
रायपुर। छत्तीसगढ़ की सरकारी बिजली कंपनी में कार्यरत अधिकारी-कर्मचारियों के प्रमोशन से जुड़ी एक बेहद महत्वपूर्ण खबर देश की सबसे बड़ी अदालत से आ रही है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of India) ने छत्तीसगढ़ स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड रिजर्व्ड कैटेगरी ऑफिसर्स एम्प्लॉई एसोसिएशन (C.G. State Electricity Board Reserved Category Officers Employee Association) से जुड़े मामले में सुनवाई करते हुए एक नया आदेश जारी किया है ।
बिलासपुर हाई कोर्ट (High Court of Chhattisgarh) के पुराने फैसले को चुनौती देने वाली इस विशेष अनुमति याचिका (Special Leave Petition – SLP) पर शीर्ष अदालत में तीखी बहस हुई, जिसके बाद कोर्ट ने अंतिम निपटारे के लिए अगली तारीख तय कर दी है । इस फैसले का सीधा असर राज्य के बिजली संवर्ग के सैकड़ों कर्मचारियों के भविष्य पर पड़ने वाला है।
हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जंग (Legal Battle)
छत्तीसगढ़ विद्युत मंडल के आरक्षित वर्ग के अधिकारी-कर्मचारियों के इस संवेदनशील विवाद की जड़ें हाई कोर्ट बिलासपुर (Bilaspur High Court) के रिट पिटीशन (WPS No. 9778/2019) के अंतिम फैसले से जुड़ी हुई हैं । हाई कोर्ट के उसी फैसले (Impugned Judgment) को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है ।
न्यायालय के रिकॉर्ड (Record of Proceedings) के अनुसार, इस केस (Diary No. 5555/2025) में दोनों पक्षों की तरफ से देश के दिग्गज वकीलों ने अपनी दलीलें पेश कीं ।
इन वरिष्ठ वकीलों ने संभाला मोर्चा (Senior Advocates)
- याचिकाकर्ता की ओर से (For Petitioner): वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. के.एस. चौहान (Dr. K.S. Chauhan, Sr. Adv.) और अजीत कुमार एक्का ने आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों का पक्ष रखा ।
- प्रतिवादी की ओर से (For Respondents): राज्य सरकार और अन्य पक्षों की तरफ से सीनियर एडवोकेट देवदत्त कामत (Mr. Devadutta Kamat, Sr. Adv.) और अपूर्व कुरूप (Mr. Apoorv Kurup, Sr. Adv.) सहित वकीलों की एक बड़ी फौज ने पैरवी की ।
माननीय जजों की पीठ ने दिया यह निर्देश (Judicial Order)
इस बेहद अहम मामले की सुनवाई जस्टिस पामिदिघंटम श्री नरसिम्हा (Hon’ble Mr. Justice Pamidighantam Sri Narasimha) और जस्टिस आलोक अराधे (Hon’ble Mr. Justice Alok Aradhe) की दो सदस्यीय खंडपीठ (Bench) के समक्ष कोर्ट नंबर 6 में हुई ।
न्यायालय ने मामले की गंभीरता और इसमें लंबित विभिन्न आवेदनों (Intervention Application & Additional Documents) को देखते हुए इसे अंतिम निपटारे (For Final Disposal) के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है ।
जानिए क्यों अहम है यह सुनवाई? (Key Highlights)
बिजली कंपनी के गलियारों में इस केस को लेकर भारी उत्सुकता है। इस कानूनी प्रक्रिया से जुड़े कुछ मुख्य बिंदु (Main Points) इस प्रकार हैं:
- समय सीमा की छूट (Condonation of Delay): याचिका दायर करने में हुई देरी को माफ करने के लिए कोर्ट में आवेदन (IA No. 39954/2025) लगाया गया है ।
- अतिरिक्त दस्तावेज (Additional Documents): दोनों पक्षों की तरफ से केस को मजबूत करने के लिए नए तथ्य और दस्तावेज रिकॉर्ड पर लाने की अनुमति मांगी गई है ।
- अवमानना याचिका (Contempt Petition): इस मुख्य मामले के साथ एक अवमानना याचिका [CONMT.PET. (C) No. 494/2025] भी जुड़ी हुई है, जिस पर एक साथ विचार किया जा रहा है ।
अब पूरे छत्तीसगढ़ की नजरें 19 मई 2026 को होने वाली फाइनल सुनवाई पर टिकी हैं, जहां से बिजली विभाग के प्रमोशन नियमों (Promotion Rules) की भविष्य की दिशा तय होगी ।
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