ष 2027 की चौथी तिमाही (Q4 FY27) तक इसे डबल-शिफ्ट कर पूरी क्षमता से चलाया जाएगा। इस विस्तार के साथ फूजीयामा की कुल सोलर पैनल उत्पादन क्षमता अब 3,568 मेगावाट हो गई है। वित्तीय वर्ष 2026 में कंपनी ने ₹26,545 मिलियन का राजस्व और ₹3,041 मिलियन का शुद्ध मुनाफा (PAT) कमाया है।
इंटरनेशनल मार्केट में जलवा: ज्योति स्ट्रक्चर्स को श्रीलंका से मिला बड़ा ठेका
भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी ज्योति स्ट्रक्चर्स लिमिटेड (Jyoti Structures) ने विदेशी बाजारों में अपनी धाक जमाते हुए श्रीलंका में एक बड़ा कॉन्ट्रैक्ट हासिल किया है। कंपनी ने श्रीलंका के हेलीज फेंटन्स लिमिटेड के साथ मिलकर एक संयुक्त उद्यम यानी Joint Venture के तहत नेशनल ट्रांसमिशन नेटवर्क सर्विस प्रोवाइडर के साथ समझौता किया है।
यह प्रोजेक्ट श्रीलंका के मुल्लीकुलम विंड पावर ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट का हिस्सा है। इसके तहत मन्नार जीएस से मुल्लीकुलम कलेक्टर ग्रिड सबस्टेशन तक 28 किलोमीटर लंबी, 220 केवी (kV) की डबल-सर्किट ट्रांसमिशन लाइन बनाई जाएगी। करीब ₹67.96 करोड़ के इस प्रोजेक्ट को 18 महीने के भीतर पूरा किया जाना है।
विवादों में अटलांटा इलेक्ट्रिकल्स: बिहार यूटिलिटी ने 2 साल के लिए किया ब्लैकलिस्ट
बिजली सेक्टर से एक निगेटिव खबर भी सामने आई है। अटलांटा इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (Atlanta Electricals) को साउथ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (SBPDCL) ने अपने टेंडर में भाग लेने से 2 साल के लिए प्रतिबंधित (Debarred) कर दिया है। पूरा मामला ट्रांसफार्मर के टेस्टिंग परिणामों से जुड़े विवाद का है।
यह विवाद वित्तीय वर्ष 2023-24 में मिले ₹3 करोड़ से कम मूल्य के चार ट्रांसफार्मरों (10 MVA, 33/11 kV ONAN) की सप्लाई से जुड़ा है।
chatur विचार (Editor’s Take)
भारत का Energy Sector इस समय एक बड़े संक्रमण काल (Transition Phase) से गुजर रहा है। एक तरफ सरकार कोयला क्षेत्र को आधुनिक और स्वच्छ बनाने के लिए ₹37,500 करोड़ खर्च कर रही है, तो दूसरी तरफ रिन्यूएबल एनर्जी में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हो रही है। हालांकि, डिस्कॉम के फिक्स्ड चार्ज बढ़ने के प्रस्ताव से आम उपभोक्ताओं की जेब पर असर पड़ सकता है, लेकिन पावर ग्रिड को मजबूत करने के लिए इसे विशेषज्ञ जरूरी मान रहे हैं। देश-दुनिया और बिजनेस जगत की ऐसी ही सटीक और विश्वसनीय खबरों के लिए पढ़ते रहिए







